न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव: पटना में खुला देश का पहला 'विक्टिम्स राइट्स सेंटर', न्याय की दिशा में भारत का मजबूत कदम
न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव: पटना में खुला देश का पहला 'विक्टिम्स राइट्स सेंटर', न्याय की दिशा में भारत का मजबूत कदम
पटना/N5: भारतीय न्याय व्यवस्था में पीड़ितों के
अधिकारों को प्राथमिकता देने और कानूनी सहायता को सुलभ बनाने के उद्देश्य से एक
मील का पत्थर स्थापित किया गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बिहार की राजधानी
पटना में देश के पहले 'विक्टिम्स राइट्स सेंटर' (Victims' Rights Center) का भव्य उद्घाटन किया। यह ऐतिहासिक पहल
न केवल अपराध पीड़ितों के लिए एक संबल बनेगी, बल्कि
भारत के न्यायिक इतिहास में संवेदनशीलता और जवाबदेही का नया अध्याय भी लिखेगी।
एक ही छत के नीचे संपूर्ण सहायता
यह नवनिर्मित केंद्र 'बिहार
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण' (BSLSA) परिसर
में स्थापित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य अपराध से प्रभावित लोगों को एक ही
स्थान पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराना है। इस सेंटर के माध्यम से पीड़ितों को:
* कानूनी सहायता: मुकदमों और अदालती
कार्यवाही के लिए निशुल्क एवं प्रभावी कानूनी मार्गदर्शन।
* मनोवैज्ञानिक सहयोग: अपराध के आघात (Trauma) से उबरने के लिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद।
* काउंसलिंग एवं परामर्श: कानूनी प्रक्रियाओं, अधिकारों और पुनर्वास की सही जानकारी।
"न्याय को नागरिकों तक खुद पहुंचना होगा"
उद्घाटन के अवसर पर अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने
न्यायिक सुधारों पर तीखा और प्रभावकारी विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि न्याय
प्रणाली को अब उस पुरानी सोच से बाहर निकलना होगा जहाँ नागरिक न्याय के इंतजार में
वर्षों भटकते रहते हैं। न्याय व्यवस्था को स्वयं आगे बढ़कर आम नागरिकों और
पीड़ितों के दरवाजे तक पहुँचना होगा।
CJI ने
रेखांकित किया कि अक्सर अपराध पीड़ित लोग जागरूक न होने के कारण अपने कानूनी
अधिकारों और सरकारी मदद की प्रक्रियाओं से अनजान रह जाते हैं। 'विक्टिम्स राइट्स सेंटर' का प्राथमिक लक्ष्य इसी सूचना और सहायता के
अंतर (Gap) को पूरी तरह समाप्त करना है।
पटना हाई कोर्ट में बुनियादी ढांचे का विस्तार
अपने बिहार दौरे के दौरान CJI न्यायमूर्ति
सूर्यकांत पटना हाई कोर्ट भी पहुँचे, जहाँ
उनका शॉल और प्रतीक चिह्न भेंट कर भव्य स्वागत व सम्मान किया गया। इस यात्रा के
दौरान उन्होंने पटना हाई कोर्ट के मुख्य भवन में नवनिर्मित मीटिंग रूम और
एक्जीक्यूटिव वेटिंग लाउंज का भी औपचारिक उद्घाटन किया। यह कदम न्यायिक परिसर के
इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक और कार्यकुशल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा
है।
न्याय व्यवस्था में एक दूरदर्शी और नई सोच
भारत में दशकों तक न्याय प्रणाली केवल आरोपी या अपराधियों के
अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के इर्द-गिर्द सिमटी नजर आती थी, जहाँ पीड़ित को हाशिए पर छोड़ दिया जाता था। इस
दिशा में सरकार और न्यायपालिका की यह सांझा पहल एक बेहद प्रगतिशील और मानवीय
दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
N5: राजनीतिक और नीतिगत दृष्टिकोण से देखें तो
पूर्व में मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल को छोङकर कांग्रेस की किसी भी उत्तरवर्ती
सोच में ऐसी केंद्रित पीड़ित-उन्मुख (Victim-centric) व्यवस्थाओं पर ठोस काम देखने को नहीं मिला। वर्तमान में न्यायपालिका
और शासन द्वारा उठाया गया यह कदम यह साबित करता है कि भारत अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक और सुलभ न्याय की ओर तेज़ी से
कदम बढ़ा रहा है। पटना में स्थापित यह 'विक्टिम्स
राइट्स सेंटर' देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक
अनुकरणीय मॉडल (Benchmark)
साबित होगा।
