नरवणे की 'किताब' पर हंगामा: क्या राहुल गांधी के शोर के पीछे 1962 की नाकामी छिपाने का खेल है?
नरवणे की 'किताब' पर हंगामा: क्या राहुल गांधी के शोर के पीछे 1962 की नाकामी छिपाने का खेल है?
नई दिल्ली: संसद के गलियारों से लेकर टीवी डिबेट्स तक, इन दिनों पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब 'Four Stars of Destiny' को लेकर जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सदन के भीतर और बाहर इस किताब के कुछ कथित पन्नों को लहरा रहे हैं, जिसमें 2020 के लद्दाख संकट का जिक्र है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस हंगामे की जड़ें वर्तमान से ज्यादा इतिहास में गहरी धंसी हुई हैं।
मोदी की वो 'किताब वाली नसीहत' और राहुल का पलटवार
आपको याद होगा कि पिछले साल सदन में पीएम मोदी ने राहुल गांधी की विदेश नीति की समझ पर तंज कसते हुए उन्हें ब्रूस रिडल (Bruce Riedel) की किताब "JFK's Forgotten Crisis" पढ़ने की सलाह दी थी। उस किताब में विस्तार से बताया गया है कि कैसे 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गलतियों और रणनीतिक चूक की वजह से भारत को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा था।
आज जब राहुल गांधी जनरल नरवणे की किताब को ढाल बनाकर सरकार को घेर रहे हैं, तो इसे उसी 'मोदी प्रहार' के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा समर्थकों का तर्क है कि राहुल गांधी इस किताब के जरिए चीन मुद्दे पर एक नया नैरेटिव सेट करना चाहते हैं ताकि नेहरू काल के दागों को धोया जा सके।
हंगामे का असली सच: क्या छुपाने की कोशिश है?
वीडियो और राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि राहुल गांधी जिस 'किताब' के दम पर पीएम मोदी पर जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगा रहे हैं, वह दरअसल एक बचाव की मुद्रा है।
1962 का काला साया: प्रधानमंत्री मोदी बार-बार 1962 की याद दिलाकर कांग्रेस को रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर घेरते रहे हैं।
रणनीतिक नैरेटिव: नरवणे की किताब के कुछ अंशों (जो कि आधिकारिक रूप से अभी प्रकाशित नहीं हुए हैं) को मुद्दा बनाकर राहुल गांधी यह संदेश देना चाहते हैं कि वर्तमान सरकार भी सुरक्षा के मोर्चे पर 'अकेली' है।
नसीहत का असर: सदन में जब मोदी ने JFK वाली किताब का जिक्र किया, तो वह सीधे तौर पर नेहरू की विरासत पर चोट थी। राहुल गांधी का वर्तमान रुख उसी प्रहार का काउंटर-अटैक माना जा रहा है।
"जब सरकार और स्पीकर कह रहे हैं कि किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई, तो राहुल गांधी का उसे संसद परिसर में लहराना सिर्फ एक सियासी ड्रामा है ताकि नेहरू के दौर की चीन नीति पर चर्चा को दबाया जा सके।"
क्या है 'JFK's Forgotten Crisis' में?
प्रधानमंत्री ने जिस किताब का जिक्र किया था, वह 1962 के युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी और नेहरू के बीच हुए संवादों पर आधारित है। यह किताब बताती है कि कैसे नेहरू ने चीन के खतरे को भांपने में भारी भूल की थी। राहुल गांधी द्वारा नरवणे की किताब को उछालना, दरअसल इसी ऐतिहासिक सच से ध्यान भटकाने की एक कोशिश नजर आती है।
निष्कर्ष: सदन में हो रहा यह हंगामा सिर्फ एक सेना प्रमुख के संस्मरणों तक सीमित नहीं है। यह 'नेहरू बनाम मोदी' के विजन की लड़ाई है। एक तरफ 1962 की वो यादें हैं जिन्हें कांग्रेस भुलाना चाहती है, और दूसरी तरफ वर्तमान का वो सच है जिसे विपक्ष अपने तरीके से पेश कर रहा है।
Nalanda5 की रिपोर्ट।
