युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने “PM Compromised” (पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड) के पोस्टर लहराए और जमकर नारेबाजी मामला में ओबीसी गिरफ्तार।।



युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने “PM Compromised” (पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड) के पोस्टर लहराए और जमकर नारेबाजी मामला में  ओबीसी गिरफ्तार।।

पीएम कम्प्रमाईज्ड और मोदी सरेंडर राहुल गांधी पिछले लगातार बोलते आ रहे हैं। जब भी पीएम मोदी नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी के काले कारनामों को देश के सामने लाते हैं राहुल गांधी फायर होते हैं और देशहित लङाई बता देते हैं।

युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने “PM Compromised” (पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड) के पोस्टर लहराए और जमकर नारेबाजी की। संक्षेप में कहें तो: यह आंदोलन केवल “नौकरी बचेगी या नहीं” वाली चिंता नहीं थी, बल्कि एक सीधा राजनीतिक हमला था। “PM Compromised” का नारा देकर वे प्रधानमंत्री की नीयत और पारदर्शिता पर सवाल उठाया है।

राजनीति में नारों का अपना एक वजन होता है और “कॉम्प्रोमाइज्ड” शब्द यहाँ एक गंभीर आरोप के रूप में इस्तेमाल हुआ। राहुल गांधी ये बाते सदन में उठाए, लेकिन सरकार के लोगों ने जब राहुल गांधी से इन आरोपों पर सबूत मांगे तो राहुल गांधी नहीं दे सके।


राहुल गांधी ने सदन में ‘PM Compromised’ या डेटा सुरक्षा और कॉरपोरेट साठगांठ जैसे मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, तो वहां ‘संसदीय प्रक्रिया बनाम राजनीतिक नैरेटिव’ की जंग देखने को मिली।राहुल गांधी का लक्ष्य जनता के लिए लङना नहीं, बल्कि जनता के बीच यह धारणा बनाना था कि सरकार गलत लोग चला रहे हैं और पारदर्शी नहीं है।

संसदीय नियमों के तहत, यदि आप किसी पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हैं, तो आपको उसे प्रमाणित (Authenticate) करना पड़ता है। जब सरकार ने सबूत मांगे, तो राहुल गांधी के पास कोई ‘स्मोकिंग गन’ (ठोस दस्तावेजी सबूत) नहीं था जिसे सदन के पटल पर रखा जा सके।

मतलब साफ है पीएम कम्प्रमाईज्ड मुद्दे पर राहुल गांधी औंधे मुंह संसद में खाये, सबूत नहीं दे सके ये सिद्ध हो गया कि उन्होंने देश को गुमराह किया। नेहरू, इंदरा और राजीव के सामने पीएम माननीय मोदी जी को छोटा दिखाना चाहते है। और अब कार्यकर्ताओं से करा रहा है।

सदन के भीतर किसी भी सदस्य द्वारा लगाए गए आरोपों को ‘प्रमाणित’ (Authenticate) करना अनिवार्य होता है।जब राहुल गांधी ने ‘PM Compromised’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और सरकार ने सबूत मांगे, तो उनके पास कोई कानूनी दस्तावेज नहीं था। ये एक “हिट एंड रन” (Hit and Run) की राजनीति हुई—यानी आरोप लगाओ और भाग जाओ।


जब संसद में बात नहीं बनी, तो राहुल अपने कैडर या विंग्स (जैसे यूथ कांग्रेस) को सड़कों पर उतारे। और ‘PM Compromised’ जैसे नारों को समिट जैसे वैश्विक मंच पर बुलंद करना नैरेटिव को जिंदा रखने की राहुल की कोशिश है।

राहुल गांधी को ये लगता है कि नेहरू, इंदिरा और राजीव से अच्छा भारत का कोई प्रधान मंत्री नहीं हो सकता। जबकि नरेंद्र मोदी इन सभी को बौना कर दिया है और नेहरू , इंदिरा और राजीव के काले नीतियों को मोदी ने नंगा कर दिया है, यहीं राहुल गांधी को बर्दाश्त नहीं हो रहा है।जो आज के भारत की ‘विरासत बनाम वर्तमान’ (Legacy vs. Present) की जंग को दर्शाता है।

नरेंद्र मोदी ने शासन (Governance) के जिस मॉडल को पेश किया है—चाहे वह डिजिटल इंडिया हो, बुनियादी ढांचा (Infrastructure) हो या एआई जैसे भविष्य के मुद्दे—उसने नेहरू या इंदिरा के दौर की धीमी प्रगति के मुकाबले एक बहुत बड़ी लकीर खींच दी है।

