बरौनी रिफाइनरी में मजदूर की मौत के बाद भड़का आक्रोश, सुरक्षा नियमों और ठेका व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
बरौनी रिफाइनरी में मजदूर की मौत के बाद भड़का आक्रोश, सुरक्षा नियमों और ठेका व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
बेगूसराय (बिहार)N5:
बिहार के औद्योगिक केंद्र कहे जाने वाले बेगूसराय जिले स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) की बरौनी रिफाइनरी परिसर में एक बार फिर किसी मजदूर की जान चली गई है। रिफाइनरी विस्तारीकरण परियोजना में कार्यरत 35 वर्षीय ठेका मजदूर मुरारी सिंह की ऊंचाई से नीचे गिर जाने के कारण दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद मृतक के परिजनों और हजारों साथी श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। पिछले कई घंटों से बरौनी रिफाइनरी के मुख्य द्वार को पूरी तरह से बंद कर उग्र प्रदर्शन और हंगामा जारी है।
मृतक मजदूर के परिजनों और साथी श्रमिकों ने IOCL प्रबंधन तथा संबंधित ठेका कंपनी से 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी देने की स्पष्ट मांग रखी है। घटना की सूचना मिलते ही मटिहानी से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायक सर्वेश कुमार उर्फ बोगो सिंह और स्थानीय प्रतिनिधि पीड़ित परिवार के समर्थन में रिफाइनरी गेट पर पहुंचे और धरने पर बैठ गए।
घटना का पूरा घटनाक्रम और वर्तमान स्थिति
हादसे की मुख्य वजह: किल्ली-मोहनपुर निवासी ठेका श्रमिक मुरारी सिंह रिफाइनरी परिसर में अत्यधिक ऊंचाई पर काम कर रहे थे। काम के दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण वे नीचे गिर पड़े, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
गेट जाम और काम का बहिष्कार: घटना के बाद गुस्साए मजदूरों ने शव को रिफाइनरी के मुख्य प्रवेश द्वार के पास रखकर आवाजाही पूरी तरह बाधित कर दी। हजारों श्रमिकों ने काम का बहिष्कार कर दिया, जिससे विस्तारीकरण परियोजना का संचालन ठप हो गया।
प्रशासन और सुरक्षा बलों का हस्तक्षेप: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीओ और एसडीपीओ सहित भारी पुलिस बल और सीआईएसएफ (CISF) की तैनाती की गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी देखी गई।
जनप्रतिनिधियों का रुख: आरजेडी RJD विधायक बोगो सिंह ने कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को उचित न्याय और घोषित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने रिफाइनरी प्रबंधन और ठेकेदारों पर मजदूरों की लाचारी का फायदा उठाने का आरोप लगाया।
विश्लेषण: औद्योगिक सुरक्षा, ठेका प्रणाली और जवाबदेही की विफलता
यह पहली बार नहीं है जब बरौनी रिफाइनरी जैसी अति-संवेदनशील हाइड्रोकार्बन इकाई में इस तरह का हादसा हुआ है। यह घटना भारतीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में तेजी से बढ़ रही 'आउटसोर्सिंग' और ठेका प्रथा के गंभीर दुष्प्रभावों को उजागर करती है।
सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) में घोर लापरवाही
अति-जोखिम वाले औद्योगिक वातावरण में ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए 'फ़ॉल प्रोटेक्शन हारनेस', सुरक्षा जाल और निरंतर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य होते हैं। मुरारी सिंह की मौत सीधे तौर पर सुरक्षा उपकरणों की कमी या कार्यस्थल पर घटिया सुरक्षा इंतजामों की ओर इशारा करती है।
मुख्य प्रबंधन (IOCL) बनाम ठेका कंपनी की जवाबदेही
अक्सर देखा जाता है कि दुर्घटना होने पर मुख्य संस्थान (IOCL) अपनी जिम्मेदारी ठेका कंपनी पर डाल देता है और ठेका कंपनी कागजी पचड़ों का बहाना बनाकर आर्थिक मदद देने से हाथ खींच लेती है। इस कानूनी ढील का खामियाजा गरीब मजदूर और उसके आश्रितों को भुगतना पड़ता है।
श्रम अधिकारों और यूनियनों की कमजोर स्थिति
मुख्य रिफाइनरी में नियमित कर्मचारियों की तुलना में ठेका मजदूरों को न तो समान सुरक्षा व्यवस्था मिलती है और न ही समय पर बीमा व मुआवजा। ठेका प्रणाली के चलते श्रमिकों का कोई ठोस संगठन नहीं बन पाता, जिसका फायदा प्रबंधन उठाता है।
निष्कर्ष: बरौनी रिफाइनरी का मामला केवल एक व्यक्ति के मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम सुरक्षा सुधारों का एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करता है। जब तक औद्योगिक घराने और सार्वजनिक उपक्रम सुरक्षा मानकों को अनिवार्य और पारदर्शी नहीं बनाएंगे, तब तक ऐसे हादसे नहीं रुक सकते।
प्रशासन और रिफाइनरी प्रबंधन को चाहिए कि वे तात्कालिक समाधान के रूप में परिवार को उचित वित्तीय सुरक्षा प्रदान करें और साथ ही घटना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज करें। मजदूर केवल उत्पादन का साधन नहीं हैं; उनके जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी औद्योगिक विकास की प्राथमिक शर्त होनी चाहिए।
(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
