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राघोपुर नाव दुर्घटना: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलते हुए सरकार पर बोला तीखा हमला

राघोपुर नाव दुर्घटना: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलते हुए सरकार पर बोला तीखा हमला
पटना राघोपुर N5:
बिहार के राघोपुर क्षेत्र में हुई हृदयविदारक नाव दुर्घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद बिहार विधानसभा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और इसके बाद प्रशासन व सरकार की कार्यशैली पर कई गंभीर और बड़े खुलासे किए हैं। 
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया और बयानों के माध्यम से राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक तंत्र पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना ने सिस्टम की नाकामी और संवेदनहीनता को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
प्रशासनिक लापरवाही और SDRF की देरी पर हुए बड़े खुलासे
तेजस्वी यादव ने खुलासा किया कि घटना की सूचना मिलते ही तत्काल प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि SDRF की टीम घटना स्थल पर काफी देर से, यानी करीब 3 घंटे की देरी से पहुंची। तब तक स्थानीय लोगों और स्थानीय तैराकों ने मिलकर अपनी जान पर खेलकर सभी पीड़ितों को पानी से बाहर निकाल लिया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जो टीम इतनी देरी से पहुंची, उसने राहत कार्य करने के बजाय कथित तौर पर सिर्फ औपचारिकता निभाई और फोटोशूट के लिए बेमतलब कई घंटे तक बोट घुमाती रही।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से गई मासूमों की जान
नेता प्रतिपक्ष ने सबसे बड़ा और मर्माहत करने वाला खुलासा स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर किया है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों और स्थानीय तैराकों द्वारा पानी से निकाले गए कई बच्चे घंटों तक जीवित थे और उनके बचने की पूरी संभावना व स्थिति थी। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग और लचर चिकित्सा व्यवस्था की भारी लापरवाही ने उन मासूमों की जान ले ली। वो ऐसे!
1, एम्बुलेंस बहुत देर से पहुंची और सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि उस एम्बुलेंस में ऑक्सीजन तक उपलब्ध नहीं थी।
2, किसी तरह घंटों बाद जब बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया, तो वहां भी ऑक्सीजन का अभाव था।
3, अस्पताल में न तो पर्याप्त दवाइयां थीं और न ही इलाज की कोई उचित और बुनियादी व्यवस्था थी।
4, तेजस्वी यादव ने दावा किया कि सिर्फ ऑक्सीजन और समय पर इलाज न मिलने की वजह से कम से कम 5 से 6 बच्चों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
सरकार और मुआवजे पर तीखा रोष
सत्ता पक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि पिछले लंबे समय 20 सालों से सत्ता में जमे लोग राहत के नाम पर महज 04 लाख रुपये देकर बच्चों की जिंदगी का सौदा करना बंद करें। उन्होंने कहा कि सरकार की घोर लापरवाही और जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण कई परिवारों का पूरा वंश खत्म हो चुका है। पीड़ित परिवारों का क्रंदन और चीत्कार किसी का भी दिल चीरने के लिए काफी है।
तेजस्वी यादव की प्रमुख मांगें:
मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का दौरा: मुख्यमंत्री खुद पीड़ित परिवारों से मिलें और उनकी दुख-दर्द भरी पुकार सुनें। साथ ही, स्वास्थ्य मंत्री अपनी झूठी और दिखावटी पीआर बाजी (Paid PR) से बाहर निकलकर आएं और जवाब दें कि ऑक्सीजन और इलाज के अभाव में आधे दर्जन से अधिक मासूमों की जान क्यों गई।
भूमि आवंटन: सरकार प्रत्येक पीड़ित परिवार को कम से कम 03 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराए।
व्यवस्था में सुधार: प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटना दोबारा न हो। जरूरत पड़ने पर समय पर एम्बुलेंस पहुंचे, अस्पतालों में ऑक्सीजन की मु मुकम्मल व्यवस्था हो और मरीजों के लिए उचित इलाज व दवाइयों की समुचित सुविधा हर वक्त बहाल रहे।
N5: इस दुर्घटना ने एक बार फिर बिहार की जमीनी वास्तविकताओं, खासकर ग्रामीण इलाकों में जल परिवहन की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
(रिपोर्ट- न्यूज डेस्क N5)
Shailendra Kumar
