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राजधानी पटना के ज्ञान भवन में आयोजित भव्य 'बिहार सरस मेला 2026' अब अपने अंतिम चरण में पहुंच: 29 सितंबर को समाप्त होगा

राजधानी पटना के ज्ञान भवन में आयोजित भव्य 'बिहार सरस मेला 2026' अब अपने अंतिम चरण में पहुंच: 29 सितंबर को समाप्त होगा

पटना/N5: 29 सितंबर को समाप्त होगा सरस मेला। उल्टी गिनती शुरू हुई। अगले बुधवार को अंतिम मेला होगा। इंट्री मुफ्त है। मेला में घूमे और आनंद उठाए। राजधानी पटना में लगा है मेला। राजधानी पटना के ज्ञान भवन में आयोजित भव्य 'बिहार सरस मेला 2026' अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

20 सितंबर से शुरू हुआ यह चर्चित मेला आगामी 29 सितंबर (मंगलवार/बुधवार) को समाप्त हो जाएगा। मेले के समापन में अब केवल कुछ ही दिन शेष बचे हैं, जिसे देखते हुए आयोजकों और स्टॉल धारकों द्वारा उल्टी गिनती शुरू कर दी गई है। अगर आपने अभी तक इस शानदार मेले का आनंद नहीं लिया है, तो आपके पास अगले सप्ताह तक का ही समय बचा है।

मुफ्त प्रवेश और खरीदारी का शानदार अवसर

सरस मेले की सबसे खास बात यह है कि इसमें आम जनता के लिए प्रवेश पूरी तरह से नि:शुल्क रखा गया है। कोई भी प्रवेश शुल्क न होने के कारण रोजाना हजारों की संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ मेले में पहुंच रहे हैं। मेले में घूमकर न केवल विभिन्न सांस्कृतिक रंगों का आनंद लिया जा सकता है, बल्कि देश भर के हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की खरीदारी भी की जा सकती है।

15 राज्यों की महिला उद्यमियों का अनोखा संगम

इस वर्ष सरस मेले में बिहार समेत देश के लगभग 15 विभिन्न राज्यों के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिला उद्यमी अपने बेहतरीन उत्पादों के साथ शामिल हुई हैं। यह मेला महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण प्रतिभाओं को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है। यहाँ आने वाले दर्शक सीधे ग्रामीण कारीगरों से उत्पाद खरीदकर उनका उत्साहवर्धन कर रहे हैं।

हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की नक्काशी का अद्भुत संगम

ज्ञान भवन में लगे विभिन्न स्टॉलों पर हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाकृतियों का अद्भुत संग्रह देखने को मिल रहा है। मेले के मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं:

Ø पारंपरिक कला और वस्त्र: प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग, सिल्क और खादी के कपड़ों के विशेष स्टॉल लगाए गए हैं।

Ø  हैंडलूम और क्राफ्ट: देश के कोने-कोने से आए सुंदर हैंडलूम उत्पाद और पारंपरिक कपड़े दर्शकों को काफी लुभा रहे हैं।

Ø ग्रामीण उत्पाद: बांस, लकड़ी, मिट्टी और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से बने हस्तनिर्मित और सजावटी ग्रामीण उत्पादों की विविधता उपलब्ध है।

ग्रामीण क्षेत्रों के कुशल कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों द्वारा बांस से निर्मित ढेरों दैनिक उपयोग और सजावटी सामान प्रदर्शित किए गए हैं। बांस से बने लैंपशेड, टोकरियाँ, फूलदान (फ्लावर वाश), दीवार पर सजाने वाले फ्रेम, ट्रे, कप-प्लेट, पेन स्टैंड और फैंसी फर्नीचर लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बांस पर की गई सूक्ष्म नक्काशी और फिनिशिंग कारीगरों की कलात्मकता को बखूबी दर्शाती है।

N5: पर्यावरण संरक्षण का संदेश और मजबूती। आज के समय में जब लोग प्लास्टिक के विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, बांस से बने ये उत्पाद न केवल दिखने में सुंदर और टिकाऊ हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। मेले में आए लोग घरों को सजाने और अपनों को उपहार देने के लिए इन बांस के उत्पादों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं।

