इंडियन पुलिस पर फोन जब्ती कर सीजर मेमो न देने का लगा आरोप: CJP प्रवक्ता सौरव दास ने जताई 'प्लांटेड एविडेंस' और हैकिंग की आशंका
इंडियन पुलिस पर फोन जब्ती कर सीजर मेमो न देने का लगा आरोप: CJP प्रवक्ता सौरव दास ने जताई 'प्लांटेड एविडेंस' और हैकिंग की आशंका
नई दिल्ली/N5:
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता और खोजी पत्रकार सौरव दास ने इंडियन पुलिस द्वारा उनके डिजिटल उपकरणों को जब्त किए जाने के तरीके पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हाल ही में पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पर सीधा हमला बोला और आरोप लगाया कि बिना विधिक प्रक्रिया (Legal Procedure) के उनके फोन जब्त किए गए हैं।
"बिना मेमो जब्त किए गए फोन, हैकिंग का डर"
पत्रकारों को संबोधित करते हुए CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा:
"उन्होंने हमारे फोन जब्त कर लिए लेकिन जब्ती का कोई मेमो (Seizure Memo) नहीं दिया... हमें आशंका है कि हमारे फोन हैक या क्लोन किए गए हैं। जैसा कि पिछले कुछ सालों में दूसरे एक्टिविस्ट्स के साथ हुआ है, हमें डर है कि उन्होंने हमारे डिवाइस हैक करके उनमें ऐसे दस्तावेज या दूसरी चीजें डाल दी हों जिन्हें बाद में सबूत के तौर पर पेश किया जा सके... हम यह साफ करना चाहते हैं कि हमारे फोन शायद हैक हो चुके हैं..."
सौरव दास ने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस को जब्ती के समय तय कानूनी प्रोटोकॉल (जैसे 'सीजर मेमो' देना और डिवाइस की 'हैश वैल्यू' रिकॉर्ड करना) का पालन करना अनिवार्य होता है। जब्ती मेमो न दिए जाने के कारण उन्हें डर है कि उनके डिजिटल उपकरणों के डेटा में छेड़छाड़ की जा सकती है या उनमें बाहर से कोई फर्जी दस्तावेज ('प्लांटेड एविडेंस') डाले जा सकते हैं।
घटनाक्रम का संदर्भ: क्या है पूरा मामला?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस ने कई CJP नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था।
रिहाई के बाद सौरव दास ने पुलिस की इस कार्रवाई को नागरिक अधिकारों और निजता पर हमला करार दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनों को दबाने के लिए मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और राजधानी में भारी पुलिस बल तैनात करने जैसे कड़े कदम उठाए गए।
डिजिटल साक्ष्यों की जब्ती और विधिक प्रक्रिया (विश्लेषण एवं टिप्पणी)
सौरव दास द्वारा उठाया गया यह मुद्दा भारत में जांच एजेंसियों द्वारा डिजिटल उपकरणों (स्मार्टफोन, लैपटॉप) की जब्ती और उसमें नागरिक अधिकारों के संरक्षण से जुड़े एक बड़े विवाद को रेखांकित करता है।
1. सीजर मेमो और हैश वैल्यू का कानूनी महत्व
भारतीय आपराधिक कार्यप्रणाली (CrPC / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत किसी भी जब्ती के समय पुलिस को मौके पर ही सीजर मेमो (Seizure Memo) तैयार करना होता है, जिस पर स्वतंत्र गवाहों और संबंधित व्यक्ति के हस्ताक्षर होते हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मामले में 'हैश वैल्यू' (Hash Value) दर्ज करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जो डिवाइस के डेटा की एक विशिष्ट डिजिटल फिंगरप्रिंट होती है।
यदि जब्ती के समय हैश वैल्यू नोट नहीं की जाती या सीजर मेमो नहीं दिया जाता, तो भविष्य में यह साबित करना मुश्किल हो जाता है कि जांच के दौरान डिवाइस में कोई नया डेटा डाला गया या हटाया गया या नहीं।
2. 'डिजिटल प्लांटिंग' (Digital Planting) का बढ़ता डर
पिछले कुछ वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल मामलों (जैसे भीमा कोरेगांव मामला या पेगासस विवाद) में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि मालवेयर/स्पाइवेयर के जरिए उनके फोन्स में बाहरी दस्तावेज प्लांट किए गए थे। सौरव दास का यह बयान उसी वैश्विक व राष्ट्रीय बहस का हिस्सा है, जहां डिजिटल फॉरेंसिक जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं।
3. लोकतंत्र और जांच एजेंसियों की जवाबदेही
लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति जताने वाले समूहों और पत्रकारों के डिजिटल अधिकारों (Digital Privacy) की रक्षा होना उतना ही आवश्यक है जितना कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना। यदि पुलिस बिना उचित विधिक दस्तावेजों के उपकरण जब्त करती है, तो इससे न केवल जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता खत्म होती है, बल्कि नागरिकों के मन में राज्य मशीनरी के प्रति अविश्वास भी बढ़ता है।
निष्कर्ष:
सौरव दास का यह बयान केवल एक व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, बल्कि यह देश में डिजिटल फॉरेंसिक जांच और पुलिस सुधारों से जुड़े बुनियादी सवालों को फिर से सामने लाता है। जब तक जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जब्त करते समय मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन नहीं करेंगी, तब तक 'प्लांटेड सबूतों' और 'डिजिटल हैकिंग' की आशंकाएं बनी रहेंगी।
(रिपोर्ट- न्यूज डेस्क N5)