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राघोपुर नाव दुर्घटना: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलते हुए सरकार पर बोला तीखा हमला

राघोपुर नाव दुर्घटना: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलते हुए सरकार पर बोला तीखा हमला
पटना राघोपुर N5:
बिहार के राघोपुर क्षेत्र में हुई हृदयविदारक नाव दुर्घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद बिहार विधानसभा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और इसके बाद प्रशासन व सरकार की कार्यशैली पर कई गंभीर और बड़े खुलासे किए हैं। 
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया और बयानों के माध्यम से राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक तंत्र पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना ने सिस्टम की नाकामी और संवेदनहीनता को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
प्रशासनिक लापरवाही और SDRF की देरी पर हुए बड़े खुलासे
तेजस्वी यादव ने खुलासा किया कि घटना की सूचना मिलते ही तत्काल प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि SDRF की टीम घटना स्थल पर काफी देर से, यानी करीब 3 घंटे की देरी से पहुंची। तब तक स्थानीय लोगों और स्थानीय तैराकों ने मिलकर अपनी जान पर खेलकर सभी पीड़ितों को पानी से बाहर निकाल लिया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जो टीम इतनी देरी से पहुंची, उसने राहत कार्य करने के बजाय कथित तौर पर सिर्फ औपचारिकता निभाई और फोटोशूट के लिए बेमतलब कई घंटे तक बोट घुमाती रही।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से गई मासूमों की जान
नेता प्रतिपक्ष ने सबसे बड़ा और मर्माहत करने वाला खुलासा स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर किया है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों और स्थानीय तैराकों द्वारा पानी से निकाले गए कई बच्चे घंटों तक जीवित थे और उनके बचने की पूरी संभावना व स्थिति थी। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग और लचर चिकित्सा व्यवस्था की भारी लापरवाही ने उन मासूमों की जान ले ली। वो ऐसे!
1, एम्बुलेंस बहुत देर से पहुंची और सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि उस एम्बुलेंस में ऑक्सीजन तक उपलब्ध नहीं थी।
2, किसी तरह घंटों बाद जब बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया, तो वहां भी ऑक्सीजन का अभाव था।
3, अस्पताल में न तो पर्याप्त दवाइयां थीं और न ही इलाज की कोई उचित और बुनियादी व्यवस्था थी।
4, तेजस्वी यादव ने दावा किया कि सिर्फ ऑक्सीजन और समय पर इलाज न मिलने की वजह से कम से कम 5 से 6 बच्चों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
सरकार और मुआवजे पर तीखा रोष
सत्ता पक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि पिछले लंबे समय 20 सालों से सत्ता में जमे लोग राहत के नाम पर महज 04 लाख रुपये देकर बच्चों की जिंदगी का सौदा करना बंद करें। उन्होंने कहा कि सरकार की घोर लापरवाही और जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण कई परिवारों का पूरा वंश खत्म हो चुका है। पीड़ित परिवारों का क्रंदन और चीत्कार किसी का भी दिल चीरने के लिए काफी है।
तेजस्वी यादव की प्रमुख मांगें:
मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का दौरा: मुख्यमंत्री खुद पीड़ित परिवारों से मिलें और उनकी दुख-दर्द भरी पुकार सुनें। साथ ही, स्वास्थ्य मंत्री अपनी झूठी और दिखावटी पीआर बाजी (Paid PR) से बाहर निकलकर आएं और जवाब दें कि ऑक्सीजन और इलाज के अभाव में आधे दर्जन से अधिक मासूमों की जान क्यों गई।
भूमि आवंटन: सरकार प्रत्येक पीड़ित परिवार को कम से कम 03 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराए।
व्यवस्था में सुधार: प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटना दोबारा न हो। जरूरत पड़ने पर समय पर एम्बुलेंस पहुंचे, अस्पतालों में ऑक्सीजन की मु मुकम्मल व्यवस्था हो और मरीजों के लिए उचित इलाज व दवाइयों की समुचित सुविधा हर वक्त बहाल रहे।
N5: इस दुर्घटना ने एक बार फिर बिहार की जमीनी वास्तविकताओं, खासकर ग्रामीण इलाकों में जल परिवहन की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
(रिपोर्ट- न्यूज डेस्क N5)
Shailendra Kumar
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