नेपाल में भारी तबाही: 580 से अधिक लोगों की मौत, 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता।
काठमांडू,पटना।N5:
नेपाल और चीन (तिब्बत) के सीमावर्ती इलाकों में 26 अगस्त को आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। लंगटांग राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर के ढहने (Glacier Collapse) और उसके बाद आई अचानक बाढ़ (Flash Flood) के कारण अब तक 580 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
आपदा का कारण और शुरुआती तबाही क्या है?
भूकंपीय विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में उच्च ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा ढहकर नीचे गिरा। इससे उत्पन्न कंपन 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर दर्ज किया गया। मलबे और बर्फ के तेज बहाव ने त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों को प्रचंड बाढ़ में बदल दिया। लगभग 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बहकर आए मलबे ने नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों के कई गाँवों, सड़कों और जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह से तबाह कर दिया।
किस प्रकार की हताहत नेपाल में हुई है?
नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा में व्यापक स्तर पर जन-धन की हानि हुई है।
मानवी क्षति (मृत्यु और लापता): नेपाल और तिब्बत (चीन) सीमावर्ती क्षेत्रों को मिलाकर अब तक 580 से अधिक लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल में 1,900 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें स्थानीय निवासियों के साथ-साथ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे मजदूर, सुरक्षाकर्मी और कई विदेशी पर्यटक शामिल हैं। सीमा के चीनी हिस्से (तिब्बत) में भी 5 से अधिक लोगों की जान गई है और 500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।
इस आपदा में सैकड़ों विदेशी (ट्रेकर्स और तीर्थयात्री) प्रभावित हुए हैं। लगभग 320 भारतीय नागरिक भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं, जबकि कई तीर्थयात्रियों को बचाकर वापस निकाला गया है। रसुवागढ़ी बॉर्डर और आसपास तैनात दर्जनों नेपाली सेना, पुलिस अधिकारी, सीमा शुल्क कर्मी और जलविद्युत परियोजनाओं के इंजीनियर बाढ़ के तेज बहाव में लापता हो गए हैं। बाढ़ और मलबे के कारण हजारों लोग बेघर हो गए हैं और कई गाँव पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। लगभग 17,000 बच्चों को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है।
नेपाल सरकार किस प्रकार से काम कर रहीं है ?
नेपाल सरकार 26 अगस्त 2026 को आई इस भीषण आपदा से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर आपातकालीन राहत, खोज और बचाव अभियानों का संचालन कर रही है। नेपाल के गृह मंत्रालय और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) द्वारा उठाए गए हैं। नेपाल सेना (Nepal Army), सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के 30,000 से अधिक कर्मियों को आपदा प्रभावित इलाकों (रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा) में तैनात किया गया है। भूस्खलन और बाढ़ के कारण कटे हुए पहाड़ी इलाकों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाली सेना और नागरिक विमानों (15 से अधिक हेलीकॉप्टरों) का लगातार उपयोग किया जा रहा है। अब तक 4,400 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय और स्थानीय अस्पतालों (जैसे धुलिखेल अस्पताल) के सहयोग से प्रभावित जिलों में मोबाइल मेडिकल टीमें और आपातकालीन दवाएं भेजी हैं।
प्रधानमंत्री प्राकृतिक आपदा राहत कोष के माध्यम से राहत राशि जुटाई जा रही है। नेपाल के प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों ने अपना एक महीने का वेतन राहत कोष में देने की घोषणा की है। नेपाल सरकार ने भारत और चीन जैसी पड़ोसी सरकारों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय राहत एजेंसियों (जैसे CARE, Direct Relief) से मिलकर प्रभावितों तक भोजन, स्वच्छ पानी और शेल्टर किट पहुँचाने की रणनीति बनाई है। सीमा पार (तिब्बत) से नदियों में बनने वाली कृत्रिम झीलों और दोबारा बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए तटीय इलाकों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित होने के निर्देश दिए गए हैं।
(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
