नेपाल में कुदरत के कहर के बीच दूसरा बड़ा चमत्कार: मलबे में 10 दिनों तक दबी रहने के बाद वृद्धा को सुरक्षित निकाला
नेपाल में कुदरत के कहर के बीच दूसरा बड़ा चमत्कार: मलबे में 10 दिनों तक दबी रहने के बाद वृद्धा को सुरक्षित निकाला
काठमांडू / नुवाकोट/N5:
भयंकर बाढ़ और भूस्खलन की मार झेल रहे नेपाल से एक बार फिर उम्मीद और हौसले से भरी खबर सामने आई है। हाइड्रोप्रोजेक्ट की सुरंग (टनल) में फंसे कर्मचारियों के सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के ठीक बाद सुरक्षा बलों ने एक और अद्भुत सफलता हासिल की है। नुवाकोट जिले के बेत्रावती क्षेत्र में मलबे और कीचड़ में करीब 10 दिनों से दबे चार मंजिला मकान से 60 वर्षीय महिला चंदिका श्रेष्ठ को जीवित बाहर निकाल लिया गया है। इस रेस्क्यू को स्थानीय लोग और बचाव दल किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।
मलबे से आई आवाज और शुरू हुआ रेस्क्यू
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण नुवाकोट के बिदुर नगरपालिका-10 में स्थित कई मकान पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए थे। स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, आधी ढही हुई इमारत के ऊपरी हिस्से से हल्की मानवीय आवाज सुनाई देने के बाद तुरंत सशस्त्र पुलिस बल (APF) और नेपाली सेना की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभाला।
भारी कीचड़ और मलबे को बेहद सावधानीपूर्वक हटाते हुए 9 सदस्यीय रेस्क्यू टीम मकान की ऊपरी मंजिल तक पहुंची। वहां बेहोशी की हालत में फंसी चंदिका श्रेष्ठ को लगभग 10 से 11 दिनों बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। महिला को प्राथमिक उपचार के लिए त्रिशुली स्थित नेपाली सेना के मैत्रिली बैरक भेजा गया, जहां से उन्हें एयरलिफ्ट कर काठमांडू के उच्च अस्पताल में स्थानांतरित किया जा रहा है।
सुरंग रेस्क्यू के बाद सेना की दूसरी बड़ी कामयाबी
नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में यह सेना और सुरक्षा बलों की लगातार दूसरी बड़ी सफलता है। इससे ठीक एक दिन पहले ही 'त्रिशूली 3A' जलविद्युत परियोजना की सुरंग में कई दिनों से फंसे दो कर्मचारियों (संजय साह और कबीर महर्जन) को नेपाली सेना और बचाव कर्मियों ने कई फीट गहरे भूमिगत टनल से सुरक्षित निकाला था। सुरंग अभियान के तुरंत बाद इस वृद्धा की जान बचाकर सुरक्षा बलों ने साबित कर दिया है कि वे विकट से विकट परिस्थिति में भी हार नहीं मानने वाले हैं।
लापता लोगों के परिजनों में जगी उम्मीद
अगस्त के अंतिम सप्ताह में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 4,000 से ज्यादा लोग लापता हैं। ऐसे निराशाजनक माहौल में, सुरंग और मलबे के नीचे से लगातार दो दिन जीवित बचे लोगों का मिलना राहत कार्यों में जुटी टीमों का मनोबल बढ़ा रहा है। जिन परिवारों के लोग अब भी लापता हैं, इस चमत्कारिक रेस्क्यू के बाद उनके दिलों में अपनों के सकुशल लौटने की उम्मीदें एक बार फिर जीवित हो उठी हैं।
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(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
