भारत का अंतरिक्ष में ऐतिहासिक शंखनाद: श्रीहरिकोटा से देश का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च।।
भारत का अंतरिक्ष में ऐतिहासिक शंखनाद: श्रीहरिकोटा से देश का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च।।
श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)N5: भारत के अंतरिक्ष इतिहास में आज एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से देश का पहला निजी रूप से विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट 'विक्रम-1'का सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया है। 'मिशन आगमन' के तहत किए गए इस ऐतिहासिक प्रक्षेपण के साथ ही वैश्विक अंतरिक्ष पटल पर भारत ने अपनी एक बेहद मजबूत और अनूठी पहचान दर्ज करा ली है।
भारत एलीट क्लब में शामिल हुआ।।
इस युगांतकारी घटनाक्रम ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा और शीर्ष देशों की श्रेणी (एलीट क्लब) में ला खड़ा कर दिया है, जिसमें अमेरिका और रूस जैसे अंतरिक्ष महाशक्ति शामिल हैं।
अब तक इन गिने-चुने देशों में ही निजी कंपनियाँ स्पेस सेक्टर में इस तरह के जटिल और बड़े मिशनों को अंजाम देती आई हैं, लेकिन आज भारत ने श्रीहरिकोटा से यह कारनामा कर दिखाया है। इस मील के पत्थर को पार करते ही भारत निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च की क्षमता रखने वाला दुनिया का एक प्रमुख देश बन गया है।
इस युगांतकारी घटनाक्रम पर कंपनी के सीईओ ने क्या कहा?
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस के सीईओ और फाउंडर पवन कुमार चंदन ने अपनी पूरी टीम को बधाई देते हुए गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा:
"...यह पहली बार है जब भारत में किसी प्राइवेट कंपनी ने रॉकेट बनाया है, लॉन्च पैड तैयार किया है और उसे सफलतापूर्वक लॉन्च भी किया है। यह न केवल हमारे लिए बल्कि पूरे ग्लोबल स्पेस सेक्टर के लिए बहुत अहम पल है। हमें बेहद गर्व है कि हम ऐसा कर पाए।"
भारत के युवाओं का जोश और आधुनिक तकनीक का संगम। ।
इस रॉकेट की बनावट और इसे तैयार करने वाली टीम की कुछ बेहद खास बातें निम्नलिखित हैं। जैसे;
युवा टीम का कमाल: इस पूरे मिशन को अंजाम देने वाली स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम की औसत उम्र महज 28 साल है, जिसने अपनी प्रतिभा के दम पर देश का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट तैयार कर दिखाया।
कार्बन कम्पोजिट तकनीक: यह रॉकेट पूरी तरह से हल्के और बेहद मजबूत कार्बन कम्पोजिट से निर्मित है, जो इसकी दक्षता और मार्ग क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है।
यह घटनाक्रम क्यों खास है 'विक्रम-1' का ऑर्बिटल लॉन्च?
इससे पहले साल 2022 में भारत ने देश का पहला प्राइवेट सब-ऑर्बिटल रॉकेट (विक्रम-एस) लॉन्च किया था, जो केवल अंतरिक्ष की ऊंचाई छूकर वापस आ गया था। लेकिन विक्रम-1 एक 'ऑर्बिटल-क्लास' रॉकेट है, जिसका मुख्य उद्देश्य सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित करना है।
N5:भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और निजी क्षेत्र के इस बेजोड़ तालमेल ने यह साबित कर दिया है कि आने वाले समय में भारत का कमर्शियल स्पेस मार्केट दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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