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कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा (Bhupen Borah) आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे -असम। ।



कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा (Bhupen Borah) आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे -असम। ।

असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा (Bhupen Borah) आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रहे हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 17 फरवरी, 2026 को इसकी पुष्टि की है। 

​भूपेन बोरा 22 फरवरी, 2026 को औपचारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता लेंगे। उन्होंने 16 फरवरी, 2026 को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि कांग्रेस आलाकमान (राहुल गांधी और गौरव गोगोई सहित) ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अपना फैसला नहीं बदला। 

गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में बीजेपी में शामिल होंगे। उनके साथ कई अन्य कांग्रेस नेताओं के भी बीजेपी में जाने की संभावना है। बोरा ने पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस करने और आंतरिक कलह को इस्तीफे का कारण बताया। 2025 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाकर गौरव गोगोई को जिम्मेदारी दी गई थी, जिससे वे नाराज चल रहे थे।
​मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बोरा का स्वागत करते हुए उन्हें "कांग्रेस में असम का आखिरी बड़ा हिंदू नेता" बताया और इसे उनकी "घर वापसी" करार दिया। असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले यह कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
इससे असम में होने वाले अगामी विधान सभा चुनाव में कांग्रेस पर सीधा असर पङेगा। भूपेन बोरा का कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होना 2026 के असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए एक "अस्तित्व का संकट" पैदा कर सकता है। 

​1. नेतृत्व का संकट और आंतरिक कलह
​भूपेन बोरा का जाना कांग्रेस के भीतर गहरी दरार को दर्शाता है। उनके इस्तीफे के पीछे मुख्य कारण वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई के साथ मतभेद और टिकट वितरण को लेकर असंतोष बताया जा रहा है। एक अनुभवी नेता का चुनाव से ठीक पहले जाना पार्टी के सांगठनिक ढांचे को कमजोर करेगा।

​2. "असमिया हिंदू" पहचान का मुद्दा
​मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बोरा को कांग्रेस का "आखिरी बड़ा हिंदू नेता" कहा है। यह एक सोची-समझी रणनीति है जिसके जरिए बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि कांग्रेस अब केवल अल्पसंख्यक (मुस्लिम) राजनीति तक सीमित रह गई है। इससे कांग्रेस के पारंपरिक हिंदू वोट बैंक में बड़ी सेंध लग सकती है।

3. सांगठनिक मनोबल पर चोट
​भूपेन बोरा केवल एक चेहरा नहीं थे, बल्कि 32 सालों से कांग्रेस से जुड़े एक जमीनी कार्यकर्ता थे। उनके जाने से बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरेगा। साथ ही, संभावना जताई जा रही है कि उनके साथ कांग्रेस के कई अन्य विधायक और स्थानीय नेता भी बीजेपी में शामिल होंगे, जिससे कांग्रेस की चुनावी मशीनरी बिखर सकती है।

​4. बीजेपी की "क्लीन स्वीप" की कोशिश
​बीजेपी पहले से ही '100+' सीटों का लक्ष्य लेकर चल रही है। बोरा के आने से बीजेपी को ऊपरी असम (Upper Assam) और उनके गृह क्षेत्र लखीमपुर में बढ़त मिलेगी। बीजेपी उन्हें एक सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ाने की योजना बना रही है, जिससे उनके समर्थकों का वोट सीधे बीजेपी के पाले में जा सकता है।

​5. विपक्ष की एकता को झटका
​भूपेन बोरा 'संयुक्त विपक्षी मंच' के संयोजक के रूप में अन्य दलों (जैसे रायजोर दल और एजेपी) के साथ तालमेल बिठाने में अहम भूमिका निभा रहे थे। उनके हटने से विपक्षी गठबंधन की सीट-बंटवारे की बातचीत प्रभावित होगी और विपक्ष बिखरा हुआ नजर आएगा।

​निष्कर्ष: कांग्रेस के लिए यह केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि चुनाव से ऐन पहले अपना "असमिया चेहरा" खोना है। अगर गौरव गोगोई और कांग्रेस आलाकमान ने तुरंत डैमेज कंट्रोल नहीं किया, तो आगामी चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन अब तक के सबसे निचले स्तर पर जा सकता है।

​क्या आप जानना चाहेंगे कि भूपेन बोरा के जाने के बाद कांग्रेस की कमान संभालने के लिए कौन से नए चेहरे सामने आ रहे हैं?

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