झारखंड राज्यसभा चुनाव: 'इंडिया' गठबंधन में रार, कांग्रेस और आरजेडी आमने-सामने।।

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झारखंड राज्यसभा चुनाव: 'इंडिया' गठबंधन में रार, कांग्रेस और आरजेडी आमने-सामने।। ​रांची/नई दिल्ली/N5: झारखंड में हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के भीतर की अंदरूनी कलह को पूरी तरह से सतह पर ला दिया है। संख्या बल के हिसाब से सुरक्षित मानी जा रही सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद, गठबंधन के दो बड़े घटक दलों—कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD)—के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। ​इस राजनीतिक घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने दावा किया है कि 'इंडिया' गठबंधन अब केवल कागजों पर रह गया है और पूरी तरह टूट चुका है। ​खबर ये है कि हार के बाद अपनों पर ही बरसी कांग्रेस: ​चुनाव परिणाम सामने आते ही कांग्रेस खेमे में भारी असंतोष देखा जा रहा है। झारखंड कांग्रेस के प्रभारियों और नेताओं ने सहयोगी दल आरजेडी और वामपंथी दलों पर "भरोसातोड़ने" और भीतरघात करने का सीधा आरोप लगाया है।  कांग्रेस नेताओं का गुस्सा आरजेडी पर इस कदर फूटा है, जिसकी तुलना राजनीतिक विश्लेषक पूर्व के विध...

नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने राजनीतिक में प्रवेश कर गए और उन्होंने जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली।।

नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने राजनीतिक में प्रवेश कर गए और उन्होंने जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली।। 

नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार राजनीतिक में प्रवेश कर गए। जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली। इनका सीधा मुकाबला तेजस्वी यादव से होगा जो पिछले कई सालों से राजनीतिक में हैं। 

तेजस्वी यादव पिछले कई चुनावों से गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं और उनकी अपनी एक स्थापित वोट बैंक है। दूसरी ओर, निशांत कुमार अभी राजनीति के 'लर्निंग फेज' में होंगे। उनका सीधा मुकाबला तेजस्वी से होना यह दर्शाता है कि आने वाले समय में बिहार की लड़ाई काफी दिलचस्प और वैचारिक होने वाली है।

बिहार की राजनीति के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ है। नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता लेना और सक्रिय राजनीति में कदम रखना राज्य के भविष्य के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।

अब तक बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव को सबसे प्रमुख युवा चेहरे के रूप में देखा जाता रहा है। निशांत कुमार के आने से मुकाबला अब दो राजनीतिक परिवारों की अगली पीढ़ी के बीच सीधा हो गया है। जहाँ तेजस्वी के पास सालों का सांगठनिक और प्रशासनिक (उपमुख्यमंत्री के तौर पर) अनुभव है, वहीं निशांत के लिए अपनी पहचान बनाना और जदयू के कैडर को एकजुट करना एक बड़ी चुनौती होगी।

लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि निशांत कुमार के लिए बाहरी विरोध (तेजस्वी यादव और अन्य दल) से निपटना शायद फिर भी आसान हो, लेकिन अपने ही 'कुनबे' के भीतर असंतोष को शांत करना उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी। यदि वरिष्ठ नेता केवल 'दबाव' में निशांत को स्वीकार करते हैं, तो वे दिल से उनके लिए काम नहीं करेंगे।

जदयू में ऐसे कई कद्दावर नेता हैं जो दशकों से नीतीश कुमार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। निशांत कुमार के लिए चुनौती यह होगी कि वे इन वरिष्ठ नेताओं को यह विश्वास दिला सकें कि वे केवल "वारिस" नहीं, बल्कि उनके अनुभवों का सम्मान करने वाले एक सहयोगी भी हैं। अगर पुराने नेताओं को लगा कि उनकी अनदेखी हो रही है, तो पार्टी के भीतर असंतोष पनप सकता है।

​एक महत्वपूर्ण बात: तेजस्वी यादव ने भी शुरुआती दिनों में अपनी पार्टी (राजद) के पुराने नेताओं के साथ इसी तरह की चुनौतियों का सामना किया था, जिससे उन्होंने धीरे-धीरे सामंजस्य बिठाया। निशांत के पास समय कम है और उम्मीदें बहुत ज्यादा।



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