UGC Equity Regulation 2026: देश भर में सामान्य वर्ग का फूटा गुस्सा, सड़कों पर उतरे छात्र; फूंक डाले पुतले |
UGC Equity Regulation 2026: देश भर में सामान्य वर्ग का फूटा गुस्सा, सड़कों पर उतरे छात्र; फूंक डाले पुतले |
नई दिल्ली/नालंदा: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी नए 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध की आग भड़क उठी है। मंगलवार को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत कई राज्यों में सामान्य वर्ग General Category Protest के छात्रों और विभिन्न संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को 'भेदभावपूर्ण' और 'काला कानून' बताते हुए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के पुतले फूंके।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
UGC ने हाल ही में 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026' अधिसूचित किए हैं। सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति, धर्म और लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। हालांकि, सामान्य वर्ग के प्रदर्शनकारियों के मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
असमान परिभाषा: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नए नियमों में 'जातिगत भेदभाव' की परिभाषा को केवल SC, ST और OBC तक सीमित कर दिया गया है। उनका आरोप है कि सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव के लिए इसमें कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
झूठी शिकायतों का डर: नए कानून के ड्राफ्ट से 'झूठी शिकायत' करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान हटा दिया गया है। छात्रों को डर है कि इसका इस्तेमाल सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को फंसाने के लिए किया जा सकता है।
एकपक्षीय समितियां: नियमों के तहत बनने वाली 'इक्विटी कमेटी' में आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, लेकिन सामान्य वर्ग के लिए ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं रखी गई है।
सड़कों से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची जंग
उत्तर प्रदेश के कानपुर, मुजफ्फरनगर और बिहार के शिवहर जैसे जिलों में विरोध प्रदर्शन काफी उग्र रहा। कानपुर में छात्रों ने काले झंडे दिखाकर पैदल मार्च निकाला, वहीं शिवहर में 'थाली बजाकर' सरकार को जगाने की कोशिश की गई। इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है; श्रावस्ती में एक भाजपा शिक्षक प्रकोष्ठ के पदाधिकारी ने नियमों के विरोध में इस्तीफा तक दे दिया है।
सिर्फ सड़कें ही नहीं, यह लड़ाई अब कानूनी मोड़ भी ले चुकी है। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर UGC के इन नियमों को चुनौती दी गई है, जिसमें तर्क दिया गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
सरकार का पक्ष
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को निष्पक्षता का आश्वासन दिया है। सरकार का कहना है कि ये नियम केवल समावेशी परिसर बनाने के लिए हैं और किसी भी वर्ग के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र इन नियमों को वापस लेने या इनमें संशोधन करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
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