पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक दूसरे से भीङ गए हैं बमबारी हो रही है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद पर बम ब्लास्ट ।।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक दूसरे से भीङ गए हैं बमबारी हो रही है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद पर बम ब्लास्ट ।।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक दूसरे से भीङ गए हैं बमबारी हो रही है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद पर बम ब्लास्ट हुए हैं कि ख़बर सामने आई है।
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और पक्तिया जैसे इलाकों में हवाई हमले किए और अफगानिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसमें दोनों पक्षों ने दर्जनों हताहत होने का दावा किया। इसे ‘ओपन वॉर’ नाम दे दिया गया है।
हमलों का सिलसिला (Timeline)
21-22 फरवरी: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खोस्त और पक्तिका प्रांतों में एयर स्ट्राइक की, जिसका मकसद TTP (पाकिस्तानी तालिबान) के ठिकानों को तबाह करना बताया गया। इसमें आम नागरिकों के मारे जाने की भी खबरें आईं।
26 फरवरी: जवाब में तालिबान (अफगान सेना) ने सीमा पर पाकिस्तानी चौकियों पर भारी गोलाबारी की और दावा किया कि उन्होंने कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और कुछ चौकियों पर कब्जा कर लिया।
27 फरवरी: पाकिस्तान ने काबुल सहित बड़े शहरों पर बमबारी करके इस हमले का कड़ा जवाब दिया। ख़बर ये भी है कि अफगानिस्तान ने भी इस्लामाबाद पर एयर स्ट्राइक बम बारी कर दी है। ये उसी का दृश्य बताया जा रहा है।
विवाद का मुख्य कारण इस प्रकार से सामने आ रहे हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान अपनी ज़मीन पर TTP के आतंकियों को पनाह दे रहा है, जो पाकिस्तान में हमले करते हैं। दोनों देशों के बीच की सीमा को लेकर पुराना विवाद है, जिसे तालिबान सरकार मान्यता नहीं देती है और पाकिस्तान अपना बताता रहता है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच वर्तमान संघर्ष के पीछे मुख्य रूप से आतंकवादी हमलों, सीमा विवाद और आंतरिक राजनीतिक दबाव इस संघर्ष के पीछे मुख्य कारण हैं।
आतंकवादी ठिकाने पाकिस्तान अफगानिस्तान को पाकिस्तानी तालिबान (TTP) और ISIS-K जैसे समूहों के लिए सुरक्षित आश्रय देने का आरोप लगाता है, जो इस्लामाबाद, बाजौर और बनू जैसे इलाकों में हालिया हमलों के लिए जिम्मेदार हैं।
पाकिस्तान ने इन्हें नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’ चलाया। दुर्हद लाइन को अफगानिस्तान अस्वीकार करता है, जिससे सीमा पर चौकियां, बाड़बंदी और चेकपोस्ट्स को लेकर झड़पें होती रहती हैं, जैसे टोर्कहम और स्पिन बोल्डक पर। यह ऐतिहासिक विवाद दोनों देशों के बीच संप्रभुता का मुद्दा बनता है।
पाकिस्तानी सेना ने बताया कि उसके हमलों में 274 तालिबानी लड़ाके मारे गए, 400 से अधिक घायल हुए, साथ ही 12 पाकिस्तानी सैनिक शहीद और 27 घायल। सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने 133 तालिबानी मारे जाने का दावा किया।
अफगानिस्तान के दावेतालिबान ने कहा कि उसके जवाबी हमलों में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जिनमें से 23 शव अफगानिस्तान ले जाए गए। अफगान पक्ष ने 8 सैनिक शहीद, 11 घायल और 13 नागरिक घायल होने का उल्लेख किया।
अन्य रिपोर्ट्ससंयुक्त राष्ट्र ने पूर्व हमलों में 13 नागरिक मारे जाने की पुष्टि की। खोस्त और पक्तिका में 19 मारे गए, 26 घायल। कुल मिलाकर विवादित आंकड़े 300-500 हताहत दर्शाते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष को रोकने के लिए मुख्य रूप से कूटनीतिक अपीलें और मध्यस्थता की पेशकश की है। पड़ोसी देशों की भूमिकाचीन, रूस और ईरान ने दोनों देशों से फायरिंग रोकने और बातचीत शुरू करने की अपील की, साथ ही मध्यस्थता की पेशकश की। तुर्की ने भी संयम बरतने का आग्रह किया।
संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रियायूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने स्थिति पर नजर रखने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की सलाह दी। मलेशिया के प्रधानमंत्री ने भी चिंता जताई। अन्य प्रयासअभी तक कोई औपचारिक शांति सम्मेलन या सैन्य हस्तक्षेप नहीं हुआ, लेकिन डिप्लोमैटिक चैनलों को सक्रिय करने की कोशिश जारी है। प्रभाव सीमित दिख रहा है।
अमेरिका ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष पर पाकिस्तान के पक्ष में प्रतिक्रिया दी है। आधिकारिक बयानअमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया, खासकर तालिबान हमलों के खिलाफ।
अंडर सेक्रेटरी एलिसन एम. हूकर ने पाकिस्तानी विदेश सचिव से बात कर संवेदना जताई। डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की प्रशंसा की। उन्होंने जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप की बात कही।अमेरिका स्थिति पर नजर रख रहा है, लेकिन तत्काल सैन्य हस्तक्षेप या फायरिंग रोकने की अपील नहीं की। यह पाकिस्तान को रणनीतिक समर्थन दर्शाता है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष के वैश्विक प्रभाव मुख्य रूप से क्षेत्रीय अस्थिरता, शरणार्थी संकट और कूटनीतिक तनाव तक सीमित दिखते हैं। यह संघर्ष TTP और ISIS-K जैसे आतंवादी समूहों को मजबूत कर सकता है, जिससे मध्य एशिया, भारत और ईरान प्रभावित होंगे।
अमेरिका ने पाकिस्तान के बचाव का अधिकार माना है, जबकि चीन और रूस चुप्पी साधे हैं। तेल की कीमतों पर सीधा प्रभाव कम है क्योंकि अफगानिस्तान तेल उत्पादक नहीं, लेकिन व्यापार मार्गों पर असर पड़ सकता है। शरणार्थी बहाव से पड़ोसी देशों में मानवीय संकट बढ़ेगा।
संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय शक्तियां संवाद की अपील कर रही हैं, लेकिन कोई बड़ा गठबंधन नहीं बना। कुल मिलाकर, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीमित प्रभाव पङेगा।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक तौर पर कहा कि “अब हमारे बीच खुली जंग है धैर्य खत्म हो गया है।“ इस बयान से अनुमान लगाए जा सकते हैं कि स्थिति किस प्रकार के हो गए हैं।
