“छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका, प्रशासन की ढिलाई-विनोद जाखड़।”
नई दिल्ली:
राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहां एक पीजी (पेइंग गेस्ट) बिल्डिंग अचानक भरभराकर गिर गई। इस दुखद घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। छात्र नेता विनोद जाखड़ द्वारा दिए गए बयान के अनुसार, यह ढही हुई इमारत भाजपा (BJP) विधायक की बताई जा रही है। हादसे के समय इमारत में कई छात्र मौजूद थे, जिसके चलते छात्रों के मलबे में दबे होने और अपनी जान गंवाने की गंभीर आशंका जताई जा रही है।
“जब छात्रों की जान बचाने की जरूरत थी, तब सरकार और प्रशासन कहां थे? घटना के करीब दो घंटे बाद दिल्ली पुलिस-प्रशासन की राहत टीमें मौके पर पहुंचीं। आखिर इतनी बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है?- - विनोद जाखड़।”
राहत कार्य में प्रशासन की देरी पर गंभीर आरोप
घटना की जानकारी मिलते ही छात्र संगठन NSUI की टीम मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में जुट गई। विनोद जाखड़ ने प्रत्यक्षदर्शी के तौर पर प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब छात्रों को तुरंत मदद और जान बचाने की जरूरत थी, तब सरकार और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह नदारद थे। हादसे के लगभग दो घंटे बीत जाने के बाद दिल्ली पुलिस और प्रशासन की राहत टीमें मौके पर पहुंचीं।
जाखड़ ने कहा कि शुरुआती समय में घटना स्थल पर न तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां थीं, न ही पुलिस, मेडिकल सुविधाएं या मलबे को हटाने के लिए जेसीबी (JCB) की कोई व्यवस्था उपलब्ध थी। यहां तक कि NSUI का एक कार्यकर्ता भी मलबे में फंसा हुआ मिला।
अपने हाथों से मलबा हटाकर 3 छात्रों को निकाला
प्रशासनिक मदद में देरी होती देख NSUI की टीम ने खुद ही मोर्चा संभाला और बिना किसी भारी उपकरण के अपने हाथों से मलबा हटाना शुरू कर दिया। कड़ी मशक्कत के बाद अब तक सिर्फ 3 छात्रों को ही मलबे से घायल अवस्था में जिंदा बाहर निकाला जा सका है। जाखड़ ने बेहद दुख जताते हुए बताया कि कई छात्रों की इस हादसे में जान जा चुकी है और मौके की स्थिति अत्यंत पीड़ादायक है।
भावुक कर देने वाला दृश्य
रेस्क्यू के दौरान सामने आए एक दृश्य का जिक्र करते हुए विनोद जाखड़ ने कहा, "बच्चों को मलबे से निकालते वक्त हमें एक बच्चे के हाथ से उसकी किताब मिली। यह दृश्य बेहद भावुक और अंदर तक झकझोर देने वाला था। जिस हाथ में पढ़ाई के लिए किताब होनी चाहिए थी, वही हाथ मलबे के नीचे दबा हुआ मिला।"
व्यवस्था की विफलता
इस दर्दनाक हादसे पर आक्रोश जताते हुए विनोद जाखड़ ने कहा कि यह केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि सरकार की घोर लापरवाही और प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता का एक दर्दनाक प्रमाण है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी लापरवाही का जिम्मेदार आखिर कौन है और पीड़ित छात्रों व उनके परिवारों को जवाबदेही कब मिलेगी। फिलहाल मौके पर बचाव कार्य जारी है और मलबे में फंसे अन्य छात्रों को निकालने की कोशिशें की जा रही हैं।
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(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
