कोसी उफान पर और गंगा के तेज बहाव से मुंगेर में भीषण कटाव, मंडराया दोहरा संकट: बिहार
पटना/सुपौल/मुंगेर:
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश और बंगाल की खाड़ी
में बने चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से बिहार में बाढ़ का खतरा अचानक बेहद गंभीर हो
गया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में नदियों के उफान और तेज बहाव ने तबाही की
स्थिति पैदा कर दी है। जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य के इस क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किए
जाने के बाद सीमावर्ती और तटीय इलाकों में प्रशासनिक हलचल काफी तेज हो गई है।
कोसी नदी का विकराल रूप: बैराज से छोड़ा गया
भारी पानी
नेपाल में लगातार हो रही वर्षा के कारण कोसी नदी का जलस्तर तेजी से
बढ़ रहा है। सुपौल जिले के भीमनगर स्थित कोसी बैराज से बीते कल शाम छह बजे तक 2 लाख 70
हजार क्यूसेक से अधिक पानी डिस्चार्ज किया जा चुका है। जलस्तर की स्थिति को
नियंत्रित करने के लिए कोसी बैराज के कुल 56
फाटकों में से 35 फाटकों को खोलना पड़ा है।
नदी के बढ़ते जलस्तर और जल संसाधन विभाग के हाई अलर्ट के बीच सुपौल
जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए
सुपौल के जिलाधिकारी (DM)
सावन कुमार और पुलिस अधीक्षक (SP) शरथ आर.एस. ने पूर्वी कोसी तटबंध का स्थल पर
जाकर निरीक्षण किया। अधिकारियों ने तटबंध की सुरक्षा, संवेदनशील बिंदुओं और सुरक्षात्मक व्यवस्थाओं
का जायजा लिया तथा अधिकारियों व कर्मियों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने का सख्त
निर्देश दिया है।
मुंगेर में गंगा का तांडव: मिर्जाचक लगमा गांव
में कटाव से दहशत
एक तरफ जहां कोसी नदी का प्रवाह निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा
कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुंगेर जिले में गंगा
नदी का तेज बहाव तबाही मचा रहा है। मुंगेर के हेमजापुर पंचायत अंतर्गत आने वाले
मिर्जाचक लगमा गांव में गंगा की तेज धार के कारण जमीन का कटाव अत्यधिक तेज हो गया
है।
गंगा नदी की तेज धाराओं के कारण तटवर्ती इलाकों के कई घरों पर
विस्थापन और जमींदोज होने का सीधा खतरा मंडराने लगा है। लगातार हो रहे भू-कटाव से
स्थानीय निवासियों और ग्रामीणों में भारी भय और दहशत का माहौल व्याप्त है।
ग्रामीणों ने उठाई जियोबैग और कटावरोधी कार्य
कराने की मांग
गांव को कटाव के प्रकोप से बचाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने जिला
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। प्रभावित ग्रामीणों का कहना
है कि अगर समय रहते स्थिति पर काबू नहीं पाया गया तो दर्जनों परिवार बेघर हो
जाएंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि प्रभावित स्थानों पर
तुरंत जिओबैग (Geo-bags) लगाए जाएं और कटावरोधी (Anti-erosion) कार्यों को युद्ध स्तर पर शुरू कराया जाए ताकि
गांवों और आशियानों को नदी में समाने से बचाया जा सके।
N5: बिहार में मौसम विभाग के चक्रवाती
सिस्टम के पूर्वानुमान और नेपाल की बारिश के चलते अगले कुछ दिन प्रशासनिक सतर्कता
तथा राहत-बचाव तैयारियों के दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होने वाले हैं।
