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बागलकोट में भरभराकर गिरी स्कूल की छत: बदहाल इमारतों में जोखिम में बच्चों का भविष्य, जिम्मेदार कौन?

बागलकोट में भरभराकर गिरी स्कूल की छत: बदहाल इमारतों में जोखिम में बच्चों का भविष्य, जिम्मेदार कौन?

बागलकोट/कर्नाटक/N5: कर्नाटक के बागलकोट तालुका स्थित मुगलोली तांडा के एक सरकारी स्कूल में उस वक्त बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब पढ़ाई के दौरान अचानक कक्षा की छत का प्लास्टर और कंक्रीट ढह गया। इस घटना में कई बच्चे घायल हो गए। क्लासरूम की छत से निकले जंग लगे लोहे के सरिए और बेंचों पर बिखरा मलबा चीख-चीखकर सवाल कर रहा है कि आखिर मासूमों की जान से यह खिलवाड़ कब तक चलेगा?

मासूमों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
जिस समय बच्चे अपना भविष्य संवारने के लिए किताबों में ध्यान लगाए बैठे थे, ठीक उसी वक्त उनके सिर पर छत आ गिरी। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि राज्य के सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति की पोल खोलती एक खौफनाक तस्वीर है। गनीमत रही कि बच्चों को मामूली चोटें आईं, लेकिन इस खौफनाक मंजर ने बच्चों और अभिभावकों के दिलों में गहरा डर बैठा दिया है।

अभिभावकों का फूटा गुस्सा, स्थायी मरम्मत की मांग
घटना के तुरंत बाद घायल बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इस लापरवाही से उग्र हुए अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अभिभावकों का कहना है कि इमारत की खस्ताहाल स्थिति के बारे में पहले भी आगाह किया गया था, लेकिन प्रशासन नींद से नहीं जागा। अब ग्रामीण केवल कामचलाऊ मरम्मत नहीं, बल्कि इमारत के स्थायी पुनर्निर्माण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की मांग कर रहे हैं।

प्रशासनिक जवाबदेही पर उठते गंभीर प्रश्न
शिक्षा को बढ़ावा देने के तमाम दावों और बजट के बावजूद ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। इस घटना ने प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं:
निरीक्षण में लापरवाही क्यों? मानसून और शैक्षणिक सत्र से पहले सरकारी स्कूलों के ढांचागत ऑडिट (Safety Audit) का दावा किया जाता है, तो फिर इस जर्जर इमारत की अनदेखी क्यों हुई? बजट और रखरखाव का हिसाब कहां? स्कूलों की मरम्मत और बुनियादी ढांचे के नाम पर जारी होने वाले फंड का इस्तेमाल आखिर किस स्तर पर अटका हुआ है? हादसे का जिम्मेदार कौन? 
बच्चों की जिंदगी को खतरे में डालने वाले लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों पर अब तक क्या सख्त कार्रवाई की गई है?
यदि समय रहते राज्य के ऐसे अन्य जर्जर स्कूलों का ढांचागत निरीक्षण कर मरम्मत नहीं कराई गई, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर ठोस कदम उठाता है या फिर किसी अन्य हादसे का इंतजार करता है।

सोचने वाली बात ये कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। पिछले कई सालों से कांग्रेस यहाँ पर शासन करते आ रही है। कुछ माह पूर्व राजस्थान में भी सरकारी स्कूल के गिरने से अनेकों बच्चों की मौत हुई। यहां पहले कांग्रेस की हीं सरकार थी। हालाँकि, वर्तमान में बीजेपी की सरकार है। और कर्नाटक में वर्तमान में कांग्रेस है, लेकिन इससे पहले बीजेपी की सरकार थी।
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    (रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
Shailendra Kumar
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