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डीयू हॉस्टल हादसा: सरकारी एम्बुलेंस नदारद, ब्लिंकिट के वाहन से अस्पताल पहुंचे घायल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल।

डीयू हॉस्टल हादसा: सरकारी एम्बुलेंस नदारद, ब्लिंकिट के वाहन से अस्पताल पहुंचे घायल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल।

नई दिल्ली/N5: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के पीजी हॉस्टल में हाल ही में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद देश की राजधानी में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है। हादसे के तुरंत बाद जहां दिल्ली सरकार की आधिकारिक कैट्स (CATS) एम्बुलेंस सेवा का इंतजार किया जा रहा था, वहीं मौके पर किसी सरकारी वाहन के बजाय क्विक-कॉमर्स कंपनी 'ब्लिंकिट' (Blinkit) की एम्बुलेंस सेवा को मोर्चा संभालना पड़ा।

10 किलोमीटर के दायरे में तीन बड़े अस्पताल, फिर भी लाचारी

हैरानी की बात यह है कि दुर्घटनास्थल से महज 10 किलोमीटर के दायरे में एम्स (AIIMS), सफदरजंग और आरएमएल (RML) जैसे देश के तीन सबसे बड़े और नामचीन अस्पताल मौजूद हैं। इसके बावजूद, आपात स्थिति में सरकारी सहायता तंत्र का समय पर न पहुंचना दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जनता और छात्रों में आक्रोश, पूछे जा रहे तीखे सवाल

इस घटना के बाद से ही छात्रों और आम जनता में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया से लेकर विश्वविद्यालय परिसर तक लोग दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांग रहे हैं। लोगों का पूछना है कि:

👉आपात स्थिति के दौरान दिल्ली सरकार की CATS एम्बुलेंस सेवाएं कहां सोई हुई थीं?

👉जब राजधानी के केंद्र में बड़े अस्पताल मौजूद हैं, तो निजी कंपनियों की एम्बुलेंस पर निर्भरता क्यों बनी?

👉क्या आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (Emergency Response System) केवल कागजों तक ही सीमित है?

निजी डिलीवरी या क्विक-सर्विस प्लेटफॉर्म का आपात स्थिति में काम आना एक तरफ राहत की बात तो है, लेकिन दूसरी तरफ यह सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि इस लापरवाही पर प्रशासन क्या सफाई देता है और क्या भविष्य के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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 (रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)

Shailendra Kumar
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