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पहली ही बरसात में उधड़ने लगा ₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे, प्रदेश को लगा बङा फटका।



पहली ही बरसात में उधड़ने लगा ₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे, प्रदेश को लगा बङा फटका।

विशेष रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश

उन्नाव/लखनऊ: हजार करोङ रुपए की लागत से उत्तर प्रदेश में बना गंगा एक्सप्रेसवे का बूरा हाल हो गया है। हाल हीं में उद्घाटन हुआ गंगा एक्सप्रेसवे एक बरसात नहीं झेल सका। पहले उन्नाव के पास धंसने की ख़बर ने लोगो को चौंका दिया। फिर सङक के बीचों-बीच हिस्से में पङी दरारें ने निर्माण पर सवाल खङे कर दिए। और अब आठ फीट गढ्ढा हो गए की नई ख़बर है। गंगा एक्सप्रेस-मार्ग एक बरसात नहीं झेल सकी। 

क्या है पूरा मामला जानते हैं विस्तार से:
उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक, ₹36,000 करोड़ से अधिक की लागत से बने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे की पहली ही मानसूनी बारिश में पोल खुल गई है। लोकार्पण के कुछ ही समय बाद एक्सप्रेसवे की घटिया निर्माण सामग्री, ढुलमुल तकनीक और ड्रेनेज सिस्टम के दावों पर पानी फिर गया है। उन्नाव के पास सड़क धंसने, बीचों-बीच दरारें आने और गहरे गड्ढे बनने से यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है।

हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेसवे के उन्नाव वाले हिस्से से बेहद चिंताजनक तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। बशीरतगंज और सोनिक के पास मिट्टी का कटाव (एम्बैंकमेंट धंसाव) होने से मुख्य सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई।
कई स्थानों पर सड़क के बीचों-बीच पड़ी लंबी और चौड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं। पैचवर्क और मरम्मत किए जाने के बाद भी दोबारा दरारें उभर आईं। कई जगहों पर बारिश के कटाव के कारण गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे तेज रफ्तार से गुजरने वाली गाड़ियों के लिए बड़ा हादसा होने का खतरा मंडरा रहा है।
सोनिक टोल प्लाजा और उससे जुड़ी सर्विस लेन पर बारिश के बाद लगभग 2 फीट तक जलजमाव हो गया। पानी भर जाने के कारण गाड़ियों के अंदर तक पानी चला गया और वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण स्थानीय लोगों और यात्रियों ने एक्सप्रेसवे के निर्माण पर कड़ा असंतोष जताया है।

प्रमुख बिंदु एवं निर्माण खामियां:
मिट्टी का कटाव (Embankment Failure): बारिश के पानी के तेज बहाव को रोकने के लिए एम्बैंकमेंट की प्रॉपर पिचिंग नहीं की गई, जिससे मिट्टी बह गई और सड़क धंस गई।
बार-बार उभरती दरारें: मरम्मत के तुरंत बाद फिर से दरारें आना घटिया डामर (Asphalt) और कमजोर बेस (Sub-grade) की ओर इशारा करता है।
जलजमाव व ड्रेनेज में लापरवाही: टोल और सर्विस लेन के पास पानी निकासी के कोई पुख्ता इंतजाम न होने से पूरा इलाका जलमग्न हो गया।
एजेंसियों का पक्ष और मरम्मत का काम
घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) की टीमें मौके पर पहुंचीं और मरम्मत का काम शुरू कराया गया। निर्माण एजेंसी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रतिनिधियों के अनुसार, जलभराव रोकने के लिए दीवार बनाने और एम्बैंकमेंट को मजबूत करने का कार्य जारी है।

N5: मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पहली ही बारिश में हजारों करोड़ के एक्सप्रेसवे का इस तरह क्षतिग्रस्त होना निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल उठाता है। सरकार को निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय करते हुए पूरे रूट का थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट कराना चाहिए।
#Watch👇
 (रिपोर्ट-शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
Shailendra Kumar
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पहली ही बरसात में उधड़ने लगा ₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे, प्रदेश को लगा बङा फटका।



