विजय (Thalapathy Vijay) का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय।AIADMK (47 सीटें) ने दिया संकेत।।
भारत किससे खरीदे तेल । बङा सवाल और बङा फैसला। किसका पलरा भारी। रूस या वेनेजुएला।।
फरवरी 2026 में हुए भारत-अमेरिका ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत को रुस से तेल खरीदना चाहिए कि वेनेजुएला से। यह एक बङा सवाल बनकर भारत के समाने खङा है । तो चलिए इस सवाल को जानने का प्रयास करते हैं। इस लेख में हम जानने का प्रयास करेंगे कि भारत के लिए क्या फायदे का सौदा रहेगा वेनेजुएला या रूस या फिर तीसरा विकल्प की दोनों से थोङा-थोङा खरीदा जाय। तो चलिये जानते हैं।
रूस से तेल खरीदने के फायदेः
रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण, वह भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार (Brent Crude) की तुलना में $6 से $10 प्रति बैरल तक की छूट के साथ भारत को ऑयल दे रहा है । इससे भारत के 'आयात बिल' (Import Bill) में अरबों डॉलर की बचत होती है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहता है और इसमें इजाफा भी हो रहा है।
आर्थिक दवाबः यह भारत के लिए कई तरह से फायदा पहुंचचा रहा है । जिसमें एक है महंगाई। भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है। अगर भारत महंगे अमेरिकी तेल की ओर पूरी तरह मुड़ता है, तो घरेलू बाज़ार में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। जिससे देश में महंगाई का असर दिखाई देने लगेगा। रूस से सस्ता तेल मिलने के कारण भारत में परिवहन और माल ढुलाई की लागत नियंत्रित रहती है, जिससे आम आदमी को महंगाई से राहत मिल रही है।
तकनीकि कारणः भारत की कई बड़ी रिफाइनरियां (जैसे नायरा एनर्जी और सरकारी तेल कंपनियाँ) रूस के 'यूराल' (Urals) कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए तकनीकी रूप से डिज़ाइन की गई हैं। अमेरिकी तेल (Shail Oil) हल्का और अलग प्रकृति का होता है। पूरी तरह से अमेरिकी तेल पर निर्भर होने के लिए रिफाइनरियों में तकनीकी बदलाव करने होंगे, जिसमें भारी खर्च और समय लग सकता है।
राजनीतिक कारणः भारत की नीति हमेशा से रही है कि वह किसी एक देश पर निर्भर न रहे। रूस से तेल खरीदकर भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को 'डायवर्सिफाई' (विविध) करता है। इससे मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) या अमेरिका के साथ किसी भी राजनीतिक तनाव की स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर आंच नहीं आती। रूस से तेल खरीदना यह दर्शाता है कि भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है और वह अपने 'राष्ट्रीय हित' को सर्वोपरि रखता है। इससे रूस के साथ भारत के पुराने रक्षा और कूटनीतिक संबंध भी मज़बूत बने रहते हैं।
वेनेजुएला से तेल खरीदने के फायदेः
वेनेजुएला से भी भारत तेल खरीदता रहा है। इस देश में बहुत पहले से भारत भारी मात्रा में निवेश कर चुका है। भारत की नीजि कंपनिया और सरकारी कंपनिया दोनों मिलकर इस देश में भारी निवेश कर चुका है। इसलिए यहाँ से तेल खरीदना भारत के लिए हमेशा से एक रणनीतिक और आर्थिक लाभ का सौदा रहा है। हाल ही में (फरवरी 2026) भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद वेनेजुएला का महत्व और बढ़ गया है।
एसबीआई का रिसर्च रिपोर्टः SBI रिसर्च की हालिया रिपोर्ट (फरवरी 2026) के अनुसार, यदि भारत रूस के बजाय वेनेजुएला से भारी कच्चा तेल (Heavy Crude) खरीदता है, तो भारत अपने वार्षिक तेल आयात बिल में $3 बिलियन (लगभग ₹25,000 करोड़) तक की बचत कर सकता है। शर्त ये है कि इसके लिए वेनेजुएला से मिलने वाली छूट कम से कम $10–12 प्रति बैरल होनी चाहिए।
भारतीय कंपनियां का भारी निवेशः वेनेजुएला में कई भारतीय कंपनिया कच्चा तेल रिफान के लिए अपना निवेश कर चुकी हैं। भारत की बड़ी रिफाइनरियां, जैसे रिलायंस (Reliance) और IOC, वेनेजुएला के "भारी कच्चे तेल" (जैसे Merey 16) को रिफाइन करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई हैं। भारी तेल सस्ता होता है और भारतीय कंपनियाँ इसे प्रोसेस करके उच्च मूल्य वाले उत्पाद (डीजल, पेट्रोल) बनाकर निर्यात भी कर सकती हैं, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन बढ़ता है।
फंसा हुआ पैसा वापस आने की उम्मीदः भारत की सरकारी कंपनी ONGC Videsh का वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों में भारी निवेश है और करोड़ों डॉलर का डिविडेंड (Dividend) वहां फंसा हुआ है।यदि वेनेजुएला में तेल व्यापार फिर से शुरू होते हैं तो भारत को वह फंसा हुआ पैसा 'तेल' के रूप में वापस मिल सकता है। नहीं तो फिर पैसा लोटने की उम्मीद कम हीं जताई जा रही है।
अमेरिका के साथ राजनीतिक संतुलनः रूस से तेल खरीदने पर अक्सर अमेरिका नाराजगी जताता रहा है। और भारत के खिलाफ खङा हो जाता है। जो भारत के लिए अच्छे संकेत नहीं दिखते। और चूंकि अब वेनेजुएला का तेल क्षेत्र काफी हद तक अमेरिकी प्रभाव/नियंत्रण में है, इसलिए वहां से तेल खरीदना भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों (Trade Deal 2026) के लिए भी सकारात्मक है। इससे भारत पर रूस से निर्भरता कम करने का दबाव भी घटेगा।
बदलते वैश्विक राजनीतिक दौर मेंः आज के बदलते वैश्विक दौर में किसी देश को एक देश (जैसे सिर्फ रूस या मध्य-पूर्व) पर निर्भर रहना एक जोखिम भरा फैसला कभी भी साबित हो सकता है। इसलिए वेनेजुएला एक भरोसेमंद विकल्प है जो संकट के समय भारत की ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित कर सकता है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (Oil Reserves) है। हालांकि वेनेजुएला भारत से बहुत दूर है (रूस की तुलना में दोगुनी दूरी), जिससे शिपिंग लागत (Freight Cost) बढ़ जाती है। लेकिन अगर वेनेजुएला $10 से $12 प्रति बैरल की डिस्काउंट देता है, तो यह दूरी का खर्च निकालने के बाद भारत के लिए बहुत मुनाफे का सौदा साबित होगा। और वेनेजुएला भारत के लिए तीसरा विकल्प भी तैयार हो जायेगा। जो भविष्य में भारत के लिए सुरक्षित आर्थिक नीति का आधार बनेगा।