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भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक कारनामा: चिनाब और अंजी खड्ड पुलों पर 100 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ी वंदे भारत ट्रेन

भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक कारनामा: चिनाब और अंजी खड्ड पुलों पर 100 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ी वंदे भारत ट्रेन
नई दिल्ली / जम्मू:
भारतीय रेलवे ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना के तहत एक नया इतिहास रच दिया है। जम्मू और श्रीनगर के बीच चलने वाली सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज 'चिनाब ब्रिज' और भारत के पहले केबल-स्टेड 'अंजी खड्ड ब्रिज' को पहली बार 100 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से सफलतापूर्वक पार किया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा साझा की गई इस जानकारी ने देश भर के रेल प्रेमियों और नागरिकों में भारी उत्साह भर दिया है। रेलवे इंजीनियरों और विशेषज्ञों की कड़ी मेहनत का परिणाम है कि आज अत्यधिक कठिन और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले कश्मीर घाटी के क्षेत्र को सीधा राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है।
चिनाब और अंजी खड्ड पुलों से जुड़ी मुख्य बातें एवं महत्वपूर्ण जानकारी: दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज जो नदी के तल से 359 मीटर (1,178 फीट) की ऊंचाई पर बना है। चिनाब रेल ब्रिज एफिल टॉवर से भी लगभग 35 मीटर ऊंचा है। ये अत्यधिक हवा और भूकंपरोधी क्षमता वाला है। यह पुल अत्यंत जटिल इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना है। यह 260 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तूफानी हवाओं की रफ्तार को आसानी से झेल सकता है। साथ ही इसे उच्च तीव्रता वाले भूकंप (जोन V) के झटकों को सहन करने योग्य बनाया गया है।
अंजी खड्ड पुल (भारत का पहला केबल-स्टेड रेल ब्रिज) है। अंजी खड्ड नदी पर बना यह पुल भारत का पहला केबल-स्टेड रेलवे ब्रिज है, जो कटरा और रेयासी क्षेत्रों को जोड़ता है। रणनीतिक और आर्थिक महत्व बहुत है। इस रेलवे रूट के पूरी तरह सक्रिय होने से जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही, प्रतिकूल मौसम में भी कश्मीर घाटी देश के बाकी हिस्सों से सुरक्षित रूप से जुड़ी रहेगी, जिससे पर्यटन, व्यापार और सैन्य आवाजाही को बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
N5: आपको अवगत करा दूँ कि यह उपलब्धि न केवल आत्मनिर्भर भारत और भारतीय इंजीनियरिंग की क्षमता को प्रदर्शित करती है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के विकास और कनेक्टिविटी में एक नए युग की शुरुआत का भी प्रतीक है।
(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
Shailendra Kumar
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भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक कारनामा: चिनाब और अंजी खड्ड पुलों पर 100 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ी वंदे भारत ट्रेन

भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक कारनामा: चिनाब और अंजी खड्ड पुलों पर 100 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ी वंदे भारत ट्रेन
नई दिल्ली / जम्मू:
भारतीय रेलवे ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना के तहत एक नया इतिहास रच दिया है। जम्मू और श्रीनगर के बीच चलने वाली सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज 'चिनाब ब्रिज' और भारत के पहले केबल-स्टेड 'अंजी खड्ड ब्रिज' को पहली बार 100 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से सफलतापूर्वक पार किया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा साझा की गई इस जानकारी ने देश भर के रेल प्रेमियों और नागरिकों में भारी उत्साह भर दिया है। रेलवे इंजीनियरों और विशेषज्ञों की कड़ी मेहनत का परिणाम है कि आज अत्यधिक कठिन और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले कश्मीर घाटी के क्षेत्र को सीधा राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है।
चिनाब और अंजी खड्ड पुलों से जुड़ी मुख्य बातें एवं महत्वपूर्ण जानकारी: दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज जो नदी के तल से 359 मीटर (1,178 फीट) की ऊंचाई पर बना है। चिनाब रेल ब्रिज एफिल टॉवर से भी लगभग 35 मीटर ऊंचा है। ये अत्यधिक हवा और भूकंपरोधी क्षमता वाला है। यह पुल अत्यंत जटिल इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना है। यह 260 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तूफानी हवाओं की रफ्तार को आसानी से झेल सकता है। साथ ही इसे उच्च तीव्रता वाले भूकंप (जोन V) के झटकों को सहन करने योग्य बनाया गया है।
अंजी खड्ड पुल (भारत का पहला केबल-स्टेड रेल ब्रिज) है। अंजी खड्ड नदी पर बना यह पुल भारत का पहला केबल-स्टेड रेलवे ब्रिज है, जो कटरा और रेयासी क्षेत्रों को जोड़ता है। रणनीतिक और आर्थिक महत्व बहुत है। इस रेलवे रूट के पूरी तरह सक्रिय होने से जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही, प्रतिकूल मौसम में भी कश्मीर घाटी देश के बाकी हिस्सों से सुरक्षित रूप से जुड़ी रहेगी, जिससे पर्यटन, व्यापार और सैन्य आवाजाही को बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
N5: आपको अवगत करा दूँ कि यह उपलब्धि न केवल आत्मनिर्भर भारत और भारतीय इंजीनियरिंग की क्षमता को प्रदर्शित करती है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के विकास और कनेक्टिविटी में एक नए युग की शुरुआत का भी प्रतीक है।
(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
Shailendra Kumar
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