पहली ही बरसात में उधड़ने लगा ₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे, प्रदेश को लगा बङा फटका।

विशेष रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश

उन्नाव/लखनऊ: हजार करोङ रुपए की लागत से उत्तर प्रदेश में बना गंगा एक्सप्रेसवे का बूरा हाल हो गया है। हाल हीं में उद्घाटन हुआ गंगा एक्सप्रेसवे एक बरसात नहीं झेल सका। पहले उन्नाव के पास धंसने की ख़बर ने लोगो को चौंका दिया। फिर सङक के बीचों-बीच हिस्से में पङी दरारें ने निर्माण पर सवाल खङे कर दिए। और अब आठ फीट गढ्ढा हो गए की नई ख़बर है। गंगा एक्सप्रेस-मार्ग एक बरसात नहीं झेल सकी। 

क्या है पूरा मामला जानते हैं विस्तार से:
उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक, ₹36,000 करोड़ से अधिक की लागत से बने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे की पहली ही मानसूनी बारिश में पोल खुल गई है। लोकार्पण के कुछ ही समय बाद एक्सप्रेसवे की घटिया निर्माण सामग्री, ढुलमुल तकनीक और ड्रेनेज सिस्टम के दावों पर पानी फिर गया है। उन्नाव के पास सड़क धंसने, बीचों-बीच दरारें आने और गहरे गड्ढे बनने से यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है।

हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेसवे के उन्नाव वाले हिस्से से बेहद चिंताजनक तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। बशीरतगंज और सोनिक के पास मिट्टी का कटाव (एम्बैंकमेंट धंसाव) होने से मुख्य सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई।
कई स्थानों पर सड़क के बीचों-बीच पड़ी लंबी और चौड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं। पैचवर्क और मरम्मत किए जाने के बाद भी दोबारा दरारें उभर आईं। कई जगहों पर बारिश के कटाव के कारण गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे तेज रफ्तार से गुजरने वाली गाड़ियों के लिए बड़ा हादसा होने का खतरा मंडरा रहा है।
सोनिक टोल प्लाजा और उससे जुड़ी सर्विस लेन पर बारिश के बाद लगभग 2 फीट तक जलजमाव हो गया। पानी भर जाने के कारण गाड़ियों के अंदर तक पानी चला गया और वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण स्थानीय लोगों और यात्रियों ने एक्सप्रेसवे के निर्माण पर कड़ा असंतोष जताया है।

प्रमुख बिंदु एवं निर्माण खामियां:
मिट्टी का कटाव (Embankment Failure): बारिश के पानी के तेज बहाव को रोकने के लिए एम्बैंकमेंट की प्रॉपर पिचिंग नहीं की गई, जिससे मिट्टी बह गई और सड़क धंस गई।
बार-बार उभरती दरारें: मरम्मत के तुरंत बाद फिर से दरारें आना घटिया डामर (Asphalt) और कमजोर बेस (Sub-grade) की ओर इशारा करता है।
जलजमाव व ड्रेनेज में लापरवाही: टोल और सर्विस लेन के पास पानी निकासी के कोई पुख्ता इंतजाम न होने से पूरा इलाका जलमग्न हो गया।
एजेंसियों का पक्ष और मरम्मत का काम
घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) की टीमें मौके पर पहुंचीं और मरम्मत का काम शुरू कराया गया। निर्माण एजेंसी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रतिनिधियों के अनुसार, जलभराव रोकने के लिए दीवार बनाने और एम्बैंकमेंट को मजबूत करने का कार्य जारी है।

N5: मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पहली ही बारिश में हजारों करोड़ के एक्सप्रेसवे का इस तरह क्षतिग्रस्त होना निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल उठाता है। सरकार को निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय करते हुए पूरे रूट का थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट कराना चाहिए।
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 (रिपोर्ट-शैलेन्द्र कुमार न्यूज डेस्क N5)
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