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बिहार की राजनीति में 'दही-चूड़ा' डिप्लोमेसी: तेजप्रताप यादव ने NDA नेताओं को दिया न्योता ।।

बिहार की राजनीति में 'दही-चूड़ा' डिप्लोमेसी: तेजप्रताप यादव ने NDA नेताओं को दिया न्योता, क्या बदलने वाले हैं सियासी समीकरण?

पटना (N5Bharat): बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति का पर्व केवल दही-चूड़ा खाने का अवसर नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक संदेश देने का जरिया रहा है। इस बार कड़ाके की ठंड के बीच बिहार का सियासी पारा तब चढ़ गया जब लालू प्रसाद यादव के बड़े लाल और जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख तेजप्रताप यादव ने अचानक एनडीए (NDA) के दिग्गज नेताओं के दरवाजे पर दस्तक दी।

तेजप्रताप यादव ने आगामी 14 जनवरी को अपने आवास 26-एम, स्ट्रैंड रोड पर एक भव्य 'चूड़ा-दही भोज' का आयोजन किया है, जिसके लिए उन्होंने व्यक्तिगत रूप से एनडीए के मंत्रियों और नेताओं को आमंत्रित किया है।

विरोधियों के द्वार पहुंचे 'कृष्ण'

बीते दो-तीन दिनों में तेजप्रताप यादव का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला है। वे अपनी पुरानी पार्टी राजद (RJD) या परिवार के साथ दिखने के बजाय एनडीए नेताओं के साथ गर्मजोशी से मिलते नजर आए:

  • विजय कुमार सिन्हा (उपमुख्यमंत्री): तेजप्रताप ने डिप्टी सीएम विजय सिन्हा से मुलाकात की और उन्हें भोज का न्योता दिया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच मोबाइल नंबर साझा करने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

  • दीपक प्रकाश (मंत्री): आरएलएम नेता उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश के आवास पर जाकर भी उन्होंने निमंत्रण दिया।

  • संतोष कुमार सुमन व अवधेश नारायण सिंह: उन्होंने हम (HAM) नेता संतोष सुमन और विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से भी मुलाकात कर उन्हें आमंत्रित किया।

परिवार और पार्टी से दूरी, NDA से नजदीकी?

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से तेजप्रताप यादव अपनी मूल पार्टी राजद और अपने परिवार (खासकर भाई तेजस्वी यादव) से अलग-थलग चल रहे हैं। आरजेडी से निष्कासित होने के बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी 'जनशक्ति जनता दल' बनाई है। जानकारों का मानना है कि लालू यादव की 'दही-चूड़ा भोज' वाली विरासत को अब तेजप्रताप अपने दम पर आगे बढ़ाकर यह साबित करना चाहते हैं कि वे अभी भी बिहार की राजनीति में एक मुख्य खिलाड़ी हैं।

क्या हैं इसके राजनीतिक मायने?

राजनीतिक गलियारों में इस 'भोज डिप्लोमेसी' के कई मतलब निकाले जा रहे हैं:

  1. तेजस्वी को चुनौती: अपने आवास पर अलग भोज आयोजित कर वे तेजस्वी यादव को संकेत दे रहे हैं कि वे किसी के मोहताज नहीं हैं।

  2. NDA की ओर झुकाव: बीजेपी और सहयोगी दलों के नेताओं से उनकी बढ़ती नजदीकी इस चर्चा को बल दे रही है कि क्या भविष्य में तेजप्रताप एनडीए के साथ मिलकर कोई नई पारी शुरू करेंगे।

  3. वर्चस्व की लड़ाई: लालू यादव की अनुपस्थिति (स्वास्थ्य कारणों से) में तेजप्रताप खुद को उनके असली राजनीतिक उत्तराधिकारी और परंपराओं के संवाहक के रूप में पेश कर रहे हैं।

तेजप्रताप का पक्ष

जब मीडिया ने उनसे इस मुलाकात के बारे में पूछा, तो उन्होंने इसे पूरी तरह 'सांस्कृतिक और सामाजिक' बताया। उन्होंने कहा, "मकर संक्रांति हमारा पारंपरिक पर्व है। हमने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत सभी को आमंत्रित किया है। राजनीति अपनी जगह है और शिष्टाचार अपनी जगह।"

हालांकि, आरजेडी की ओर से इसे केवल 'सुर्खियों में रहने की कोशिश' करार दिया गया है। अब सभी की नजरें 14 जनवरी को होने वाले इस भोज पर टिकी हैं—देखना दिलचस्प होगा कि कौन-कौन से दिग्गज नेता तेजप्रताप की थाली से दही-चूड़ा का स्वाद चखते हैं।


रिपोर्ट: राजनीतिक डेस्क, N5Bharat

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