अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान चला रहे हैं- युद्ध की स्थिति काफी गंभीर ।।
अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान चला रहे हैं- युद्ध की स्थिति काफी गंभीर ।।
अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान चला रहे हैं। इस युद्ध की स्थिति काफी गंभीर हो चुकी है और अमेरिका इसमें सीधे तौर पर शामिल है। इजराइल और ईरान के बीच चल रहे इस तनावपूर्ण संघर्ष में अमेरिका की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण और सक्रिय है। वर्तमान स्थिति (मार्च 2026) के अनुसार, अमेरिका न केवल इजराइल का समर्थन कर रहा है, बल्कि सीधे सैन्य कार्यवाही में भी शामिल है।
अमेरिका की इस युद्ध में भूमिका के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' (Operation Epic Fury)
अमेरिका ने इस सैन्य अभियान को 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' का नाम दिया है, जबकि इजराइल इसे 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' कह रहा है। यह हमला 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था।
2. अमेरिकी सेना की सीधी भागीदारी
हवाई हमले: अमेरिकी वायु सेना और बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स (B-2 stealth bombers) ईरान के मिसाइल ठिकानों, परमाणु केंद्रों और सैन्य बुनियादी ढांचों पर भारी बमबारी कर रहे हैं।
नौसैनिक शक्ति: अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर (USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford) तैनात किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के कई युद्धपोत नष्ट हो चुके हैं।
नुकसान: इस युद्ध में अब तक अमेरिका के 6 सैन्य कर्मियों के मारे जाने और कई के घायल होने की खबर है।
3. युद्ध के मुख्य उद्देश्य
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस युद्ध के तीन प्रमुख लक्ष्य बताए हैं:
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करना।
ईरान की मिसाइल और सैन्य क्षमता को खत्म करना।
ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) लाना।
4. वर्तमान स्थिति (4 मार्च 2026)
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने की खबरें हैं, जिसके बाद ईरान नए नेतृत्व की तलाश कर रहा है।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कुवैत और यूएई जैसे देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और दूतावासों पर ड्रोन हमले किए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है।
यहाँ अमेरिका की भागीदारी के मुख्य पहलू :
1. सैन्य भागीदारी (Military Involvement)
अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को युद्ध के स्तर तक बढ़ा दिया है:
हवाई हमले: अमेरिकी वायु सेना (US Air Force) ईरान के मिसाइल लॉन्च पैड्स, ड्रोन निर्माण केंद्रों और परमाणु ठिकानों पर सटीक हमले कर रही है। इसमें बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स (B-2 Stealth Bombers) जैसे आधुनिक विमानों का उपयोग किया जा रहा है।
नौसैनिक शक्ति: खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका ने अपने दो प्रमुख विमान वाहक पोत (Aircraft Carriers)— USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford—को तैनात किया है, ताकि ईरान की नौसेना पर दबाव बनाया जा सके।
मिसाइल रक्षा प्रणाली: अमेरिका ने इजराइल की सुरक्षा के लिए अपनी THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) प्रणाली और अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरियां तैनात की हैं ताकि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किया जा सके।
2. रणनीतिक लक्ष्य (Strategic Goals)
अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट किया है कि उनकी भागीदारी के तीन मुख्य उद्देश्य हैं:
परमाणु कार्यक्रम को रोकना: ईरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह से पंगु बनाना।
इजराइल की रक्षा: अपने सबसे करीबी सहयोगी इजराइल पर होने वाले किसी भी बड़े हमले को रोकना।
क्षेत्रीय स्थिरता: हालांकि यह एक युद्ध है, लेकिन अमेरिका का तर्क है कि वह ईरान के प्रभाव (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों का समर्थन) को खत्म कर लंबे समय के लिए शांति चाहता है।
3. आर्थिक और कूटनीतिक दबाव
कड़े प्रतिबंध: अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात और वित्तीय क्षेत्र पर अब तक के सबसे सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं ताकि ईरान के पास युद्ध लड़ने के लिए संसाधनों की कमी हो जाए।
गठबंधन का नेतृत्व: अमेरिका ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि ईरान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग किया जा सके।
4. युद्ध का वर्तमान प्रभाव
तेल की कीमतें: अमेरिका की इस सक्रिय भागीदारी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।
ईरान ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों (जैसे इराक और सीरिया में) पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जिससे अमेरिकी सेना को भी कुछ नुकसान उठाना पड़ा है।
