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चुनावों में करारी हार के बाद विपक्ष में मची खलबली, 'इंडी गठबंधन' की होने जा रही है अहम बैठक

चुनावों में करारी हार के बाद विपक्ष में मची खलबली, 'इंडी गठबंधन' की होने जा रही है अहम बैठक।।

​नई दिल्ली/श्रीनगर/N5: हाल ही में संपन्न हुए विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद विपक्षी दलों के 'इंडी गठबंधन' (INDIA bloc) में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। चुनावों में मिली इस बड़ी हार के बाद गठबंधन के भविष्य और आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए सभी घटक दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।

​इस बैठक को लेकर विपक्षी खेमे से बड़ी प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।  नेशनल कॉन्फ्रेंस (National Conference) के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर में मीडिया से मुखातिब होते हुए साफ कह रहे हैं, "...या तो ओमर अब्दुल्ला या मैं खुद इस इंडी गठबंधन (INDIA bloc) की बैठक में शामिल होऊंगा। हम इस गठबंधन का हिस्सा हैं और वहां निश्चित रूप से मौजूद रहेंगे।"  

​अंतर्विरोधों से घिरा है गठबंधन: नेतृत्व पर सवाल और चुनावी समय में 'आग उगलने' की राजनीति।

​यह वही 'इंडी गठबंधन' है जिसका मुख्य नेतृत्व कांग्रेस नेता राहुल गांधी कर रहे हैं। हालांकि, यह गठबंधन शुरुआत से ही अपने आंतरिक अंतर्विरोधों और एकजुटता की कमी के कारण लगातार सवालों के घेरे में रहा है। एक तरफ जहाँ ये दल राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ मंच साझा करने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह रही है कि चुनाव आते ही ये पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ जमकर 'आग उगलती' नजर आती हैं।  

​गठबंधन के इस दोहरे चरित्र का सबसे बड़ा उदाहरण पश्चिम बंगाल और दिल्ली के चुनावों में देखने को मिल चुका है:  

​पश्चिम बंगाल के चुनावों में कांग्रेस, वामपंथी दलों (Left parties) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच कोई चुनावी तालमेल नहीं बैठ पाया और नेताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ तीखी बयानबाजी की।

​दिल्ली के चुनावों में भी आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे और बयानों को लेकर भारी खींचतान देखने को मिली थी।  

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यों के चुनावों में मिली ताजा हार ने यह साबित कर दिया है कि केवल बैठकों के दौर से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। जब तक गठबंधन के घटक दल चुनावी राज्यों में निजी स्वार्थ छोड़कर आपसी कलह को शांत नहीं करेंगे, तब तक चुनावी मैदान में इनके लिए वापसी कर पाना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। 

फिलहाल, आगामी बैठक में हार के कारणों के साथ-साथ इस अंतर्विरोध को सुलझाने पर क्या रणनीति बनती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

Shailendra Kumar
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