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PM मोदी के जन्मदिन पर बिहार में उत्सव सा माहौल: याद आया इतिहास का वो पन्ना चलिए जानते हैं।


PM मोदी के जन्मदिन पर बिहार में उत्सव सा माहौल: याद आया इतिहास का वह पन्ना चलिए जानते हैं।
पटना।सिवान।सहरसा।N5: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर पूरे बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं, नेताओं और प्रशंसकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। राज्यभर में इस दिन को 'सेवा और संकल्प दिवस' के रूप में धूमधाम से मनाया जा रहा है। ये तस्वीर प्रधान मंत्री माननिय नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के पटना की है कि दीपक जलाने की तैयारी की जा रही है। दीपक जलाने के लेवल को दिपावली से उपर ले जाने का प्रयास है। सहरसा में तो मोदीभक्तों ने हवन भी किया।
पटना में दीपावली की तर्ज पर दीप जलाकर भव्य तैयारी
राजधानी पटना की सड़कों, गोलंबरों और प्रमुख स्थलों को विशेष रोशनी और भगवा झालरों से सजाया गया है। सड़कों के किनारे विशेष कटआउट, लाइट्स और सजावटी कपड़े लगाए गए हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से शाम को हजारों दीये जलाकर एक भव्य दीपोत्सव मनाने का संकल्प लिया गया है। इस दौरान कार्यकर्ताओं और मोदी समर्थकों में गजब का उत्साह दिख रहा है और दीये जलाने की तैयारियों का पैमाना किसी दीपावली उत्सव से कम नज़र नहीं आ रहा है। इसके साथ ही गंगा तटों (जैसे कालीघाट) पर कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी के कटआउट का दूध से अभिषेक कर उनकी लंबी उम्र की कामना की।
सिवान और सहरसा में हवन व विशेष अनुष्ठान
प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों की होड़ मची है:
• सिवान: सिवान में भाजपा के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक भव्य हवन कार्यक्रम आयोजित किया। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के साथ आयोजित इस हवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु जीवन और देश की निरंतर प्रगति व खुशहाली की प्रार्थना की गई।
• सहरसा: सहरसा में भी 'मोदीभक्तों' और स्थानीय समर्थकों द्वारा मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और हवन यज्ञ किया गया। समर्थकों ने यज्ञ की आहुति देकर देश के विकास में प्रधानमंत्री के योगदान की सराहना की और ईश्वर से उनके दीर्घायु होने का आशीर्वाद मांगा।
याद आया इतिहास का वह पन्ना चलिए जानते हैं
ऐसे ही धूम-धाम के साथ पटना को सजाया गया था। जब भारत पर अंग्रेजी शासन थे।उस समय बिहार बाढ़ के प्रभाव से कराह रहा था और पटना को अंग्रेजी शासन महारानी का भव्य स्वागत के लिए सजा दिया गया था । इस इतिहास का पन्ना को आप जानते हैं?
मेरे द्वारा इंगित यह घटना भारत के औपनिवेशिक इतिहास के उस दौर की याद दिलाती है जब सत्ता और जनता के बीच की खाई बेहद गहरी थी। हम आपको संभवतः 1874 के बिहार अकाल और बाढ़ के दौर या 1911 के दिल्ली दरबार से पहले के दौर का संदर्भ दे रहे हैं, जब देश या प्रदेश गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा था और सत्तासीन हुक्मरान ज़ाहिरी शान-ओ-शौकत व भव्य स्वागत आयोजनों में व्यस्त थे।
इतिहास का वह काला पन्ना:
• 1873-1874 का बिहार अकाल: 19वीं सदी के उत्तरार्ध (विशेषकर 1873-74) में बिहार के एक बड़े हिस्से में सूखा, बाढ़ और फसल बर्बाद होने के कारण भीषण अकाल पड़ा था। लाखों लोग भुखमरी और महामारी की चपेट में थे।
• शासकों का आडंबर: उस दौरान औपनिवेशिक ब्रिटिश हुकूमत और स्थानीय जमींदार जनता को राहत पहुंचाने के बजाय शाही दौरों, शाही स्वागतों, और सजावट पर पानी की तरह पैसा बहाते थे।
• शाही स्वागत व भव्यता: महारानी विक्टोरिया के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों, प्रिंस ऑफ वेल्स (जो बाद में किंग एडवर्ड सातवें बने) की 1875-76 की भारत यात्रा या 1877 में आयोजित 'दिल्ली दरबार' के समय बिहार व बंगाल की जनता दाने-दाने को मोहताज थी, लेकिन सड़कों पर तोरण द्वार, रोशनी और कालीन बिछाए जा रहे थे।
N5: तुलना की दृष्टि से देखें तो इतिहासकार और साहित्यकार अक्सर इस बात को रेखांकित करते हैं कि कैसे किसी क्षेत्र में जब आम नागरिक प्राकृतिक आपदाओं या विपदाओं से संघर्ष कर रहे होते हैं, तब हुकूमतों द्वारा किया जाने वाला उत्सव या आडंबरपूर्ण प्रदर्शन जनता के दर्द के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है। इतिहास में ऐसी घटनाएं हमेशा जन-आक्रोश और सत्ता के प्रति असंतोष का कारण बनी हैं।

 ( रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क पटना N5)
Shailendra Kumar
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PM मोदी के जन्मदिन पर बिहार में उत्सव सा माहौल: याद आया इतिहास का वो पन्ना चलिए जानते हैं।


PM मोदी के जन्मदिन पर बिहार में उत्सव सा माहौल: याद आया इतिहास का वह पन्ना चलिए जानते हैं।
पटना।सिवान।सहरसा।N5: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर पूरे बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं, नेताओं और प्रशंसकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। राज्यभर में इस दिन को 'सेवा और संकल्प दिवस' के रूप में धूमधाम से मनाया जा रहा है। ये तस्वीर प्रधान मंत्री माननिय नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के पटना की है कि दीपक जलाने की तैयारी की जा रही है। दीपक जलाने के लेवल को दिपावली से उपर ले जाने का प्रयास है। सहरसा में तो मोदीभक्तों ने हवन भी किया।
पटना में दीपावली की तर्ज पर दीप जलाकर भव्य तैयारी
राजधानी पटना की सड़कों, गोलंबरों और प्रमुख स्थलों को विशेष रोशनी और भगवा झालरों से सजाया गया है। सड़कों के किनारे विशेष कटआउट, लाइट्स और सजावटी कपड़े लगाए गए हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से शाम को हजारों दीये जलाकर एक भव्य दीपोत्सव मनाने का संकल्प लिया गया है। इस दौरान कार्यकर्ताओं और मोदी समर्थकों में गजब का उत्साह दिख रहा है और दीये जलाने की तैयारियों का पैमाना किसी दीपावली उत्सव से कम नज़र नहीं आ रहा है। इसके साथ ही गंगा तटों (जैसे कालीघाट) पर कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी के कटआउट का दूध से अभिषेक कर उनकी लंबी उम्र की कामना की।
सिवान और सहरसा में हवन व विशेष अनुष्ठान
प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों की होड़ मची है:
• सिवान: सिवान में भाजपा के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक भव्य हवन कार्यक्रम आयोजित किया। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के साथ आयोजित इस हवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु जीवन और देश की निरंतर प्रगति व खुशहाली की प्रार्थना की गई।
• सहरसा: सहरसा में भी 'मोदीभक्तों' और स्थानीय समर्थकों द्वारा मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और हवन यज्ञ किया गया। समर्थकों ने यज्ञ की आहुति देकर देश के विकास में प्रधानमंत्री के योगदान की सराहना की और ईश्वर से उनके दीर्घायु होने का आशीर्वाद मांगा।
याद आया इतिहास का वह पन्ना चलिए जानते हैं
ऐसे ही धूम-धाम के साथ पटना को सजाया गया था। जब भारत पर अंग्रेजी शासन थे।उस समय बिहार बाढ़ के प्रभाव से कराह रहा था और पटना को अंग्रेजी शासन महारानी का भव्य स्वागत के लिए सजा दिया गया था । इस इतिहास का पन्ना को आप जानते हैं?
मेरे द्वारा इंगित यह घटना भारत के औपनिवेशिक इतिहास के उस दौर की याद दिलाती है जब सत्ता और जनता के बीच की खाई बेहद गहरी थी। हम आपको संभवतः 1874 के बिहार अकाल और बाढ़ के दौर या 1911 के दिल्ली दरबार से पहले के दौर का संदर्भ दे रहे हैं, जब देश या प्रदेश गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा था और सत्तासीन हुक्मरान ज़ाहिरी शान-ओ-शौकत व भव्य स्वागत आयोजनों में व्यस्त थे।
इतिहास का वह काला पन्ना:
• 1873-1874 का बिहार अकाल: 19वीं सदी के उत्तरार्ध (विशेषकर 1873-74) में बिहार के एक बड़े हिस्से में सूखा, बाढ़ और फसल बर्बाद होने के कारण भीषण अकाल पड़ा था। लाखों लोग भुखमरी और महामारी की चपेट में थे।
• शासकों का आडंबर: उस दौरान औपनिवेशिक ब्रिटिश हुकूमत और स्थानीय जमींदार जनता को राहत पहुंचाने के बजाय शाही दौरों, शाही स्वागतों, और सजावट पर पानी की तरह पैसा बहाते थे।
• शाही स्वागत व भव्यता: महारानी विक्टोरिया के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों, प्रिंस ऑफ वेल्स (जो बाद में किंग एडवर्ड सातवें बने) की 1875-76 की भारत यात्रा या 1877 में आयोजित 'दिल्ली दरबार' के समय बिहार व बंगाल की जनता दाने-दाने को मोहताज थी, लेकिन सड़कों पर तोरण द्वार, रोशनी और कालीन बिछाए जा रहे थे।
N5: तुलना की दृष्टि से देखें तो इतिहासकार और साहित्यकार अक्सर इस बात को रेखांकित करते हैं कि कैसे किसी क्षेत्र में जब आम नागरिक प्राकृतिक आपदाओं या विपदाओं से संघर्ष कर रहे होते हैं, तब हुकूमतों द्वारा किया जाने वाला उत्सव या आडंबरपूर्ण प्रदर्शन जनता के दर्द के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है। इतिहास में ऐसी घटनाएं हमेशा जन-आक्रोश और सत्ता के प्रति असंतोष का कारण बनी हैं।

 ( रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क पटना N5)
Shailendra Kumar
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