ताशकंद में पीएम मोदी की द्विपक्षीय वार्ता और योग सत्र: भारत-उज़्बेकिस्तान संबंधों को मिली नई दिशा।
ताशकंद (उज़्बेकिस्तान)/N5:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय उज़्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भारत और उज़्बेकिस्तान के रिश्तों को और मजबूती मिली है। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव के साथ ताशकंद में उच्च स्तरीय और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की।
प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता और रणनीतिक साझेदारी
दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करना था। वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, कनेक्टिविटी, और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों देशों ने आपसी संबंधों को नए आयाम देने और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
विशेष योग सत्र में लिया हिस्सा
अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताशकंद में आयोजित एक खास योग सत्र में भी शिरकत की। इस आयोजन में उज़्बेकिस्तान के 52 स्थानीय योग साधकों ने हिस्सा लिया और योग का प्रदर्शन किया।उज़्बेकिस्तान में योग के प्रति लोगों का उत्साह भारत और उज़्बेकिस्तान के मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है। इस यात्रा से न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी एक नई दिशा मिली है।इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर वीडियो शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:
"नमस्ते। आप लोगों ने आज बहुत बढ़िया योग करके दिखाया। यहाँ हर उम्र के लोग हैं। मैं मेरे मित्र, राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव का आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने उज़्बेकिस्तान को योग से जोड़ दिया है। बहुत-बहुत बधाई।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज़्बेकिस्तान यात्रा भारत और मध्य एशिया के संबंधों के साथ-साथ इस क्षेत्र की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।भारत के नजरिए से मध्य एशिया में रणनीतिक पकड़ (Extended Neighborhood): उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया का दिल है। भारत के लिए उज़्बेकिस्तान के साथ रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा (जैसे यूरेनियम आपूर्ति) सहयोग बढ़ाना इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए जरूरी है। पाकिस्तान द्वारा ज़मीनी रास्ता न दिए जाने के कारण भारत INSTC (इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर) और चाबहार पोर्ट के ज़रिए मध्य एशिया तक अपनी पहुँच बनाना चाहता है। उज़्बेकिस्तान इस मार्ग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। दोनों देश क्षेत्रीय उग्रवाद, साइबर खतरों और कट्टरपंथ को लेकर एक जैसी सोच रखते हैं। आतंकवाद के खिलाफ साझा सुरक्षा ढांचा तैयार करना भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।
(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
