नेपाल में तबाही के बाद बेघर हुए लोग: घर वापसी की आस में बेबसी का सामना।
नुवाकोट/काठमांडू/N5: नेपाल से अच्छी और बूरी दोनों ख़बर है। अच्छी ये है कि तबाही के बाद लोगों की घर वापसी होने की शुरुआत हुई । और बूरी खबर ये है कि घर वापसी तो हो रही है, लेकिन ठिकाना नहीं रहा अब ये लोग क्या करें।
नेपाल के नुवाकोट और आसपास के इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। कई दिनों की भयावह आपदा के बाद, जब बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होना शुरू हुआ, तो प्रभावित इलाकों में जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें और घर वापसी की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, इस वापसी के साथ ही एक बेहद दुखद सच्चाई सामने आई है—जिन घरों में लोग लौटने की उम्मीद लगाए बैठे थे, अब उनका अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है।
प्रकृति के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में नुवाकोट जिले का त्रिशूली क्षेत्र शामिल है। बाढ़ के प्रकोप के बाद जब रविवार को निवासी अपने इलाकों में वापस लौटे, तो उन्हें चारों तरफ केवल मलबा, कीचड़ और मलबे के ढेर ही नजर आए। मकान पूरी तरह ज़मींदोज़ हो चुके हैं और लोगों का सब कुछ बह गया है।
आपदा का सामना कर रही त्रिशूली की स्थानीय निवासी ने अपनी बेबसी व्यक्त करते हुए कहा:
"अब हम क्या करेंगे? कुछ भी नहीं बचा है। हम म्यूनिसिपल बिल्डिंग में रह रहे हैं और वहीं सो रहे हैं। अब हम पूरी तरह से बेबस हैं। हमें नहीं पता कि हम क्या करेंगे।"
यह दर्द सिर्फ एक व्यक्ति या एक परिवार का नहीं, बल्कि नुवाकोट के सैकड़ों परिवारों का है, जिनका ठिकाना आपदा में पूरी तरह से छिन गया है।
नेपाल सरकार और राहत एजेंसियों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। यद्यपि सेना और सुरक्षा बल खोज व बचाव अभियानों में जुटे हुए हैं और प्रभावितों को अस्थायी आश्रयों तथा नगर पालिका भवनों में ठहराया जा रहा है। लेकिन भोजन, साफ़ पानी और आश्रय की भारी किल्लत बनी हुई है।प्रभावितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का काम जारी है। फिर भी, अपने पूरी तरह तबाह हो चुके आशियाने को देखकर लोग इस अनिश्चितता में जी रहे हैं कि उनका भविष्य क्या होगा और वे अपनी ज़िंदगी की नई शुरुआत कैसे करेंगे।
(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