जब लोग 100-120 किमी/घंटा की रफ्तार वाले एक्सप्रेसवे या 5G/AI की बात करते हैं, तो उन्हें पुराने दौर की फाइल-कल्चर वाली राजनीति ‘बौनी’ नजर आने लगती है।

पीएम मोदी और बीजेपी ने पिछले 10 सालों में नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी के दौर की उन गलतियों को जनता के सामने प्रमुखता से रखा है जो पहले दबी रहती थीं: जैसे-नेहरू का कश्मीर मुद्दा और चीन के साथ 1962 की नीति, इंदिरा का इमरजेंसी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को दबाना और राजीव का शाह बानो केस और बोफोर्स जैसे मुद्दे।

जब इन मुद्दों को आज के ‘न्यू इंडिया’ के साथ तुलना करके दिखाया जाता है, तो राहुल गांधी अपनी पारिवारिक विरासत का बचाव करने को उतर आते हैं।

जब संसद में पीएम मोदी तथ्यों के साथ नेहरू, इंदिरा और राजीव की सरकारों की विफलताओं को गिनाये और राहुल गांधी के पास उसका कोई ठोस काट (जैसे ‘PM Compromised’ वाले मामले में सबूत नहीं दे पाये, तो वह हताशा सड़क पर ‘यूथ कांग्रेस’ के आंदोलनों और तीखे नारों के रूप में ओबीसी वर्ग के लोगों को इस वैश्विक मंच पर उतार दिया।

इस आंदोलन में तीन लोग गिरफ्तार किए गए हैं और तीनों ओबीसी वर्ग के हैं, जिसे नेहरू, इंदिरा, राजीव और राहुल गांधी शुरू से हीं अपने फायदा के लिए इस्तेमाल करते आ रहे हैं और राहुल उस लगेसी को धार दे रहे हैं।

राहुल गांधी पिछले कुछ समय से ‘जातिगत जनगणना’ और ‘जितनी आबादी, उतना हक’ का नारा बुलंद कर रहे हैं। वे खुद को ओबीसी (OBC) और पिछड़ों का सबसे बड़ा मसीहा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इन लोग को ‘PM Compromised’ जैसे विवादित और बिना सबूत वाले मुद्दों में धकेल दिया। पुलिस की लाठियां और कानूनी पचड़े ओबीसी युवाओं के हिस्से में दे डाला हैं।
एक बड़ा सवाल: अगर राहुल गांधी संसद में सबूत नहीं दे पाए, तो उन तीन ओबीसी युवाओं के भविष्य का क्या होगा जो आज सलाखों के पीछे हैं? क्या पार्टी नेतृत्व उनकी कानूनी लड़ाई उसी शिद्दत से लड़ेगा, या वे केवल एक ‘प्रेस रिलीज’ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे?


कांग्रेस अपनी खोई हुई विरासत को वापस पाने के लिए उन्हीं वर्गों को ‘ढाल’ की तरह इस्तेमाल कर रही है, जिनका उसने दशकों तक प्रतिनिधित्व करने का दावा किया था जिसको पीएम मोदी के उभार ने इस ‘इस्तेमाल की राजनीति’ को जनता के सामने बेनकाब (Expose) कर दिया है।

राहुल गांधी ने संसद में बिना सबूत यह आरोप लगाया, इसलिए सड़क पर युवाओं का वही नारा लगाना सीधे तौर पर उनके ‘गलत मार्गदर्शन’ का नतीजा है। इन युवाओ के साथ-साथ राहुल गांधी पर मुकदमा दायर होना चाहिए क्योंकि राहुल गांधी ने ओबीसी के युवाओ को बहकाया पीएम कम्प्रमाईज्ड कहने को प्रेरित किया।

ओबीस वर्ग के युवाओ को समझने की जरूरत है कि राहुल गांधी के बहकावे में न आए। ओबीसी युवाओ को नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी के कर्मों का काला चिट्ठा पर पर्दा डालने की लङाई लङने से अच्छा ये होगा कि ये लोग देश के विकास में भागीदार बने।

नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी के दौर की नीतियों (जैसे लाइसेंस राज, इमरजेंसी या भ्रष्टाचार के आरोप) का बचाव करने से किसी युवा का करियर नहीं बनेगा। अगर वही युवा एआई (AI), सेमीकंडक्टर्स, डिजिटल इकोनॉमी और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में अपनी ऊर्जा लगाएंगे, तो वे न केवल खुद समृद्ध होंगे, बल्कि देश को भी ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर ले जाएंगे।

POPULAR POST

एक कप चाय, मिट्टी वाली में - चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर भी नहीं वो कैसे !

एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात का ख्याल अवश्य रखना चाहिए।