Skip to main content

उद्घाटन से पहले ही ढह गया रोहतासगढ़ रोपवे का हिस्सा || सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल ||

रोहतास में बड़ा हादसा: उद्घाटन से पहले ही ढह गया रोहतासगढ़ रोपवे का हिस्सा, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

रोहतास (बिहार): बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक, रोहतासगढ़ किले को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की कवायद को बड़ा झटका लगा है। रोहतासगढ़ किले की पहाड़ी पर निर्माणाधीन रोपवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (संभावित प्लेटफॉर्म या सपोर्ट स्ट्रक्चर) अचानक ढह गया। राहत की बात यह रही कि घटना के वक्त वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

करोड़ों की परियोजना, पहली परीक्षा में फेल

रोहतासगढ़ किला समुद्र तल से लगभग 1500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। दुर्गम पहाड़ी रास्ता होने के कारण पर्यटकों की सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से इस रोपवे का निर्माण किया जा रहा था। स्थानीय लोगों और पर्यटकों को इसका बेसब्री से इंतजार था, लेकिन उद्घाटन से पहले ही ढांचे का गिरना निर्माण कार्य में भारी लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है।

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में आक्रोश

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि यह हादसा उद्घाटन के बाद होता, जब पर्यटक इसमें सवार होते, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे। स्थानीय निवासियों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच की मांग की है।

जांच के घेरे में निर्माण एजेंसी

इस घटना के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, तकनीकी खराबी या कमजोर नींव को हादसे का कारण माना जा रहा है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या मानकों की अनदेखी की गई थी।

पर्यटन को लगेगा झटका

रोहतासगढ़ किला न केवल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह इको-टूरिज्म का भी बड़ा केंद्र है। रोपवे के गिरने से इसके चालू होने की समय-सीमा अब काफी आगे बढ़ सकती है, जिससे जिले के पर्यटन विकास को गहरा धक्का लगा है।

NALANDA5//N5Bharat के लिए रोहतास से ब्यूरो रिपोर्ट।

Comments

Popular posts from this blog

एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात का ख्याल अवश्य रखना चाहिए।

एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए, यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात  का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए। यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इन बातों का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। हम कोई भी काम करते हैं उसकी योजना अवश्य तैयार करते हैं। एक छोटा सा छोटा काम के लिए भी हम योजना बनाते हैं। हलांकि छोटे कामों के लिए बनाये गए योजना हमारा दिमाग को पता नहीं चलता। हमारे दिमाग को इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसपर कभी आपने सोचा है कि आख़िर ऐसा क्यों होता है ? इसकी वजह को हमे जानने का प्रयास अवश्य करनी चाहिए। ऐसे तो इसके अनेकों वजह हो सकते हैं और इसके मनोवैज्ञानिक कारण भी कई हो सकते हैं, लेकिन हमे इन भारी वजहों को छोड़कर एक सरल वजह की तलाश करने की जरूरत है। मेरे अनुसार सरल स्वभाव से इसका एक वजह यह भी हो सकता है कि हमारा दिमाग इन छोटे-छोटे कामों को पहले कई बार कर चुका होता है। यूं कहें इस काम को मेरा दिमाग पूर्ण रूप से अभ्यस्त हो गया होता है। इसलिए हमारा दिमाग को इस छोटा काम को पूरा करने में किसी प्रकार की परेश...

एक कप चाय, मिट्टी वाली में - चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर भी नहीं वो कैसे !

एक कप चाय से याद आया कि मिट्टी के बर्तन वाली चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर एक प्रेमी को अपने प्रेमिका या एक प्रेमिका को अपने प्रेमी से मिलने में भी नहीं होगा! लेकिन वो मजा इस चाय पीने में आपको मिलेगा।  आप महिला हों या पुरुष यदि आप अपने जीवन में, प्रेम में प्रवाहित होने के आनंद से वंचित रह गाएं हैं तो हमारी मानिये एक बार इस चाय के प्रेम में बह जाइये, डूब जाइये और इसके गर्माहट में गोते लगा लीजिये! इसके मंद-मंद सुगंध में अपने नाक के दोनों सुराग को झोंक दीजिये। लेकिन एक बात का ख्याल रखियेगा,   इस चाय को पीने में कभी जल्दीबाजी नहीं कीजियेगा। नहीं तो, आपका जीभ आपसे नाराज हो जायेगा। बेमतलब के आप बेचारा स्वभाव से कोमल जीभ को रुखा कर दीजियेगा। यदि आपको विश्वास नहीं होता, तो एक बार मिट्टी वाला चुक्का में परोसी गई चाय को अपने होंठ से लगाकर और चाय को जीभ पर गिराकर तो देखिये! जैसे हीं, यह चाय आपके जीभ को स्पर्श करेगी वैसे हीं आप स्वयं इसके स्वाद से परिचित हो जाएंगें। हमारी मानिये तो आज हीं आप नुक्कड़ वाली एक कप चाय का मज़ा ले लीजिये। भारत आधुनीकता की ओर कदम बढ़ा च...

राहुल गांधी ने 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा। सदन में भारी हंगामा।।

राहुल गांधी ने 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा। सदन में भारी हंगामा।। राहुल गांधी ने संसद में जिस 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल या संदर्भ का जिक्र किया, वह सीधा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की कार्यशैली पर था। गांधी ने सदन में एक पुरानी फाइल या रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह तर्क देने की कोशिश की कि सरकार कुछ खास उद्योगपतियों (अडानी-अंबानी) को फायदा पहुँचाने के लिए नियमों में बदलाव करती है। उन्होंने 'एल्फिंस्टन' नाम का जिक्र उन ऐतिहासिक नियमों या व्यवस्थाओं के संदर्भ में किया जो मुंबई के बंदरगाहों या रेलवे के बुनियादी ढांचे से जुड़ी थीं। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को घेरते हुए निम्नलिखित बातें कहीं: ​नियमों में बदलाव: उनका आरोप था कि सरकार ने पुराने नियमों (जिनका उन्होंने एल्फिंस्टन संदर्भ से जोड़ा) को दरकिनार कर दिया ताकि एयरपोर्ट्स और पोर्ट्स का नियंत्रण कुछ विशेष व्यापारिक समूहों को दिया जा सके। ​अडाणी समूह का जिक्र: उन्होंने दावा किया कि पहले नियम था कि जिसे एयरपोर्ट संचालन का अनुभव नहीं है, उसे टेंडर नहीं म...