आरक्षण में सब-कोटा पर जीतन राम मांझी का बड़ा बयान: 'SC कोटे का 90% लाभ सिर्फ कुछ वर्गों तक सीमित, सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार हो बंटवारा'
आरक्षण में सब-कोटा पर जीतन राम मांझी का बड़ा बयान: 'SC कोटे का 90% लाभ सिर्फ कुछ वर्गों तक सीमित।
पटना|बिहार |N5:
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण के भीतर उप-कोटा (सब-कैटेगराइजेशन) लागू करने की पुरजोर वकालत की है। पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के ऐतिहासिक फैसले के अनुरूप आरक्षण में बंटवारा होना बेहद जरूरी है, ताकि वर्षों से वंचित रहे तबकों तक इसका वास्तविक लाभ पहुंच सके।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला
केंद्रीय मंत्री मांझी ने स्पष्ट किया कि आरक्षण में उप-कोटा की बहस स्वतः शुरू नहीं हुई है। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से यह निर्णय दिया था कि राज्य सरकारों को अनुसूचित जाति कोटे के भीतर सब-कोटा (उप-वर्गीकरण) बनाने का अधिकार है। देश के कई राज्यों में इस दिशा में विचार चल रहा है।
90 प्रतिशत लाभ पर कुछ वर्गों का कब्जा
मांझी ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि SC कोटे का लाभ दशकों से कुछ सीमित जातियां ही उठाती आ रही हैं।
वर्तमान स्थिति: प्रथम और द्वितीय श्रेणी की 90 प्रतिशत से अधिक नौकरियों और संसाधनों पर उन जातियों का कब्जा है जो पहले से थोड़ी सक्षम हो चुकी हैं।
वंचित वर्ग: जो जातियां आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से आज भी सबसे निचले पायदान पर हैं, वे महज 10 प्रतिशत अवसरों तक ही सिमटकर रह गई हैं।
पंजाब और बिहार मॉडल का उदाहरण
अपने तर्क को मजबूती देने के लिए उन्होंने पंजाब का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जब पंजाब में आरक्षण का उप-वर्गीकरण नहीं था, तब क्लास-1 नौकरियों में 7 से 8 प्रभावी जातियां ही 95 प्रतिशत आरक्षण का लाभ ले रही थीं। हालांकि, जैसे ही वहां उप-कोटा लागू किया गया, उन जातियों की हिस्सेदारी घटकर 45 प्रतिशत पर आ गई और शेष 55 प्रतिशत लाभ उन जातियों को मिलने लगा जिन्हें अब तक पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया था। मांझी ने बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में पूर्व में 'दलित' और 'महादलित' का वर्गीकरण कर अत्यंत पिछड़े दलितों को मुख्यधारा में लाने की पहल की गई थी।
जीतन राम मांझी ने जोर देकर कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को ऊपर उठाना है। जब तक आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण लागू नहीं होगा, तब तक सबसे कमजोर तबके तक विकास की किरण नहीं पहुंच पाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सब-कोटा बनाना सामाजिक न्याय को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगा।
(रिपोर्ट-शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
