मतदान से ठीक पहले राहुल गांधी ने ममता बनर्जी और टीएमसी पर किया तीखा हमला।।

मतदान से ठीक पहले राहुल गांधी ने ममता बनर्जी और टीएमसी पर किया तीखा हमला।।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान (23 अप्रैल 2026) से ठीक पहले राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश जारी कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी पर तीखा हमला बोला है।

 राहुल गांधी ने सीधे तौर पर कहा कि "अगर ममता जी ने एक साफ-सुथरी सरकार चलाई होती और बंगाल का ध्रुवीकरण (polarisation) नहीं किया होता, तो बीजेपी को राज्य में कदम रखने की जगह ही नहीं मिलती। उन्होंने टीएमसी पर आरोप लगाया कि उनके शासन में भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी बढ़ी है, जिससे जनता परेशान है।

हालाँकि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और टीएमसी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन का हिस्सा रहे हैं, लेकिन बंगाल में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ रही है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि बंगाल में "विचारधारा की लड़ाई" केवल कांग्रेस ही जीत सकती है।

 दिलचस्प बात यह रही कि राहुल गांधी के इस बयान के बाद बंगाल बीजेपी ने उनके वीडियो का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर साझा करते हुए उन्हें "सच्चाई बोलने के लिए धन्यवाद" भी दिया।

यह बयान रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मतदान से ऐन पहले इस तरह की आलोचना से टीएमसी और कांग्रेस के बीच जमीनी स्तर पर तल्खी और बढ़ गई है। टीएमसी ने भी इस पर पलटवार करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

राहुल गांधी ऐसी राजनीतिक दिल्ली विधान सभा चुनाव में आप के साथ, मध्यप्रदेश विधान सभा चुनाव में सपा के साथ और बिहार विधान सभा चुनाव में आरजेडी के साथ कर चुके है

राहुल गांधी और कांग्रेस की इस कार्यशैली को "रणनीतिक स्वायत्तता" या कभी-कभी "दोहरी राजनीति" के रूप में देखा जाता है, जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन होने के बावजूद राज्यों में वे एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होते हैं।

यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं:


1. दिल्ली (2025 विधानसभा चुनाव) - 'आप' के खिलाफ मोर्चा

राष्ट्रीय स्तर पर 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक में होने के बावजूद, जनवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने अरविंद केजरीवाल की सरकार पर तीखे हमले किए थे। उन्होंने केजरीवाल की तुलना प्रधानमंत्री मोदी से करते हुए कहा कि दोनों ही जनता को गुमराह कर रहे हैं। कांग्रेस ने दिल्ली में अलग चुनाव लड़ा, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला और बीजेपी 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में लौटी।

2. मध्य प्रदेश (2023 विधानसभा चुनाव) - सपा से तकरार

2023 के मध्य प्रदेश विधान सभा चुनावों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर भारी विवाद हुआ था।राहुल गांधी और कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस ने सपा को सीटें देने से इनकार कर दिया था। उस समय अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर "विश्वासघात" का आरोप लगाया था। वोट बँटने के कारण विपक्षी एकता कमजोर हुई और बीजेपी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की।

3. बिहार (2025 विधानसभा चुनाव) - आरजेडी के साथ अनबन

हाल ही में नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में भी ऐसी ही स्थिति देखी गई। तेजस्वी यादव की सक्रियता के मुकाबले राहुल गांधी की उपस्थिति कम रही और कांग्रेस को गठबंधन की "कमजोर कड़ी" (liability) माना गया। तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा कांग्रेस ने बहुद देर से किया और विवादित बना दिया। जिसका सीधा-सीधा नुकसान तेजस्वी को उठानी पङी । हार के बाद राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिए थे, जिसे सहयोगियों ने हार छिपाने का बहाना बताया।


ऐसा क्यों होता है?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  1. वजूद की लड़ाई: कांग्रेस को डर है कि अगर वह राज्यों में क्षेत्रीय दलों (जैसे आरजेडी, टीएमसी या आप) के सामने पूरी तरह झुक गई, तो उन राज्यों में पार्टी का आधार खत्म हो जाएगा।

  2. वोट बैंक का टकराव: अक्सर कांग्रेस और इन क्षेत्रीय दलों का 'वोट बैंक' (जैसे मुस्लिम या दलित वोट) एक ही होता है, इसलिए वे एक-दूसरे को ही सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानते हैं।

  3. कार्यकर्ता दबाव: स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के लिए शीर्ष नेतृत्व को क्षेत्रीय दलों के खिलाफ बोलना पड़ता है।

निष्कर्ष: ममता बनर्जी के मामले में भी यही हो रहा है। कांग्रेस को लगता है कि बंगाल में टीएमसी के भ्रष्टाचार के खिलाफ न बोलने से बचा-कुचा 'वामपंथी-कांग्रेस' वोट भी बीजेपी की ओर चला जाएगा। इसी "बैलेंसिंग एक्ट" के चक्कर में अक्सर गठबंधन के भीतर ही विरोधाभास पैदा हो जाता है।

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