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नई दिल्ली/पटना: संसद के बजट सत्र (2026) के दौरान लोकसभा में सोमवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक 'अप्रकाशित' किताब (Memoir) के अंशों का जिक्र किया। राहुल गांधी के इन दावों पर सत्ता पक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही में कई बार व्यवधान पड़ा।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए राहुल गांधी ने चीन सीमा विवाद और डोकलाम का मुद्दा उठाया। उन्होंने एक मैगजीन में छपे पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे के संस्मरणों (Four Stars of Destiny) के हवाले से सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल ने दावा किया कि किताब में चीनी सेना की घुसपैठ और उस पर सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर कुछ ऐसी बातें हैं जो देश के सामने आनी चाहिए।
जैसे ही राहुल गांधी ने किताब से पंक्तियाँ पढ़नी शुरू कीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
अमित शाह ने कहा कि सदन की यह परंपरा और नियम नहीं है कि किसी ऐसी किताब या लेख का हवाला दिया जाए जो प्रमाणित (Authenticated) न हो या अभी प्रकाशित ही न हुई हो।
रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बिना आधार के बोलना गैर-जिम्मेदाराना है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को टोकते हुए नियम 349 का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में ऐसी किसी भी सामग्री को उद्धृत (Quote) नहीं किया जा सकता जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न हो या जिसे सदन के पटल पर न रखा गया हो। स्पीकर ने कहा, "सदन मर्यादा और नियमों से चलता है, आप किसी भी अप्रकाशित लेख को आधार बनाकर गंभीर आरोप नहीं लगा सकते।"
इस बहस में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी कूद पड़े। उन्होंने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि चीन का मुद्दा बेहद संवेदनशील है और अगर नेता प्रतिपक्ष किसी महत्वपूर्ण जानकारी को साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें बोलने की अनुमति मिलनी चाहिए। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार सच सुनने से क्यों घबरा रही है?
बता दें कि जनरल एम.एम. नरवणे की यह किताब पिछले काफी समय से रक्षा मंत्रालय की समीक्षा (Review) के अधीन है। सेना के नियमों के अनुसार, किसी भी उच्च पदस्थ अधिकारी को अपनी किताब प्रकाशित करने से पहले सुरक्षा और गोपनीयता के मानकों पर क्लीयरेंस लेना अनिवार्य होता है।
निष्कर्ष: संसद में हुआ यह हंगामा साफ करता है कि 2026 के चुनावी समीकरणों के बीच विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन के मुद्दे पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता, वहीं सरकार इसे नियमों और मर्यादा का उल्लंघन बता रही है।
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