(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क पटना N5)
Shailendra Kumar
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राजधानी पटना के ज्ञान भवन में आयोजित भव्य 'बिहार सरस मेला 2026' अब अपने अंतिम चरण में पहुंच: 29 सितंबर को समाप्त होगा

राजधानी पटना के ज्ञान भवन में आयोजित भव्य 'बिहार सरस मेला 2026' अब अपने अंतिम चरण में पहुंच: 29 सितंबर को समाप्त होगा

पटना/N5: 29 सितंबर को समाप्त होगा सरस मेला। उल्टी गिनती शुरू हुई। अगले बुधवार को अंतिम मेला होगा। इंट्री मुफ्त है। मेला में घूमे और आनंद उठाए। राजधानी पटना में लगा है मेला। राजधानी पटना के ज्ञान भवन में आयोजित भव्य 'बिहार सरस मेला 2026' अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

20 सितंबर से शुरू हुआ यह चर्चित मेला आगामी 29 सितंबर (मंगलवार/बुधवार) को समाप्त हो जाएगा। मेले के समापन में अब केवल कुछ ही दिन शेष बचे हैं, जिसे देखते हुए आयोजकों और स्टॉल धारकों द्वारा उल्टी गिनती शुरू कर दी गई है। अगर आपने अभी तक इस शानदार मेले का आनंद नहीं लिया है, तो आपके पास अगले सप्ताह तक का ही समय बचा है।

मुफ्त प्रवेश और खरीदारी का शानदार अवसर

सरस मेले की सबसे खास बात यह है कि इसमें आम जनता के लिए प्रवेश पूरी तरह से नि:शुल्क रखा गया है। कोई भी प्रवेश शुल्क न होने के कारण रोजाना हजारों की संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ मेले में पहुंच रहे हैं। मेले में घूमकर न केवल विभिन्न सांस्कृतिक रंगों का आनंद लिया जा सकता है, बल्कि देश भर के हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की खरीदारी भी की जा सकती है।

15 राज्यों की महिला उद्यमियों का अनोखा संगम

इस वर्ष सरस मेले में बिहार समेत देश के लगभग 15 विभिन्न राज्यों के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिला उद्यमी अपने बेहतरीन उत्पादों के साथ शामिल हुई हैं। यह मेला महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण प्रतिभाओं को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है। यहाँ आने वाले दर्शक सीधे ग्रामीण कारीगरों से उत्पाद खरीदकर उनका उत्साहवर्धन कर रहे हैं।

हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की नक्काशी का अद्भुत संगम

ज्ञान भवन में लगे विभिन्न स्टॉलों पर हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाकृतियों का अद्भुत संग्रह देखने को मिल रहा है। मेले के मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं:

Ø पारंपरिक कला और वस्त्र: प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग, सिल्क और खादी के कपड़ों के विशेष स्टॉल लगाए गए हैं।

Ø  हैंडलूम और क्राफ्ट: देश के कोने-कोने से आए सुंदर हैंडलूम उत्पाद और पारंपरिक कपड़े दर्शकों को काफी लुभा रहे हैं।

Ø ग्रामीण उत्पाद: बांस, लकड़ी, मिट्टी और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से बने हस्तनिर्मित और सजावटी ग्रामीण उत्पादों की विविधता उपलब्ध है।

ग्रामीण क्षेत्रों के कुशल कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों द्वारा बांस से निर्मित ढेरों दैनिक उपयोग और सजावटी सामान प्रदर्शित किए गए हैं। बांस से बने लैंपशेड, टोकरियाँ, फूलदान (फ्लावर वाश), दीवार पर सजाने वाले फ्रेम, ट्रे, कप-प्लेट, पेन स्टैंड और फैंसी फर्नीचर लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बांस पर की गई सूक्ष्म नक्काशी और फिनिशिंग कारीगरों की कलात्मकता को बखूबी दर्शाती है।

N5: पर्यावरण संरक्षण का संदेश और मजबूती। आज के समय में जब लोग प्लास्टिक के विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, बांस से बने ये उत्पाद न केवल दिखने में सुंदर और टिकाऊ हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। मेले में आए लोग घरों को सजाने और अपनों को उपहार देने के लिए इन बांस के उत्पादों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं।

(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क पटना N5)
Shailendra Kumar
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