जमीन के बदले नौकरी' मामले में लालू परिवार पर कानूनी शिकंजा, कोर्ट ने कहा– "यह एक क्रिमिनल सिंडिकेट।।
जमीन के बदले नौकरी' मामले में लालू परिवार पर कानूनी शिकंजा, कोर्ट ने कहा– "यह एक क्रिमिनल सिंडिकेट।।
नई दिल्ली/पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार के लिए साल 2026 की शुरुआत कानूनी झटकों के साथ हुई है। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने 'लैंड फॉर जॉब' (Land for Job) घोटाले में लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव समेत 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप (Charges) तय कर दिए हैं।
यह मामला भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के सबसे चर्चित घोटालों में से एक है। 9 जनवरी 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के एक बड़े फैसले ने लालू परिवार की मुश्किलों को कानूनी रूप से "ट्रायल" (मुकदमे) के दरवाजे पर खड़ा कर दिया है।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: "निजी जागीर बना दिया था रेल मंत्रालय"
9 जनवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने बेहद सख्त टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू यादव और उनके परिवार ने एक 'आपराधिक सिंडिकेट' (Criminal Syndicate) की तरह काम किया। अदालत के अनुसार, तत्कालीन रेल मंत्री ने सरकारी नौकरियों को "सौदेबाजी के हथियार" के रूप में इस्तेमाल किया ताकि अपने परिवार के नाम कीमती जमीनें हासिल की जा सकें। जज ने यहाँ तक कहा कि "रेल मंत्रालय को एक निजी जागीर की तरह चलाया जा रहा था।"
क्या है पूरा मामला? (The Scam Timeline)
यह घोटाला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे।
आरोप: रेलवे के ग्रुप-डी (Group-D) पदों पर भर्ती के लिए कोई विज्ञापन नहीं निकाला गया। इसके बजाय, उन लोगों को नियुक्त किया गया जिन्होंने सीधे तौर पर या अपने परिवार के माध्यम से लालू यादव के परिवार को अत्यंत कम कीमतों पर जमीनें बेचीं या उपहार में दीं।
26 लाख में 4 करोड़ की संपत्ति: जांच एजेंसियों का दावा है कि लालू परिवार ने मात्र 26 लाख रुपये खर्च कर बिहार में 1 लाख वर्ग फीट से अधिक जमीन हासिल की, जिसकी उस समय बाजार कीमत लगभग 4.39 करोड़ रुपये थी।
ED की जांच: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करते हुए करीब 600 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) का पता लगाया है।
लालू परिवार के लिए आगे क्या?
अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने का मतलब है कि अब इस मामले में औपचारिक ट्रायल (मुकदमा) शुरू होगा।
7 साल की सजा का प्रावधान: यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) और धोखाधड़ी (IPC 420) के तहत दोष सिद्ध होता है, तो आरोपियों को 7 साल तक की जेल हो सकती है।
23 जनवरी की तारीख: कोर्ट ने औपचारिक रूप से आरोप दर्ज करने के लिए 23 जनवरी 2026 की तारीख तय की है।
सियासी भविष्य पर संकट: तेजस्वी यादव, जो खुद को बिहार में 'रोजगार' के चेहरे के रूप में पेश कर रहे हैं, उनके लिए यह मामला नैतिक और राजनीतिक रूप से एक बड़ी चुनौती बन गया है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया
जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार बता रही है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इसे "राजनीतिक बदले की भावना" करार दे रही है। तेजस्वी यादव ने संक्षिप्त बयान में कहा है कि वे कानून का सम्मान करते हैं और अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।
निष्कर्ष: बिहार की राजनीति के लिए 2026 का चुनाव निर्णायक होने वाला है, और ऐसे में 'लैंड फॉर जॉब' केस का ट्रायल शुरू होना लालू परिवार की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। क्या 'ग्रीन फाइल' और 'जमीन के बदले नौकरी' जैसे मामले बिहार की सत्ता की दिशा तय करेंगे? यह आने वाला वक्त बताएगा।
