Skip to main content

मिड-डे मील' का खाना खाते ही दर्जनों मासूम की तबीयत हुई खराब: अस्पताल में भर्ती, सहरसा बिहार

'मिड-डे मील' का खाना खाते ही दर्जनों मासूम की तबीयत हुई खराब: अस्पताल में भर्ती,  सहरसा बिहार

सहरसा/बिहार/N5: बिहार के सहरसा के एक सरकारी स्कूल में बना भोजन के सेवन करने से अनेकों बच्चे बीमार हो गए हैं कि ख़बर है। सहरसा सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आपको बता दूँ कि सरकारी स्कूल में बना भोजन को पहले शिक्षकों को ग्रहण करने होते हैं, उसके बाद बच्चों को खाना दिया जाता है। ये नियम में शामिल है। इसके बाद भी बच्चों का बीमार पङना सिस्टम के लिए बङी चुनौति है। 
यह घटना बनगांव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय वासुदेवा की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल में परोसे गए मिड-डे मील में एक मरी हुई छिपकली पाई गई। इस भोजन को खाने के बाद कई बच्चों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उन्हें पेट दर्द, उल्टी और जी मिचलाने की शिकायतें होने लगीं।

"घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है और यदि लापरवाही पाई जाती है, तो दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
  -जिला शिक्षा पदाधिकारी।"

 

"मिड-डे मील के ठेकेदारों और स्कूल प्रशासन पर लापरवाही के कारण ये घटना घटी है। बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस उपायों किए जाए। 
             - अभिभावक। "

फिर क्या हुआ?
मिड-डे मील' का खाना खाते हीं कुछ हीं देर में बच्चों की ओर से  पेट दर्द, उल्टी और जी मिचलाने की शिकायतें होने शुरू हो गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, स्कूल प्रशासन ने तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर बच्चों को तुरंत सहरसा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
मामला तो नियंत्रित है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि नियमों के अनुसार, बच्चों को भोजन परोसने से पहले शिक्षकों को उसे चखना और उसकी गुणवत्ता की पुष्टि करनी अनिवार्य है। इन नियमों के बावजूद ऐसी घटना होना, सिस्टम की बड़ी लापरवाही और विफलता को उजागर करता है।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जाँच के आदेश दिए हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा है कि घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है और यदि लापरवाही पाई जाती है, तो दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, अभिभावकों और स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। वे मिड-डे मील के ठेकेदारों और स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस उपायों की माँग कर रहे हैं।
यह घटना मिड-डे मील योजना के कार्यान्वयन और निगरानी में सुधार की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
 अस्पताल से । Watch 👇
 (रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क सहरसा पटना N5) 
Shailendra Kumar
Follow: Facebook

मिड-डे मील' का खाना खाते ही दर्जनों मासूम की तबीयत हुई खराब: अस्पताल में भर्ती, सहरसा बिहार

'मिड-डे मील' का खाना खाते ही दर्जनों मासूम की तबीयत हुई खराब: अस्पताल में भर्ती,  सहरसा बिहार

सहरसा/बिहार/N5: बिहार के सहरसा के एक सरकारी स्कूल में बना भोजन के सेवन करने से अनेकों बच्चे बीमार हो गए हैं कि ख़बर है। सहरसा सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आपको बता दूँ कि सरकारी स्कूल में बना भोजन को पहले शिक्षकों को ग्रहण करने होते हैं, उसके बाद बच्चों को खाना दिया जाता है। ये नियम में शामिल है। इसके बाद भी बच्चों का बीमार पङना सिस्टम के लिए बङी चुनौति है। 
यह घटना बनगांव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय वासुदेवा की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल में परोसे गए मिड-डे मील में एक मरी हुई छिपकली पाई गई। इस भोजन को खाने के बाद कई बच्चों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उन्हें पेट दर्द, उल्टी और जी मिचलाने की शिकायतें होने लगीं।

"घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है और यदि लापरवाही पाई जाती है, तो दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
  -जिला शिक्षा पदाधिकारी।"

 

"मिड-डे मील के ठेकेदारों और स्कूल प्रशासन पर लापरवाही के कारण ये घटना घटी है। बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस उपायों किए जाए। 
             - अभिभावक। "

फिर क्या हुआ?
मिड-डे मील' का खाना खाते हीं कुछ हीं देर में बच्चों की ओर से  पेट दर्द, उल्टी और जी मिचलाने की शिकायतें होने शुरू हो गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, स्कूल प्रशासन ने तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर बच्चों को तुरंत सहरसा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
मामला तो नियंत्रित है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि नियमों के अनुसार, बच्चों को भोजन परोसने से पहले शिक्षकों को उसे चखना और उसकी गुणवत्ता की पुष्टि करनी अनिवार्य है। इन नियमों के बावजूद ऐसी घटना होना, सिस्टम की बड़ी लापरवाही और विफलता को उजागर करता है।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जाँच के आदेश दिए हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा है कि घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है और यदि लापरवाही पाई जाती है, तो दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, अभिभावकों और स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। वे मिड-डे मील के ठेकेदारों और स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस उपायों की माँग कर रहे हैं।
यह घटना मिड-डे मील योजना के कार्यान्वयन और निगरानी में सुधार की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
 अस्पताल से । Watch 👇
 (रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क सहरसा पटना N5) 
Shailendra Kumar
Follow: Facebook