"उल्टा टांगने" वाले बयान पर तेजस्वी का अमित शाह को जवाब— "दम है तो ट्रंप को जवाब दें"
"उल्टा टांगने" वाले बयान पर तेजस्वी का अमित शाह को जवाब— "दम है तो ट्रंप को जवाब दें"
बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम दौर के प्रचार में भाषा की मर्यादा और व्यक्तिगत हमलों ने राजनीतिक विमर्श को एक नए निचले स्तर पर पहुँचा दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा भ्रष्टाचारियों और घुसपैठियों को "उल्टा टांग कर सीधा कर देने" वाले विवादास्पद बयान पर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने जबरदस्त पलटवार किया है।
तेजस्वी यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में भाषा की मर्यादा को लेकर भी काफी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अमित शाह के बयान को पद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कई बातें कहीं:
तेजस्वी यादव ने कहा कि एक देश के गृहमंत्री के मुंह से इस तरह की भाषा शोभा नहीं देती। उनका तर्क था कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को संयमित और मर्यादित शब्दों का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से "उल्टा टांग देंगे" जैसे शब्दों को "सड़क छाप भाषा" करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शीर्ष नेता अब राजनीतिक विमर्श के स्तर को नीचे गिरा रहे हैं।
तेजस्वी का मानना है कि इस तरह के बयानों का उद्देश्य जनता और विपक्ष के बीच डर का माहौल पैदा करना है, न कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ना।
इस पलटवार के बाद बिहार और बंगाल की राजनीति में वाकयुद्ध काफी तेज हो गया है, जहाँ एक तरफ भाजपा इसे "भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार" बता रही है, वहीं विपक्ष इसे "तानाशाही मानसिकता" कह रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थन में कोलकाता और उत्तर 24 परगना में रोड शो कर रहे तेजस्वी यादव ने अमित शाह की भाषा को "सड़क छाप" करार देते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर घेरा। तेजस्वी यादव ने भट्टपाड़ा और जगतदल में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि एक देश के गृहमंत्री के मुख से "उल्टा टांग देने" जैसे शब्द शोभा नहीं देते। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा:
"यह गृहमंत्री की भाषा नहीं है, यह तो पूरी तरह से 'सड़क छाप' भाषा है। यह बयान भाजपा के भीतर भरे सत्ता के अहंकार और विपक्ष को डराने की उनकी पुरानी मंशा को दर्शाता है।"
ट्रंप के नाम पर घेरा: "विदेशी आलोचनाओं पर क्यों है चुप्पी?"
तेजस्वी ने अमित शाह को चुनौती देते हुए इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता केवल देश के भीतर विपक्षी नेताओं और जनता को डराना जानते हैं। "अगर आपमें (अमित शाह) इतना ही दम है और आप इतने ही ताकतवर हैं, तो डोनाल्ड ट्रंप को जवाब देकर दिखाइए, जो भारत के बारे में विवादित टिप्पणी करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब देश की छवि पर बात आती है, तब आप खामोश क्यों हो जाते हैं?"
मोदी पर प्रहार और जनता का भारी उत्साह
रोड शो के दौरान जब तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और बंगाल के प्रति केंद्र के रवैये पर सवाल उठाए, तो समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। तेजस्वी ने दावा किया कि बंगाल में "मोदी मैजिक" अब खत्म हो चुका है और यहाँ केवल "ममता दीदी का जादू" चलेगा।
| मुख्य बिंदु | तेजस्वी यादव का रुख |
| अमित शाह का बयान | "उल्टा टांगने की धमकी तानाशाही मानसिकता है।" |
| पीएम मोदी का प्रभाव | "बंगाल की जनता बाहरी ताकतों और नफरत की राजनीति को नकार चुकी है।" |
| ममता बनर्जी का समर्थन | "दीदी एक शेरनी की तरह लड़ रही हैं, हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।" |
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के प्रचार के दौरान तेजस्वी यादव का अंदाज़ वाकई काफी चर्चा में है। जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा, तो रैलियों में जबरदस्त भीड़ और उत्साह देखने को मिला।
तेजस्वी यादव ने कोलकाता (जोरासांको) और अन्य क्षेत्रों में ममता बनर्जी के समर्थन में कई रैलियां कीं, जहाँ उनके भाषणों के कुछ मुख्य अंश जो जनता के बीच चर्चा का विषय बने:
तेजस्वी यादव ने ममता बनर्जी की तुलना 'शेरनी' से की और कहा कि पूरी केंद्र सरकार, ईडी (ED), सीबीआई (CBI) और पूरा तंत्र एक महिला को हराने में लगा है, लेकिन वे सफल नहीं होंगे। इस बात पर भीड़ ने खूब तालियां बजाईं। उन्होंने साफ कहा कि बिहार की तरह बंगाल में भी भाजपा की "नकारात्मक राजनीति" को जनता स्वीकार नहीं करेगी। तेजस्वी ने जोर देकर कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह चाहे जितनी ताकत लगा लें, बंगाल की जनता अपनी 'अस्मिता' से समझौता नहीं करेगी।
कोलकाता जैसे शहरों में बड़ी संख्या में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग रहते हैं। तेजस्वी ने उनसे सीधे संवाद किया और कहा कि भाजपा सिर्फ धर्म और डर के नाम पर वोट मांगती है, जबकि विकास के मुद्दे पर वे चुप रहते हैं।
लोगों में उत्साह की वजह
तेजस्वी यादव को एक उभरते हुए युवा नेता के रूप में देखा जा रहा है, जो सीधे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछते हैं। बंगाल में रहने वाले हिंदी भाषियों (विशेषकर बिहार के लोगों) के बीच तेजस्वी की अपनी एक अलग लोकप्रियता है, जिससे वे टीएमसी के पक्ष में माहौल बनाने में सफल दिखे। जहाँ उन्होंने अमित शाह की भाषा को "सड़क छाप" बताया, वहीं अपने भाषणों में उन्होंने मोदी सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया, जिसे जनता ने खूब सराहा।
नोटः विपक्ष के बड़े नेताओं (जैसे अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव) का ममता बनर्जी के साथ मंच साझा करना इस चुनाव को काफी दिलचस्प बना रहा है।
