"कांग्रेस और उसके नेता खुद नक्सली बन गए हैं": अमित शाह का राहुल गांधी पर तीखा हमला।।

"कांग्रेस और उसके नेता खुद नक्सली बन गए हैं": अमित शाह का राहुल गांधी पर तीखा हमला।।

​नई दिल्ली | 30 मार्च, 2026

​लोकसभा में 'वामपंथी उग्रवाद (LWE) से देश को मुक्त करने के प्रयासों' पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार किया। 

शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने न केवल दशकों तक नक्सलवाद को पनपने दिया, बल्कि उसके नेता अब वैचारिक रूप से उसी ढांचे का हिस्सा बन चुके हैं।

​गृहमंत्री ने सदन में सीधे राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके लंबे राजनीतिक सफर में उन्हें कई बार ऐसे लोगों के साथ देखा गया है जो नक्सल विचारधारा के हमदर्द हैं। 

शाह ने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया:

​विवादास्पद नारे और सोशल मीडिया: शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने "तुम कितने हिड़मा मारोगे, घर-घर से हिड़मा निकलेगा" जैसे भड़काऊ नारों को हवा दी। ज्ञात हो कि हिड़मा एक खूंखार नक्सली कमांडर था, जो कई सुरक्षाकर्मियों की हत्या में शामिल था।

​पुराने संबंधों का हवाला: गृहमंत्री ने याद दिलाया कि 2010 में ओडिशा में राहुल गांधी ने लाडो सिकाका जैसे व्यक्तियों के साथ मंच साझा किया था और 2018 में हैदराबाद में गुम्माडी विट्टल राव (गदर) से मुलाकात की थी, जिन्हें नक्सली विचारधारा से प्रभावित माना जाता था।

​भारत जोड़ो यात्रा: शाह ने दावा किया कि राहुल गांधी की यात्रा के दौरान भी कई 'अर्बन नक्सल' उनके साथ देखे गए थे।

​शाह ने सदन में बेहद सख्त लहजे में कहा, "नक्सलों के साथ रहते-रहते कांग्रेस पार्टी और इसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए हैं।" उन्होंने दलील दी कि:

​नक्सलवाद की जड़ें 1970 के दशक में हैं, जब इंदिरा गांधी ने सत्ता के लिए इस विचारधारा को संरक्षण दिया था।

​यूपीए शासन के दौरान 'राष्ट्रीय सलाहकार परिषद' (NAC) में ऐसे लोगों को जगह दी गई जिनके तार सीधे तौर पर नक्सली संगठनों से जुड़े थे। 

शाह ने पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा कि दंतेवाड़ा में 76 जवानों की शहादत के बाद भी उन्होंने नक्सलियों से हथियार डालने को नहीं कहा।

​निष्कर्ष: अमित शाह का यह बयान 2026 के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़े वैचारिक युद्ध की ओर इशारा करता है, जहाँ भाजपा 'राष्ट्रवाद बनाम अर्बन नक्सलवाद' को आगामी चुनावों के लिए एक मुख्य मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

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