क्या है ममता बनर्जी की उस 'ग्रीन फाइल' का राज? जिसने उड़ा दी है सबकी नींद!
बंगाल में बवाल: क्या है ममता बनर्जी की उस 'ग्रीन फाइल' का राज? जिसने उड़ा दी है सबकी नींद!
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तो पुराना है, लेकिन साल 2026 की शुरुआत एक ऐसे रहस्यमयी ड्रामे से हुई है जिसने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक हड़कंप मचा दिया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में है— एक 'हरी फाइल' (Green File)। आखिर उस फाइल में ऐसा क्या था कि खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जांच के बीच में पहुंचना पड़ा? आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की इनसाइड स्टोरी।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
मामला 8 जनवरी 2026 का है, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने कोलकाता में चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के ठिकानों पर छापेमारी की। यह छापेमारी कथित तौर पर 'कोयला घोटाले' से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई थी। लेकिन इस सामान्य जांच ने तब नाटकीय मोड़ ले लिया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गईं।
ममता बनर्जी का 'राजनीतिक छापा'
जब ED की टीम साल्ट लेक स्थित I-PAC दफ्तर और प्रतीक जैन के आवास पर जांच कर रही थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंचीं। खबरों के अनुसार, वह जांच स्थल के अंदर गईं और कुछ ही देर बाद उनके हाथ में एक 'ग्रीन फाइल' देखी गई। वह इस फाइल को लेकर वहां से निकल गईं।
ममता बनर्जी का पक्ष: मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ED केवल जांच नहीं कर रही, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की 2026 चुनाव की रणनीति, उम्मीदवारों की लिस्ट और गोपनीय डेटा चुराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की 'राजनीतिक साजिश' करार दिया।
विपक्ष का पलटवार: सुवेंदु अधिकारी के गंभीर आरोप
विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना को 'जांच में हस्तक्षेप' बताया है। बीजेपी का कहना है कि:
अगर फाइल में सिर्फ चुनावी रणनीति थी, तो मुख्यमंत्री को खुद वहां जाकर उसे क्यों निकालना पड़ा?
क्या उस फाइल में कुछ ऐसे सबूत थे जो भ्रष्टाचार की पोल खोल सकते थे?
सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है और इसे जांच एजेंसी के काम में बाधा डालने वाला कदम बताया है।
ED बनाम ममता: अब मामला कोर्ट में
इस घटना के बाद ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है। एजेंसी का दावा है कि मुख्यमंत्री और उनके साथ आए पुलिस अधिकारियों ने 'जबरन' सबूत और फाइलें हटा दीं, जो कानूनन गलत है। दूसरी तरफ, I-PAC और TMC ने भी कोर्ट में याचिका दायर कर फाइलों की सुरक्षा और निजता की मांग की है।
ग्रीन फाइल में क्या हो सकता है?
सियासी गलियारों में इस फाइल को लेकर कई अटकलें हैं:
चुनावी ब्लूप्रिंट: क्या इसमें 2026 के विधानसभा चुनाव का पूरा मास्टरप्लान है?
फंडिंग का ब्योरा: क्या इसमें पार्टी को मिलने वाले चंदे या चुनावी खर्च का हिसाब है?
नेताओं की कुंडली: क्या इसमें विपक्ष या अपनों के खिलाफ कोई खास जानकारी थी?
N5Bharat की राय: पश्चिम बंगाल की राजनीति अब एक नए मोड़ पर है। यह लड़ाई अब सिर्फ भ्रष्टाचार की जांच तक सीमित नहीं रही, बल्कि 'डाटा' और 'रणनीति' के युद्ध में बदल गई है। क्या यह 'ग्रीन फाइल' बंगाल चुनाव की दिशा बदल देगी? यह तो वक्त ही बताएगा।
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