मोतिहारी में इंसानियत शर्मसार: दशहरा मेले से लौट रहे दंपत्ति पर हमला, पति को बंधक बनाकर महिला से सामूहिक दुष्कर्म; 8 आरोपी गिरफ्तार
शैलेन्द्र कुमार
मोतिहारी/मधुबन:
बिहार के मोतिहारी (मधुबन क्षेत्र) में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को तार-तार कर देने वाली एक बेहद खौफनाक और शर्मनाक वारदात सामने आई है। दशहरा मेला देखकर अपने घर लौट रहे एक नवदंपत्ति को बदमाशों ने सुनसान रास्ते पर घेर लिया। आरोपियों ने पति की बेरहमी से पिटाई की, उसे रस्सियों से बांधकर बंधक बनाया और फिर उसकी आंखों के सामने उसकी पत्नी के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) जैसी जघन्य वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात में शामिल सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, घटना 18 अक्टूबर की सुबह करीब 4:00 बजे की है। पीड़ित पति-पत्नी मोतिहारी के मधुबन क्षेत्र में आयोजित दशहरा मेला देखकर अपने घर की ओर लौट रहे थे। जब वे एक सुनसान रास्ते से गुजर रहे थे, तभी घात लगाए अपराधियों ने उन्हें रोक लिया।
अपराधियों ने पहले दंपत्ति के साथ मारपीट की और पति को अपने कब्जे में ले लिया। विरोध करने पर पति की जमकर पिटाई की गई और उसे लाचार बनाकर बंधक बना दिया गया। इसके बाद दरिंदों ने महिला के साथ हैवानियत की हदें पार करते हुए सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पीड़ितों का मोबाइल फोन छीनकर मौके से फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस की टीम ने तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए जगह-जगह छापेमारी शुरू की। पुलिस ने इस जघन्य अपराध में शामिल सभी 8 आरोपियों को धर दबोचा।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से 8 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनमें पीड़ित के पति से छीना गया मोबाइल भी शामिल है।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची:
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपी शिवहर जिले के श्यामपुर भटहा थाना क्षेत्र अंतर्गत 'लालगढ़ जिम्मी सिंह टोला' के निवासी बताए जा रहे हैं:
अंबिकेश (38 वर्ष), रिकी (19 वर्ष), अंकुश (19 वर्ष), राहुल(19 वर्ष), कंचन (18 वर्ष), मुन्ना (18 वर्ष), रणधीर(20 वर्ष) और अमित (18 वर्ष) है।
इस घिनौनी वारदात के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। आम जनता और समाज सेवियों का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ इस तरह की हैवानियत करने वाले अपराधियों के मन में कानून का खौफ होना बेहद जरूरी है। पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए इस मामले की त्वरित सुनवाई होनी चाहिए और दोषियों को कानून के तहत कठोरतम सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कानूनी व फॉरेंसिक जांच कर रही है।
इस तरह की जघन्य वारदात अत्यंत निंदनीय, शर्मनाक और समाज को झकझोर देने वाली है। धार्मिक उत्सव या मेले से लौटते समय किसी परिवार के साथ इस प्रकार की हैवानियत होना बेहद दुखद है। महिलाओं के खिलाफ ऐसे अपराधों में अपराधियों के मन में कानून का डर होना आवश्यक है। इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) के जरिए त्वरित सुनवाई होनी चाहिए ताकि पीड़िता को जल्द न्याय मिले और दोषियों को कठोरतम सजा दी जा सके।
त्योहारों के दौरान सुनसान रास्तों और प्रमुख मार्गों पर पुलिस गश्ती (Patrolling) और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि कोई भी अपराधी ऐसी घटना को अंजाम देने का दुस्साहस न कर सके।
यह विडंबना ही है कि एक तरफ जहां समाज शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना करता है और 'नारीशक्ति' के सम्मान की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ समाज में ऐसी जघन्य और शर्मनाक घटनाएं मानवता को कलंकित कर देती हैं। एक तरफ हम देवी पूजा और नवरात्रि के पावन पर्व पर नारी शक्ति की पूजा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी समय में एक महिला के साथ ऐसी अमानवीय और घिनौनी वारदात का होना यह दर्शाता है कि समाज की सोच और अपराधियों की मानसिकता में अभी भी कितनी बड़ी विकृति है।
यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था के लिए एक गहरी आत्मचिंतन का विषय है। केवल उत्सवों के दौरान नारी सम्मान की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर समय और हर परिस्थिति में महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा को बनाए रखना प्रशासन और समाज, दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
(स्रोत: सोशल मीडिया, इसके विश्वसनीय पोस्ट्स और ग्रोक की जांच आदि )
