झारखंड में संवैधानिक संकट? ED दफ्तर पर पुलिस की रेड और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप ।।

झारखंड में संवैधानिक संकट? ED दफ्तर पर पुलिस की रेड और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: एक विस्तृत रिपोर्ट

रांची: भारतीय संघीय ढांचे (Federal Structure) में केंद्र और राज्य के बीच टकराव की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी बनाम सीबीआई विवाद की यादें ताजा कर दी हैं। झारखंड की राजधानी रांची में राज्य पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच अभूतपूर्व गतिरोध पैदा हो गया है, जिसे अब झारखंड हाई कोर्ट ने "पूर्व-नियोजित" (Pre-planned) करार दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

मामले की शुरुआत 12 जनवरी 2026 को हुई, जब पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के एक पूर्व कर्मचारी संतोष कुमार ने रांची के एयरपोर्ट थाने में ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। कुमार का आरोप था कि ₹23 करोड़ के जल आपूर्ति घोटाले में पूछताछ के दौरान ईडी के सहायक निदेशक प्रतीक और अधिकारी शुभम भारती ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें प्रताड़ित किया।

इस FIR के आधार पर, 15 जनवरी को रांची पुलिस की एक टीम डीएसपी संजीव बेसरा के नेतृत्व में अचानक रांची स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंची। पुलिस ने दफ्तर की तलाशी ली और सीसीटीवी फुटेज तक जब्त कर लिए।

ED की दलील और हाईकोर्ट का सख्त रुख

राज्य पुलिस की इस कार्रवाई को ईडी ने "केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में सीधा हस्तक्षेप" बताया और तत्काल झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ईडी ने अपनी याचिका में कहा कि आरोपी संतोष कुमार ने खुद को चोट पहुंचाई ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके।

जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और आदेश:

  • रेड 'पूर्व-नियोजित' थी: कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह रेड पहले से तय और सुनियोजित लगती है।

  • पुलिस जांच पर रोक: कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ पुलिस की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई और जांच पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।

  • सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय बलों को: हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को आदेश दिया कि ईडी कार्यालय और उसके अधिकारियों की सुरक्षा के लिए CRPF, BSF या CISF जैसे अर्धसैनिक बलों को तैनात किया जाए।

  • SSP की जिम्मेदारी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ईडी दफ्तर की सुरक्षा में कोई चूक होती है, तो इसके लिए रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।

बंगाल जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड में यह घटनाक्रम ठीक वैसा ही है जैसा कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल में देखा गया था। वहाँ भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों (ED/CBI) के बीच हिंसक टकराव और कानूनी लड़ाई हुई थी। झारखंड के विपक्षी दल (बीजेपी) का आरोप है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के साक्ष्यों को नष्ट करने के लिए पुलिस का सहारा ले रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल (झामुमो) इसे 'विक्टिम कार्ड' और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग बता रहा है।

N5Bharat का विश्लेषण

झारखंड में उभरा यह विवाद केवल एक FIR का मामला नहीं है, बल्कि यह केंद्र-राज्य संबंधों के बीच बढ़ती दरार का प्रतीक है। जब राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां और केंद्रीय एजेंसियां एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ी होती हैं, तो इससे न्यायिक और संवैधानिक प्रक्रियाएं बाधित होती हैं। अब सबकी नजरें 9 फरवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।


रिपोर्ट: टीम N5Bharat स्थान: रांची, झारखंड

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