भारत और कनाडा के संबंधों में आया एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

भारत और कनाडा के संबंधों में आया एक महत्वपूर्ण मोड़ है। 

कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) की 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को पूरी तरह से "नवीनीकृत" (Renewed) करने की घोषणा की है। यह भारत और कनाडा के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। 

​प्रधानमंत्री मोदी और पीएम कार्नी ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुँचाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। वर्तमान में यह लगभग 13-23 बिलियन डॉलर के आसपास है।

​दोनों देशों ने CEPA के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य इस साल के अंत तक एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को अंतिम रूप देना है, जिससे माल (Goods) और सेवाओं (Services) के व्यापार में आने वाली बाधाएं कम होंगी।

​भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए दोनों देशों ने 2.6 बिलियन डॉलर के यूरेनियम आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कनाडाई कंपनी 'कैमेको' (Cameco) 2027 से 2035 के बीच भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करेगी।

लिथियम और अन्य खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए सहयोग पर सहमति बनी। स्वच्छ ऊर्जा और स्टोरेज तकनीक के लिए नए एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। दोनों नेताओं ने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने का फैसला किया।

वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए, दोनों देशों ने 'विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला' विकसित करने पर जोर दिया है। इसका मतलब है कि भविष्य में सेमीकंडक्टर और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी पुर्जों के लिए भारत और कनाडा एक-दूसरे पर निर्भरता बढ़ाएंगे।

पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बाद, इस वार्ता को एक 'रीसेट' (Reset) के रूप में देखा जा रहा है। दोनों नेताओं ने शांतिपूर्ण संवाद और आपसी संप्रभुता के सम्मान के साथ आर्थिक प्रगति को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई है।

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