मुंबई की सड़कों पर उतरा जनसैलाब: राज और उद्धव ठाकरे ने मिलाया हाथ।
विशेष संवाददाता, मुंबई
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से राजनीतिक गरमाई गई है। महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक और तीखा मोड़ देखने को मिला है। मुंबई की सड़कों पर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया में कथित धांधली के खिलाफ एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस महा-विरोध प्रदर्शन की सबसे खास और चौंकाने वाली बात यह रही कि मनसे (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए एक साथ मंच साझा किया। दोनों ठाकरे भाइयों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व किया।
"वोट चोरी करने वालों को मिलेगी सजा" — जनसभा में गूंजी हुंकार
विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं का आक्रोश साफ नजर आया। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स और नारों के जरिए नेताओं ने सीधा हमला बोलते हुए कहा, "देश अपने अधिकारों पर पड़ रहे डाके के खिलाफ खड़ा हो गया है। वोट हमारा अधिकार है—वोट की चोरी करने वालों को जाना भी पड़ेगा और सजा भी मिलेगी..."। जनसैलाब में तिरंगे और पार्टी के झंडे लहराते कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनावी प्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
SIR और मतदाता सूची में धांधली पर घिरे मुख्य चुनाव आयुक्त
विरोध मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों और नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए। विशेष रूप से मतदाता सूची के SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण/Special Intensive Revision) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आड़े हाथों लिया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है और जनता के मताधिकार के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसी के विरोध में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग बुलंद की।
संपूर्ण विपक्ष एकजुट, महायुति सरकार पर बढ़ाया दबाव
इस संयुक्त प्रदर्शन को केवल ठाकरे भाइयों का ही नहीं, बल्कि समूचे विपक्षी खेमे का भी भारी समर्थन मिला। कांग्रेस और एनसीपी (शरद चंद्र पवार) समेत कई प्रमुख विपक्षी दलों के बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर इस महामोर्चे में शिरकत की।
मुंबई की सड़कों पर उमड़े इस भारी हुजूम और ठाकरे भाइयों के एक साथ आने से राज्य का राजनीतिक पारा चरम पर पहुंच गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग और मतदाता सूचियों को लेकर उपजा यह जनआक्रोश आने वाले चुनावों में एक नया और निर्णायक रुख मोड़ सकता है।
(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
