पटना कोचिंग विवाद: खान सर का गोलीबारी का दावा निकला बेबुनियाद, अब 'सहानुभूति कार्ड' और साजिश के लग रहे आरोप।
पटना (N5 ब्यूरो। पटना के चर्चित शिक्षक खान सर और ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान के बीच उपजा विवाद अब एक नया रूप ले चुका है। पुलिस की शुरुआती जांच में खान सर द्वारा किया गया आठ से दस राउंड गोलीबारी का दावा पूरी तरह बेबुनियाद साबित हुआ है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल पर फायरिंग का कोई सबूत नहीं मिला है, जिसके बाद अब यह पूरा मामला महज आपसी मारपीट और हमले का बनता दिख रहा है।
इस खुलासे के बाद अब खान सर पर ही सवाल उठने लगे हैं और मामले में एक नया नैरेटिव (विमर्श) सामने आ रहा है।
क्या सहानुभूति बटोरने के लिए रची गई स्क्रिप्ट?
गोलीबारी का दावा खारिज होने के बाद कोचिंग जगत और स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आलोचकों और प्रतिद्वंद्वी गुटों का आरोप है कि यह पूरी घटना खान सर द्वारा खुद प्रायोजित (Self-Scripted) हो सकती है।
चर्चाओं के अनुसार, इस विवाद को बड़ा रूप देने के पीछे दो मुख्य मकसद हो सकते हैं:
1. छात्रों की सहानुभूति पाना: खुद पर हमले या गोलीबारी की खबर से छात्रों के बीच एक 'विक्टिम कार्ड' (पीड़ित दिखने की कोशिश) खेला जा सके, जिससे बच्चों की भावनात्मक सहानुभूति संस्थान के साथ जुड़ी रहे।
2. संस्थान की पब्लिसिटी: इस हाई-प्रोफाइल विवाद के जरिए मीडिया में बने रहना और कोचिंग का नाम चमकाना।
गोलीबारी नहीं, तो क्या है मामला?
पुलिस की छानबीन में यह साफ हो गया है कि वहां कोई हथियार नहीं लहराया गया और न ही गोलियां चलीं। हालांकि, दो गुटों या कोचिंग के कर्मियों के बीच मारपीट और धक्का-मुक्की की बात सामने आ रही है।
इस कोण से जांच की जा रही है कि क्या इस मामूली मारपीट को जानबूझकर 'जानलेवा हमले' और 'फायरिंग' का रंग दिया गया, ताकि बगल वाले कोचिंग संस्थान को कानूनी पचड़े में फंसाया जा सके।
ज्ञान बिंदु के पक्ष को मिला बल:
खान सर का दावा झूठा साबित होने से गिरफ्तार किए गए ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के डायरेक्टर के उस बयान को बल मिला है, जिसमें उन्होंने इसे "बदनाम करने की राजनीतिक चाल" बताया था।
ज्ञान बिंदु के समर्थकों का कहना है कि जब गोली चली ही नहीं, तो उनके डायरेक्टर पर इतना बड़ा आरोप लगाना साफ तौर पर व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता (Business Rivalry) के तहत फंसाने की साजिश है।
पुलिस के सामने अब दोहरी चुनौती
पटना पुलिस के लिए अब यह मामला सिर्फ एक हमले की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस अब इस बिंदु पर भी विचार कर सकती है कि क्या कानून व्यवस्था को गुमराह करने और झूठी अफवाह फैलाने के तहत भी कोई कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल, पुलिस दोनों पक्षों के बयानों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मारपीट की असली वजह तलाश रही है।
नोट: पुलिस की विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में कानूनी रूप से यह तय हो पाएगा कि हमले की साजिश किस स्तर पर रची गई थी।