प्रधानमंत्री मोदी ने की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक; ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश- पश्चिम एशिया संकट ।।
प्रधानमंत्री मोदी ने की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक; ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश- पश्चिम एशिया संकट ।।
नई दिल्ली | 22 मार्च, 2026:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का आयोजन पश्चिम एशिया (West Asia) के बदलते हालातों को देखते हुए किया गया है। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर था कि इन अंतरराष्ट्रीय स्थितियों का भारत के प्रमुख क्षेत्रों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
बैठक में विशेष रूप से इन पांच क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया गया:
पेट्रोलियम (Petroleum)
कच्चा तेल (Crude Oil)
गैस (Gas)
बिजली (Power)
उर्वरक (Fertiliser)।
पश्चिम एशिया में तनाव अक्सर वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) को प्रभावित करता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और उर्वरकों के लिए इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है, इसलिए यह समीक्षा बैठक भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी का हिस्सा है।
बैठक में प्रधानमंत्री के साथ केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल रहे हैं, जो इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है जो सरकार द्वारा वैश्विक भू-राजनीतिक (geopolitical) अस्थिरता के बीच देश की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया एक सक्रिय कदम है।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण भारत की अर्थव्यवस्था और अनिवार्य क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन करना और उनसे निपटने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था।
बैठक में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से पांच महत्वपूर्ण क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की तैयारियों का जायजा लिया:
पेट्रोलियम और कच्चा तेल (Crude Oil): वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) में आने वाली बाधाओं पर चर्चा हुई।
प्राकृतिक गैस (Gas): घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बिजली (Power): गर्मियों के आगामी मौसम को देखते हुए बिजली की बढ़ती मांग और ऊर्जा उत्पादन के संसाधनों की समीक्षा की गई।
उर्वरक (Fertiliser): कृषि क्षेत्र पर संकट का असर न पड़े, इसके लिए उर्वरकों के स्टॉक और उनके आयात के वैकल्पिक रास्तों पर विचार किया गया।
बैठक के मुख्य निर्णय और निर्देश इस प्रकार के रहे;
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों और संबंधित मंत्रालयों को स्पष्ट निर्देश दिए कि देश के भीतर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।
निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना: सरकार का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध जैसी स्थितियों के बावजूद भारत में ईंधन और ऊर्जा की कमी न हो।
लॉजिस्टिक्स और वितरण: प्रधानमंत्री ने वितरण नेटवर्क को मजबूत करने और लॉजिस्टिक्स में आने वाली किसी भी रुकावट को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए।
उपभोक्ता हितों की रक्षा: वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों का बोझ आम जनता और उद्योगों पर कम से कम पड़े, इसके लिए विभिन्न वित्तीय और रणनीतिक विकल्पों पर चर्चा की गई।
अग्रिम योजना (Proactive Measures): पश्चिम एशिया से आयात होने वाली वस्तुओं के लिए 'प्लान-बी' के रूप में अन्य देशों से आयात के विकल्पों को तलाशने पर भी बात हुई।
निष्कर्ष:
इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और संबंधित मंत्रालयों के सचिव शामिल थे। सरकार की यह सक्रियता दर्शाती है कि वह वैश्विक संकटों से देश की आर्थिक सुरक्षा को कवच प्रदान करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
