भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: 'टैरिफ किंग' की छवि छोड़ क्या अब बनेगा 'एक्सपोर्ट किंग'? जानें भारत की बड़ी जीत के मायने।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: 'टैरिफ किंग' की छवि छोड़ क्या अब बनेगा 'एक्सपोर्ट किंग'? जानें भारत की बड़ी जीत के मायने।।

नई दिल्ली | 9 फरवरी, 2026

भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत के बाद, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगे भारी-भरकम 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है। इसे मोदी सरकार की एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए $30 ट्रिलियन के अमेरिकी बाजार के दरवाजे खोल देगा।

प्रमुख बिंदु: समझौते की 5 बड़ी बातें

  1. टैरिफ में भारी कटौती: अमेरिका भारतीय उत्पादों पर अब 50% के बजाय केवल 18% टैरिफ लगाएगा। यह नियम 7 फरवरी, 2026 से प्रभावी हो गया है।

  2. जीरो टैरिफ का लाभ: दवाएं (Pharmaceuticals), रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery) और विमान के पुर्जों जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों पर शून्य शुल्क (Zero Duty) लगेगा।

  3. चीन और पड़ोसियों पर बढ़त: 18% टैरिफ के साथ भारत अब चीन (30%), बांग्लादेश (20%) और वियतनाम (20%) जैसे प्रतिस्पर्धियों से बेहतर स्थिति में आ गया है।

  4. ऊर्जा और तकनीक का वादा: भारत अगले 5 वर्षों में अमेरिका से $500 अरब की ऊर्जा (तेल/गैस), विमान और तकनीक खरीदेगा। साथ ही, रूस से तेल की निर्भरता कम करने पर सहमति बनी है।

  5. किसानों के हितों की रक्षा: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि मक्का, गेहूं, चावल और डेयरी जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों पर भारत ने कोई टैरिफ रियायत नहीं दी है, जिससे भारतीय किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।


किन सेक्टर्स की चमकेगी किस्मत?

इस समझौते से भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labour-Intensive Sectors) को सबसे अधिक लाभ होने वाला है:

  • टेक्सटाइल और परिधान: कपड़ा उद्योग को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिली है।

  • हस्तशिल्प और एमएसएमई: छोटे उद्यमियों और कारीगरों के उत्पाद अब अमेरिका में सस्ते और प्रतिस्पर्धी होंगे।

  • फार्मा सेक्टर: जेनेरिक दवाओं पर जीरो टैरिफ से भारतीय दवा कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा।

  • कृषि उत्पाद: चाय, मसाले, कॉफी और नारियल तेल जैसे उत्पादों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अमेरिकी बाजार में प्रवेश मिलेगा।

क्या हैं इसके कूटनीतिक मायने?

यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने पर लगाए गए अतिरिक्त 25% दंड शुल्क (Punitive Tariff) को हटाना यह दर्शाता है कि अमेरिका अब भारत को एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के रूप में देख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल को नई गति मिलेगी और दुनिया भर की कंपनियां जो 'चीन प्लस वन' रणनीति अपना रही हैं, वे अब भारत की ओर रुख करेंगी।

"यह समझौता भारत के किसानों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खोलेगा। यह 'नमस्ते ट्रंप' की 'हाउडी मोदी' पर एक बड़ी जीत है।"पीयूष गोयल, वाणिज्य मंत्री


निष्कर्ष

यद्यपि कुछ विपक्षी दल इसे पहले के कम टैरिफ (2.9%) के मुकाबले 18% होने पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन वर्तमान वैश्विक व्यापार युद्ध के दौर में 50% से 18% पर आना और कई उत्पादों को शुल्क मुक्त कराना निश्चित रूप से भारत के लिए एक रणनीतिक बढ़त है।

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