पटना की राजनीति में भूचाल: जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह का तीखा हमला, कहा— "जनता तय करेगी, नीतीश कुमार के जाने से पार्टी समाप्त"
शैलेन्द्र कुमार,
पटना / बिहार:
बिहार की सियासत में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। हाल ही में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से निष्कासन की कार्रवाई का सामना करने वाले मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ तीखे तेवर अपनाए हैं। जेडीयू से बाहर किए जाने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए अनंत सिंह ने कई ऐसे बयान दिए हैं, जो बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। उनके इस आक्रामक रुख से राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
"जनता ही सब तय करेगी, खाता नहीं खुलेगा"
मीडिया से बात करते हुए मोकामा विधायक अनंत सिंह ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि जनता सब देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब जनता ही देगी। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा राजनीतिक हालात में जनता उनका पूरा समर्थन करेगी और विरोधियों का खाता भी नहीं खुलेगा। अनंत सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके लिए जनता ही सर्वोपरि है और वही उनके लिए भगवान का रूप है।
"नीतीश कुमार भगवान थे, उनके जाने से पार्टी खत्म"
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए और अपने पुराने दिनों को याद करते हुए अनंत सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार की वजह से ही पार्टी इतने दिनों तक चल पाई थी, वे उनके लिए भगवान की तरह थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उनका तंज कसते हुए कहना था कि नीतीश कुमार के पार्टी से अलग होने या कमजोर होने के बाद जेडीयू का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है।
"मैंने हमेशा साथ दिया, सबसे बड़ी कुर्बानी दी"
अनंत सिंह ने अपनी निष्ठा और वफादारी का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी और नेतृत्व का साथ निभाया है। उन्होंने दावा किया कि जितना त्याग और जितनी कुर्बानियां उन्होंने पार्टी के लिए दी हैं, उतनी किसी अन्य नेता ने नहीं दी होगी। इसके बावजूद उन्हें बाहर का रास्ता दिखाए जाने से वे खासे आहत और गुस्से में नजर आए। उनका आरोप है कि पार्टी के भीतर उनके योगदान को नजरअंदाज किया गया है, जबकि उन्होंने हर मुश्किल वक्त में साथ खड़े रहने का काम किया है।
"सरकार गिराने और बचाने के दावों पर सवाल"
अपने तीखे बयानों को आगे बढ़ाते हुए अनंत सिंह ने बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिरता पर भी बड़े सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि हालिया दौर में भी सरकार गिरने की कगार पर पहुंच गई थी। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि कोई यह बताए और पूछे कि आखिरकार इस संकट के समय सरकार को किसने बचाया था? उनके इस इशारे ने राजनीतिक विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पर्दे के पीछे सत्ता को बचाने में उनकी या उनके समर्थकों की कोई बड़ी भूमिका रही थी।
राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज
अनंत सिंह के इस बयानों के सामने आने के बाद से बिहार की राजधानी पटना से लेकर मोकामा तक राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है। जेडीयू नेतृत्व ने भले ही अनुशासनहीनता या अन्य कारणों से उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया हो, लेकिन अनंत सिंह का यह तेवर बताता है कि वह इतनी आसानी से खामोश बैठने वाले नहीं हैं। आने वाले दिनों में मोकामा के विधायक का यह कदम बिहार के राजनीतिक समीकरणों को किस दिशा में ले जाता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने राज्य की पार्टियों के बीच जुबानी जंग को और अधिक तेज कर दिया है।
