"बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना अगले 5 वर्षों के लिए विस्तारित, ₹950 करोड़ की राशि स्वीकृत"
पटना/N5:
बिहार में युवाओं की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने और आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होने वाले विद्यार्थियों को राहत देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बिहार राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' (Bihar Student Credit Card Scheme) को अगले 5 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31) के लिए जारी रखने की मंजूरी दी गई है।
इस महत्वाकांक्षी योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए मंत्रिपरिषद ने ₹950 करोड़ की भारी-भरकम राशि के व्यय की स्वीकृति भी प्रदान की है। आकाशवाणी समाचार, पटना द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस राशि से राज्य भर के प्रतिभाशाली युवाओं को आगे की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती रहेगी।
योजना की मुख्य विशेषताएं और लाभ इस प्रकार से हैं।
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना राज्य सरकार की सात निश्चय योजना के प्रमुख घटकों में से एक है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में सकल नामांकन अनुपात (GER) में सुधार करना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को स्वावलंबी बनाना है।
₹4 लाख तक का शिक्षा ऋण: इस योजना के तहत 12वीं पास अभ्यर्थियों को उच्च शिक्षा (बीए, बीएससी, बीकॉम, बीटेक, एमबीबीएस, मैनेजमेंट आदि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों) के लिए 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण दिया जाता है।
रियायती ब्याज दरें: सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए बेहद कम (4%) ब्याज दर तय की गई है। वहीं महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को मात्र 1% की रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
आसान पुनर्भुगतान: पढ़ाई पूरी होने और रोजगार मिलने के बाद ही किश्तों की वापसी शुरू होती है, जिससे छात्रों और उनके परिवारों पर अचानक वित्तीय बोझ नहीं पड़ता।
इससे बिहार के लाखों युवाओं को मिल चुका है सहारा।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 4.81 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 4.15 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को 8,865 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।
युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए अहम कदम।
मंत्रिपरिषद के इस फैसले से राज्य के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के ऐसे लाखों मेधावी छात्रों को संबल मिलेगा जो पैसे की कमी के कारण डॉक्टर, इंजीनियर या स्नातक बनने का सपना पूरा नहीं कर पाते थे। योजना के विस्तार से अब अगले पांच वर्षों तक राज्य के युवा बिना किसी आर्थिक चिंता के अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे और देश-प्रदेश के विकास में योगदान दे पाएंगे।
(रिपोर्ट- न्यूज डेस्क N5)
