नालंदा में मिड-डे मील की बड़ी लापरवाही: नमक की जगह सर्फ मिलने से 20 से अधिक बच्चे अस्पताल में भर्ती।।
नालंदा में मिड-डे मील की बड़ी लापरवाही: नमक की जगह सर्फ मिलने से 20 से अधिक बच्चे अस्पताल में भर्ती।।
नालंदा|बिहार |N5:
बिहार के नालंदा जिले स्थित नूरसराय प्रखंड के परासी मध्य विद्यालय में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) के दौरान भयंकर लापरवाही का मामला सामने आया है। खाने में नमक कम होने की शिकायत पर कथित तौर पर नमक की जगह वाशिंग पाउडर (सर्फ) मिला दिया गया, जिसके बाद भोजन करते ही 25 से ज्यादा बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
घटना का मुख्य ब्योरा इस प्रकार से है:
लापरवाही की वजह ये बताए गए। मंगलवार को मेन्यू के तहत बच्चों को सोयाबीन-चावल परोसा गया था। बच्चों द्वारा सब्जी में नमक कम बताने पर रसोइए ने भूलवश नमक के डिब्बे के पास रखा सर्फ उठाकर खाने में मिला दिया।
स्वास्थ्य पर ये हुआ असर। सर्फ युक्त खाना खाते ही छात्र-छात्राओं को जी मिचलाने, उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत होने लगी।
अस्पताल में पसरा अव्यवस्था। स्कूल स्तर पर एंबुलेंस न मिलने के कारण परिजनों को बच्चों को ऑटो व ई-रिक्शा (टोटो) से बिहारशरीफ सदर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। वहां भी एक-एक बेड पर दो-तीन बच्चों को लिटाकर इलाज करने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया।
प्रशासनिक कदम व दावों में विरोधाभास का आना सामने :
"मिड-डे मील में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।" — श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री, बिहार।
घटना की सूचना मिलते ही मंत्री श्रवण कुमार सदर अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। वहीं दूसरी ओर, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने प्राथमिक स्तर पर सर्फ मिलाए जाने के दावे पर सवाल उठाते हुए जांच और मेडिकल रिपोर्ट आने का इंतजार करने की बात कही है।
व्यवस्थागत खामियों का विश्लेषण इस प्रकार से है:
यह हादसा केवल एक रसोइए की मानवीय भूल नहीं, बल्कि पोषण योजनाओं में फैली गहरी व्यवस्थागत लापरवाही को उजागर करता है। ऐसा कहना जल्दबजी होगी।
SOP का हुआ उल्लंघन। रसोईघर में खाद्य पदार्थों और हानिकारक केमिकल/सर्फ को एक साथ रखना सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन है।
गुणवत्ता जांच में चूक का मामला? नियम के मुताबिक भोजन परोसने से पहले शिक्षकों या जिम्मेदार कर्मियों द्वारा इसे चखा जाना अनिवार्य है, जिसे नजरअंदाज किया गया।
आपातकालीन सेवाओं की विफलता। दर्जनों बच्चों के बीमार होने के बावजूद समय पर एंबुलेंस न मिलना स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र की लाचारी को दर्शाता है।
N5: गरीब बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाली ऐसी घटनाओं पर केवल आश्वासन देने के बजाय आपूर्ति करने वाले NGO, स्कूल प्रशासन और निरीक्षण अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।
(रिपोर्ट- ओमप्रकाश सिंह N5)
