“आतंकवाद का असली खतरा भारत-अफगानिस्तान नहीं, अपनों से है'–मरियम नवाज़ के बयान ने एशिया में मचाया तहलका।”
इस्लामाबाद/लाहौर/N5: पाकिस्तानी पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ के एक ताज़ा बयान ने न केवल पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में बल्कि पूरे एशियाई महाद्वीप और वैश्विक कूटनीति में तहलका मचा दिया है। लाहौर में प्रोविंशियल इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड थ्रेट असेसमेंट सेंटर (PIFTAC) और एआई हब के उद्घाटन के दौरान मरियम नवाज़ ने स्वीकार किया कि उनके देश और पंजाब प्रांत को आतंकवाद का मुख्य खतरा भारत या अफ़गानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान के अपने प्रांतों—खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और बलूचिस्तान से है।
पाकिस्तान के पंजाब मुख्यमंत्री का यह बयान एशिया महाद्वीप में तहलका मचा दिया है। भारत और अफगानिस्तान को लेकर एक बहुत बङा बयान माना जा रहा है। वैश्विक राजनीतिकों का कहना है कि इस बयान से एक बात तो क्लियर हो गया है कि भारत और अफगानिस्तान की छवि साफ-सुथरी है। और दूसरी कि इन देशों से पाकिस्तान को दिक्कत नहीं । तीसरी की पाकिस्तान को अपने प्रशासन पर सुधार करने की जरूरत है।
मरियम नवाज़ के इस विस्फोटक और बेबाक बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय और वैश्विक कूटनीतिक विश्लेषकों के बीच तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के दूरगामी राजनीतिक और कूटनीतिक मायने हैं।
1. भारत और अफगानिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को बल
दशकों से पाकिस्तान का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व अपने देश में होने वाली हर तरह की आतंकवादी और हिंसक गतिविधियों के लिए भारत और अफ़गानिस्तान पर आरोप मढ़ता रहा है। हालांकि, पाकिस्तान के सबसे बड़े और शक्तिशाली प्रांत की मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करना कि असली खतरा पड़ोसी देशों से नहीं है, भारत और अफ़गानिस्तान के पक्ष को मजबूत करता है। इससे वैश्विक मंचों पर दोनों देशों की वह छवि साफ होती है, जिसमें वे खुद को आतंकवाद के पीड़ित के रूप में प्रस्तुत करते आए हैं।
2. आंतरिक सुरक्षा और नीतियों में गंभीर दरार
वैश्विक विश्लेषकों का कहना है कि मरियम नवाज़ के इस बयान से यह बात स्पष्ट हो गई है कि पाकिस्तान को असल में अपने पड़ोसी देशों से वह खतरा नहीं है जिसका हौवा उसकी सेना और नेता सालों से खड़ा करते रहे हैं। पाकिस्तान की असल समस्या उसकी खुद की नीतियां हैं, जिसके कारण खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे सीमावर्ती प्रांत असंतोष और उग्रवाद की आग में जल रहे हैं।
3. प्रशासनिक और आंतरिक सुधारों की तत्काल आवश्यकता
इस बयान ने पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक ढांचे की बदहाली का आईना दिखा दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान को अब बाहरी सीमाओं पर प्रोपेगैंडा फैलाने के बजाय अपने internal governance (आंतरिक प्रशासन), मानवाधिकारों और कानून-व्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार करने की जरूरत है।
मरियम नवाज़ के इस बयान के बाद पाकिस्तान में भी विपक्षी पार्टियों (जैसे पीटीआई) ने उन पर प्रांतीय भेदभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी का आरोप लगाया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इसे पाकिस्तान की उस कड़वी सच्चाई का कबूलनामा मान रहे हैं, जिसे छुपाने की कोशिश में इस्लामाबाद वर्षों से लगा हुआ था।
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(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
