"राहुल गांधी के 'मास्टर प्लान' पर भारी पड़ी स्पेलिंग की गलती; रिनिकी सरमा पासपोर्ट मामले में कांग्रेस बैकफुट पर"
"राहुल गांधी के 'मास्टर प्लान' पर भारी पड़ी स्पेलिंग की गलती; रिनिकी सरमा पासपोर्ट मामले में कांग्रेस बैकफुट पर"
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुइयां शर्मा पर पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह मामला अप्रैल 2026 में असम विधानसभा चुनावों से ठीक पहले काफी गर्मा गया है।
इस विवाद के मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
आरोप और विवाद का कारण: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां शर्मा के पास तीन अलग-अलग देशों (UAE, मिस्र और एंटीगुआ-बारबुडा) के पासपोर्ट हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके परिवार की अमेरिका में 52,000 करोड़ रुपये की संपत्ति और दुबई में अघोषित संपत्तियां हैं।
मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें "फेक AI कैंपेन" और "डिजिटल हेरफेर" करार दिया। दस्तावेजों की जांच में कई तकनीकी गलतियां सामने आईं जो आपके "झूठ साबित होने"
UAE का दस्तावेज: जिसे पासपोर्ट कहा गया, वह दरअसल एक 'गोल्डन कार्ड' (इमिरेट्स आईडी) जैसा दिख रहा था, लेकिन उसमें जन्मतिथि और नाम की स्पेलिंग में गलतियां थीं।
मिस्र का पासपोर्ट: इसमें "Egyptian" की स्पेलिंग गलत लिखी गई थी।
बायोमेट्रिक फोटो की जगह उन तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था जो पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थीं। रिनिकी भुइयां शर्मा के पास एक वैध भारतीय पासपोर्ट है जिसकी समय-सीमा 2029 तक है।
कानूनी कार्रवाई
आरोपों के तुरंत बाद रिनिकी भुइयां शर्मा ने FIR दर्ज कराई। इसके आधार पर असम पुलिस ने पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास की तलाशी भी ली है। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने पवन खेड़ा के खिलाफ दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) मानहानि का मामला दर्ज कराने की घोषणा की है।
इस पूरे विवाद के पीछे राहुल गांधी की भूमिका और उनके बयानों ने इसे व्यक्तिगत और सीधे राजनीतिक टकराव में बदल दिया है।राजनीतिक गलियारों और ताज़ा घटनाक्रमों को देखें तो राहुल गांधी इस कहानी के केंद्र में कुछ इस तरह नज़र आ रहे हैं:
1. सीधे हमलों की कमान
पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों के तुरंत बाद, राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को "देश का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री" करार दिया। उन्होंने केवल पवन खेड़ा का समर्थन ही नहीं किया, बल्कि इसे असम के स्वाभिमान और भ्रष्टाचार से जोड़कर एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की।
2. दस्तावेज़ों का स्रोत?
दिलचस्प बात यह है कि खुद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बयान में संकेत दिया कि पवन खेड़ा को जो दस्तावेज़ (जिन्हें बाद में गलत बताया गया) दिए गए, वे संभवतः राहुल गांधी के कार्यालय से आए थे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि पुलिस जांच का दायरा राहुल गांधी तक भी पहुँच सकता है क्योंकि वे ही इस अभियान के असली सूत्रधार प्रतीत होते हैं।
3. 'विक्टिम कार्ड' और घेराबंदी
जब असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, तो राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इसे "राजनीतिक प्रतिशोध" और "आवाज दबाने की कोशिश" बताया। राहुल गांधी ने इसे इस तरह पेश किया कि बीजेपी उनके नेताओं को इसलिए निशाना बना रही है क्योंकि वे "सच" बोल रहे हैं।
4. चुनावी रणनीति का हिस्सा
असम विधानसभा चुनाव 2026 के ऐन वक्त पर इस विवाद का खड़ा होना बताता है कि यह एक सोची-समझी रणनीति थी। राहुल गांधी चाहते थे कि चुनाव स्थानीय मुद्दों के बजाय सीधे भ्रष्टाचार और 'परिवारवाद' के आरोपों पर लड़ा जाए, ताकि मुख्यमंत्री को रक्षात्मक मुद्रा में लाया जा सके।
हालाँकि, जिस तरह से दस्तावेज़ों में तकनीकी कमियां (जैसे स्पेलिंग मिस्टेक्स और फोटो की हेराफेरी) पकड़ी गईं, उससे यह दांव कांग्रेस पर उल्टा पड़ता दिख रहा है।चुनावों के ठीक पहले इस तरह के गंभीर आरोपों का इतनी जल्दी पलटवार होना और दस्तावेजों में प्रथम दृष्टया गलतियां मिलना, कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
