संसद में ऐतिहासिक गतिरोध: 850 सीटों वाला 'परिसीमन विधेयक' ध्वस्त, पीएम मोदी ने विपक्ष पर बोला तीखा हमला||


संसद में ऐतिहासिक गतिरोध: 850 सीटों वाला 'परिसीमन विधेयक' ध्वस्त, पीएम मोदी ने विपक्ष पर बोला तीखा हमला||

​नई दिल्ली | 20 अप्रैल, 2026

​संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के गिरने के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करना था।

आंकड़ों का खेल: क्यों गिरा बिल?

​शुक्रवार को हुए मतदान में सदन में कुल 528 सदस्य उपस्थित थे।
​पक्ष में: 298 मत
​विरोध में: 230 मत

​संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार, किसी भी संशोधन को पारित करने के लिए उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होती है। इस बिल को पास कराने के लिए सरकार को 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन वह जादुई आंकड़े से 54 वोट पीछे रह गई। परिणाम घोषित होते ही विपक्षी खेमे में भारी उत्साह देखा गया, वहीं सत्ता पक्ष में सन्नाटा पसर गया।

प्रधानमंत्री मोदी का 'आगबबूला' अवतार: " विपक्ष पर जमकर बरशे "

​बिल गिरने के अगले ही दिन राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष पर जमकर बरसे। उन्होंने विपक्षी दलों के व्यवहार पर गहरी नाराजगी जताते हुए इसे 'लोकतंत्र की काली घड़ी' करार दिया।
​पीएम ने कहा, "मैं देश की माताओं और बहनों से माफी मांगता हूं कि हमारी तमाम कोशिशों के बावजूद विपक्ष की स्वार्थी राजनीति ने उनके सपनों को कुचल दिया है। लेकिन याद रखना, देश की बेटियां इस अपमान को कभी नहीं भूलेंगी।"

राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए हैं।

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के गिरने के बाद राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए हैं। विपक्ष ने इसे महिला आरक्षण के नाम पर देश के लोकतांत्रिक और संघीय ढांचे (Federal Structure) से खिलवाड़ बताया।

​विपक्ष के उन आरोपों को पीएम ने खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि सीटों के बढ़ने से दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार सभी राज्यों की सीटों को समान अनुपात में बढ़ाना चाहती थी।

​कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों का तर्क है कि: सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करके उत्तर भारत के हिंदी भाषी राज्यों को अधिक फायदा पहुँचाना चाहती थी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर सरकार लोकसभा की संरचना को पूरी तरह बदलना चाहती थी, जिससे संघीय ढांचा खतरे में पड़ सकता था।

राहुल गांधी: "यह चुनावी नक्शा बदलने की साज़िश है"

​लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस विधेयक को 'देश विरोधी कृत्य' (Anti-national act) तक करार दिया। उनके मुख्य तर्क इस प्रकार थे:

​जादूगर का खेल: राहुल गांधी ने मोदी सरकार की तुलना एक 'जादूगर' से की, जो दिखा कुछ और रहा है और कर कुछ और रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण का लालच दिखाकर असल में देश का चुनावी नक्शा बदलना चाहती है।

​राज्यों के साथ अन्याय: उन्होंने आरोप लगाया कि सीटों को 850 करने का मकसद दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों की आवाज को दबाना है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और विकास में अच्छा काम किया, उन्हें सजा दी जा रही है, जबकि उत्तर भारत के राज्यों की सीटें बढ़ाकर बीजेपी अपना बहुमत सुरक्षित करना चाहती है।

​जाति जनगणना की मांग: राहुल ने फिर से दोहराया कि बिना ओबीसी (OBC) कोटा और जाति जनगणना के यह बिल अधूरा है। उन्होंने इसे सरकार की 'पैनिक रिएक्शन' (घबराहट में उठाया गया कदम) बताया।

अखिलेश यादव: "यह शकुनी चाल और भ्रष्ट इरादा है"

​समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बिल को 'अन्यायपूर्ण' बताते हुए सरकार पर तीखा हमला किया:

​गुप्त एजेंडा: अखिलेश यादव ने इसे सरकार की 'गुप्त योजना' (Clandestine scheme) बताया। उन्होंने कहा कि परिसीमन का यह तरीका पारदर्शी नहीं है और यह केवल एक राजनीतिक दल को फायदा पहुँचाने के लिए बनाया गया है।

​हक छीनने की कोशिश: उन्होंने सदन में कहा कि सीटों का बंटवारा अनुचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार 'आधी आबादी' में मुस्लिम महिलाओं और पिछड़ों को गिन भी रही है या नहीं? उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण का आधार जनसंख्या होनी चाहिए और सरकार डेटा के साथ हेरफेर कर रही है।

​अहंकार की हार: बिल गिरने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह "मोदी जी के अहंकार की हार" है। उन्होंने इसे संविधान को बचाने वाली जीत बताया।

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