'जहां पैदा हुआ, वहीं वोटर लिस्ट से कटा नाम':अभिनेता प्रकाश राज का नाम मतदाता सूची से गायब।।
बैंगलोर/पटना/N5: मशहूर बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों के अभिनेता प्रकाश राज का नाम कर्नाटक में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटा दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद अभिनेता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर चुनाव आयोग और प्रशासन पर तंज कसा है।
प्रकाश राज ने अपने वीडियो में कहा कि जिस संसदीय क्षेत्र में उनका जन्म हुआ, जहां उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा, कॉलेज और थिएटर किया तथा जहां से वे लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, उसी बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र से उनका नाम काट दिया गया है।
"नाइस जोक, गेम ऑन": प्रकाश राज ने कसा तंज।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' और इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए 95 सेकंड के वीडियो में प्रकाश राज ने कहा; "दोस्तों, मैं आपके साथ एक जोक (मजाक) शेयर करना चाहता हूँ। SIR प्रक्रिया के बाद बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र से जिन 65 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, मैं भी उनमें से एक हूँ! नाइस जोक, है न?"
अभिनेता ने आगे कहा कि वे यह जानने की कोशिश करेंगे कि अपने नाम को वापस मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए उन्हें किस प्रक्रिया से गुजरना होगा और कौन-कौन से दस्तावेज दिखाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा, "गेम ऑन! चलिए देखते हैं कि मेरा वोटर कार्ड वापस पाने के लिए मुझे क्या-क्या करना होगा।"
अभिनेता प्रकाश राज ने सत्ता पर साधा निशाना।
अपने संदेश के अंतिम हिस्से में प्रकाश राज ने सत्ता में बैठे लोगों पर निशाना साधते हुए कहा, "आप अपनी शक्ति का उपयोग उन नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने के लिए कर सकते हैं जो शायद आपको वोट न दें। लेकिन क्या आप हमें उस ताकत से रोक सकते हैं जिससे हम आपको सत्ता से नीचे उतार सकते हैं?"
क्या है पूरा मामला? चलिए जानने का प्रयास करते हैं।
कर्नाटक में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के अपडेशन और शुद्धि के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट (ASDDO) श्रेणी के मतदाताओं के नामों का सत्यापन किया जा रहा है।
प्रकाश राज बेंगलुरु मध्य (Bangalore Central) लोकसभा सीट के शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र के तहत मतदाता रहे हैं, जहां से उन्होंने 2019 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। रिपोर्टों के अनुसार, SIR सत्यापन के दौरान उन्हें "स्थायी रूप से स्थानांतरित" (Permanently Shifted) श्रेणी में वर्गीकृत कर सूची से बाहर कर दिया गया है।
N5: राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटने को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस और नागरिक समूहों द्वारा आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं।

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